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Solan News: सोलन में 125 हेक्टेयर जंगल जलकर राख, अब डगशाई की पहाड़ियों में भड़की आग
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वन विभाग को अब तक 8 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान,शमलेच के जंगलों में भारी नुकसान
सेना ने कसौली में पाया आग पर काबू
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिला मुख्यालय सोलन और उसके आसपास के पहाड़ी इलाकों में भड़की जंगलों की आग थमने का नाम नहीं ले रही। बीते एक सप्ताह से जारी इस भीषण आग की चपेट में आने से अब तक डेढ़ दर्जन से अधिक जंगल जलकर पूरी तरह राख हो चुके हैं। वन विभाग से प्राप्त शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, जिला मुख्यालय के करीब 125 हेक्टेयर वन भूमि पूरी तरह से आग की भेंट चढ़ चुकी है।
वन विभाग की ओर से नुकसान का आकलन अभी भी जारी है, लेकिन प्रारंभिक तौर पर विभाग को करीब 8 लाख रुपये से अधिक का वित्तीय नुकसान हो चुका है। वन अधिकारियों के मुताबिक, इस आग में सबसे ज्यादा नुकसान उन छोटे पौधों और नई पौध को पहुंचा है, जिन्हें बीते कुछ वर्षों में पौधारोपण अभियानों के तहत लगाया गया था। इसके साथ ही जंगलों में रहने वाले वन्यजीवों और बहुमूल्य जड़ी-बूटियों को भी अपूरणीय क्षति हुई है। आग की तेज लपटों और धुएं के कारण पूरे इलाके में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है और धुंध छाई हुई है। ताजा मामलों के अनुसार, कसौली के जंगलों में मचे कोहराम के बाद अब आग ने डगशाई के जंगलों को अपनी चपेट में ले लिया है। डगशाई की पहाड़ियों से उठती तेज लपटें और धुआं दूर-दूर से देखा जा रहा है। सोलन शहर के साथ लगते देवठी और शमलेच के जंगल भी इस भीषण आग में पूरी तरह जलकर राख हो रहे हैं। स्थानीय प्रशासन और वन विभाग की टीमें लगातार आग पर काबू पाने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन तेज हवाओं और सूखे मौसम के कारण आग तेजी से फैल रही है।
सेना और छावनी परिषद के प्रयासों से कसौली में राहत
बीते कई दिनों से सेना के आवासीय क्षेत्रों और एयरफोर्स स्टेशन के नजदीक तक आग पहुंच गई थी। भारतीय सेना, वायुसेना (हेलिकाप्टर की मदद से) और छावनी परिषद के अथक प्रयासों और संयुक्त ऑपरेशन के बाद अब कसौली के जंगलों में लगी आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया है। हालांकि, डगशाई और अन्य इलाकों में अभी भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
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कोट
वन विभाग की टीमें लगातार फील्ड पर मुस