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शूलिनी मेले में दो दिन में 20 प्रतिशत कारोबार, घाटे से जूझ रहे कारोबारी
Updated Sun, 24 Jun 2018 10:47 PM IST
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प्रशासन और नगर परिषद ने बढ़ाए थे झूले और स्टॉल के दाम
- फोटो : अमर उजाला
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अमर उजाला ब्यूूरो
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सोलन। तीन दिवसीय शूलिनी मेेले में अब तक महज 20 प्रतिशत कारोबार ही हो पाया है। लाखों रुपये खर्च कर झूले और स्टॉल लगाने वाले कारोबारियों पर बढ़ी कीमतों और जीएसटी का असर देखने को मिल रहा है। मेले के शुरूआती दो दिन में भीड़ कम होने के कारण बिक्री कम हुई है।
नगर परिषद और प्रशासन ने ठोडो मैदान में कारोबारियों के लिए झूले और स्टॉल लगाने के लिए जगह चिह्नित की थी। इसमें खाने-पीने और अन्य उत्पादों के स्टॉल लगाए गए हैं। लेकिन इन स्टॉलों में लोगों ने खरीदारी नहीं की। मेले के पहले दो दिनों में ज्यादातर कारोबारी खर्च के 20 से 30 प्रतिशत तक ही कारोबार कर पाए हैं। इस बार सबसे बड़ा नुकसान झूले के कारोबारियों को उठाना पड़ा है। पिछली बार नगर परिषद ने करीब दस लाख रुपये में झूले लगाने के लिए जगह नीलाम की थी। इस बार इसे बढ़ाकर साढ़े 14 लाख रुपये किया गया था। नीलामी के दौरान इसका दाम 17 लाख रुपये तक पहुंच गया।
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पिछले साल के मुकाबले करीब सात लाख रुपये ज्यादा हासिल करने के बावजूद प्रशासन ने झूले के टिकटों के दाम में कोई बढ़ोत्तरी नहीं की। साथ ही पौने दस बजे झूले बंद किए जा रहे हैं। इसका नुकसान संचालकों को झेलना पड़ रहा है। ऐसा ही हाल खान-पान के स्टॉल लगाने वालों का भी है। भारी कीमतों पर स्टॉल हासिल करने वाले अपणो राजस्थान समेत अन्य संचालकों ने बताया कि लोग खान-पान में कम रुचि ले रहे हैं। इससे इस बार भारी नुकसान की आशंका है।
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24 लाख पूरे करना मुश्किल : रोहित
झूला संचालक कंपनी के प्रभारी रोहित चौहान ने बताया कि जीएसटी समेत अन्य खर्च मिलाकर अब तक करीब 24 लाख रुपये लग चुके हैं। लेकिन इसके एवज में कमाई 20 प्रतिशत भी नहीं है। नगर परिषद ने इस बार टेंडर महंगा किया लेकिन प्रशासन ने टिकट के दाम नहीं बढ़ाए। उन्होंने बताया कि इस बार खर्च पूरा करना भी मुश्किल हो रहा है। पिछले दो दिनों से मेले में ज्यादा लोग नहीं पहुंच पाए हैं। झूले पूरा दिन लगातार नहीं चल पा रहे हैं। इससे इस बार लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
गाड़ियों ने बढ़ाई भीड़, हादसे का खतरा
शूलिनी मेला मैदान में गाड़ियों के खड़े रहने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। मेला मैदान में एक तरफ प्रशासन ने झूले लगाने के लिए जगह चिह्नित कर रखी है और दूसरी तरफ वीआईपी गाड़ियों को खड़ा किया जा रहा है। इससे झूले वाली जगह पहुंच रहे लोगों को भारी भीड़ झेलनी पड़ रही है। यहां लगातार हादसे का भी खतरा बना हुआ है। जबकि प्रशासन ने मेले के शुरूआती बैठकों में मैदान में वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाने की बात कही थी। मेले में पहुंचने वाले मुख्यातिथि के काफिले में शामिल वाहन भी मेला मैदान में खड़े हो रहे हैं। इससे सांस्कृतिक संध्या के दौरान शाम को भगदड़ का माहौल बन रहा है। झूले के लिए पहुंचने वालों को धक्कामुक्की झेलनी पड़ रही है। यहां ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मचारियों के लिए भी मुसीबत बन गई है।
पांच दिन तक लग पाएंगे झूले और स्टॉल : नगरपरिषद
नगर परिषद के अध्यक्ष देवेंद्र ठाकुर का कहना है कि झूले और स्टॉल के टेंडर नगर परिषद ने किए हैं। जिन लोगों ने टेंडर हासिल किए थे उन्हें इस बारे में जानकारी रखनी चाहिए थी। उन्होंने बताया कि मेले के दौरान पांच दिन तक झूले और स्टॉल लगे रहेंगे। मेला भले ही तीन दिन का है लेकिन एक दिन आने और एक दिन जाने को भी इसमें जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि लोग सांस्कृतिक संध्या और खेलकूद स्पर्धा देखने के लिए पहुंच रहे हैं। सोमवार से खरीददारी बढ़ेगी।