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शहर की लाइब्रेरी में किताबें ही नहीं नौकरी भी मिलेगी
Updated Fri, 27 Oct 2017 10:20 PM IST
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सोलन शहर की लाइब्रेरी में जमीन पर बैठकर पढ़ाई करते युवा।
- फोटो : अमर उजाला
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सोलन। शहर में युवाओं को शिक्षित करने और पुस्तकों के प्रति रुचि बढ़ाने के मकसद से संचालित किए पुस्तकालय भवन में युवाओं को रोजगार भी मिल रहा है। यहां नियमित रूप से दो लोगों की ड्यूटी पुस्तकालय खोलने और बंद करने के लिए लगाई जा रही है। पढ़ाई के इच्छुक यह युवक हर दस दिन बाद बदल दिए जाते हैं। पढ़ने के लिए पुस्तकालय आने के एवज में इन्हें कमाई का एक जरिया भी मिल रहा है। दस दिन इनके पुस्तकालय भवन को खोलने और बंद करने की ड्यूटी के दौरान सरकारी नियमों के अनुरूप उन्हें भुगतान भी किया जा रहा है। इसमें सौ रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान हो रहा है।
उपायुक्त कार्यालय के शहर से बाहर जाने के बाद यह युवाओं के लिए बड़ी सौगात की बात थी कि उनके लिए चौबीस घंटे पुस्तकालय शहर में खुला रहेगा। इससे पूर्व सोलन शहर का पुस्तकालय मालरोड पर छोटी सी जगह में था। यहां एक बार में तीस से अधिक छात्र नहीं बैठ सकते थे। छात्र-छात्राओं को अपनी बारी के इंतजार में सड़क पर खड़े रहना पड़ता था। लेकिन अब नया पुस्तकालय भवन खुलने के बाद इस पुस्तकालय में करीब 350 बच्चे आराम से एक साथ बैठ कर पढ़ सकते हैं।
पुस्तकालय में सभी विषयों से संबंधित किताबें, विशेषकर प्रतिस्पर्धा परीक्षाओं के लिए सभी प्रकार की किताबें उपलब्ध हैं। छात्रों को अपनी खुद की पुस्तकों को पढ़ने की अनुमति भी दी है। अब पुस्तकालय में कैंटीन भी विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध करवाई गई है जिसमें वह अपने दिमाग को आराम देने के लिए थोड़ी देर अपना खानपान कर सकते है। फिलहाल पुस्तकालय भवन सुबह छह बजे से रात के दस बजे तक खुल रहता है।
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क्या कहते हैं बच्चे
मनीषा का कहना है कि समय-समय पर प्रतिस्पर्धा परीक्षा की पुस्तकें आती रहती हैं जिससे वह समय रहते ही पढ़ पाती हैं। अच्छे से परीक्षा की तैयारी कर रही है। उनका कहना है शांत वातावरण में सभी पढ़ाई पर अपना ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। यहां का माहौल खुद को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने लायक है।
अच्छा फर्नीचर उपलब्ध है
दिव्या ने कहा कि इस पुस्तकालय की खासियत यह है कि यह छात्रों कि आवश्यकता के अनुसार पहले से काफी अच्छी हालत में यहां फर्नीचर उपलब्ध करवाए गए हैं। पुराने पुस्तकालय में बैठने कि जगह की कमी थी लेकिन नए पुस्तकालय भवन में छात्र कहीं भी बैठकर, टेबल पर, सोफे पर या बीन बैग पर बैठकर पढ़ सकते हैं और पढ़ने के लिए हर कमरे में खुली जगह उपलब्ध है।
कैंटीन खुलने से मिली राहत
विशी ने कहा कि नए पुस्तकालय भवन में कैंटीन खुलने से बच्चों को बाहर खानपान करने जाने की जरूरत नहीं है। बाहर आनेजाने में विद्यार्थियों का समय खराब होता था लेकिन अब यह सेवा भी पुस्तकालय में उपलब्ध करवा दी है तो सभी छात्रों का समय बच जाता है। कैंटीन में घर का बना साफ सुथरा खाना मिलता है।
रोजाना आते हैं डेढ़ सौ बच्चे
पुस्तकालय प्रभारी अभिनव ने बताया कि पुस्तकालय में फिलहाल लाइब्रेरियन नहीं है। सभी विद्यार्थी इस पुस्तकालय में सुबह से शाम तक ध्यान लगाकर बिना किसी रोक टोक के पढ़ सकते हैं। रोजाना के डेढ़ सौ बच्चों को पुस्तकालय में, 80 बच्चों को पुस्तकालय के स्टडी रूम और 80 बच्चों के लिए विचार केंद्र में पढ़ने की जगह उपलब्ध करवाई है। समय-समय पर यहां लेक्चर भी लगाए जाते हैं। जल्द ही विद्यार्थियों के लिए क्लासेज का बंदोबस्त करवाया जाएगा।
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उपायुक्त कार्यालय के शहर से बाहर जाने के बाद यह युवाओं के लिए बड़ी सौगात की बात थी कि उनके लिए चौबीस घंटे पुस्तकालय शहर में खुला रहेगा। इससे पूर्व सोलन शहर का पुस्तकालय मालरोड पर छोटी सी जगह में था। यहां एक बार में तीस से अधिक छात्र नहीं बैठ सकते थे। छात्र-छात्राओं को अपनी बारी के इंतजार में सड़क पर खड़े रहना पड़ता था। लेकिन अब नया पुस्तकालय भवन खुलने के बाद इस पुस्तकालय में करीब 350 बच्चे आराम से एक साथ बैठ कर पढ़ सकते हैं।
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पुस्तकालय में सभी विषयों से संबंधित किताबें, विशेषकर प्रतिस्पर्धा परीक्षाओं के लिए सभी प्रकार की किताबें उपलब्ध हैं। छात्रों को अपनी खुद की पुस्तकों को पढ़ने की अनुमति भी दी है। अब पुस्तकालय में कैंटीन भी विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध करवाई गई है जिसमें वह अपने दिमाग को आराम देने के लिए थोड़ी देर अपना खानपान कर सकते है। फिलहाल पुस्तकालय भवन सुबह छह बजे से रात के दस बजे तक खुल रहता है।
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क्या कहते हैं बच्चे
मनीषा का कहना है कि समय-समय पर प्रतिस्पर्धा परीक्षा की पुस्तकें आती रहती हैं जिससे वह समय रहते ही पढ़ पाती हैं। अच्छे से परीक्षा की तैयारी कर रही है। उनका कहना है शांत वातावरण में सभी पढ़ाई पर अपना ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। यहां का माहौल खुद को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने लायक है।
अच्छा फर्नीचर उपलब्ध है
दिव्या ने कहा कि इस पुस्तकालय की खासियत यह है कि यह छात्रों कि आवश्यकता के अनुसार पहले से काफी अच्छी हालत में यहां फर्नीचर उपलब्ध करवाए गए हैं। पुराने पुस्तकालय में बैठने कि जगह की कमी थी लेकिन नए पुस्तकालय भवन में छात्र कहीं भी बैठकर, टेबल पर, सोफे पर या बीन बैग पर बैठकर पढ़ सकते हैं और पढ़ने के लिए हर कमरे में खुली जगह उपलब्ध है।
कैंटीन खुलने से मिली राहत
विशी ने कहा कि नए पुस्तकालय भवन में कैंटीन खुलने से बच्चों को बाहर खानपान करने जाने की जरूरत नहीं है। बाहर आनेजाने में विद्यार्थियों का समय खराब होता था लेकिन अब यह सेवा भी पुस्तकालय में उपलब्ध करवा दी है तो सभी छात्रों का समय बच जाता है। कैंटीन में घर का बना साफ सुथरा खाना मिलता है।
रोजाना आते हैं डेढ़ सौ बच्चे
पुस्तकालय प्रभारी अभिनव ने बताया कि पुस्तकालय में फिलहाल लाइब्रेरियन नहीं है। सभी विद्यार्थी इस पुस्तकालय में सुबह से शाम तक ध्यान लगाकर बिना किसी रोक टोक के पढ़ सकते हैं। रोजाना के डेढ़ सौ बच्चों को पुस्तकालय में, 80 बच्चों को पुस्तकालय के स्टडी रूम और 80 बच्चों के लिए विचार केंद्र में पढ़ने की जगह उपलब्ध करवाई है। समय-समय पर यहां लेक्चर भी लगाए जाते हैं। जल्द ही विद्यार्थियों के लिए क्लासेज का बंदोबस्त करवाया जाएगा।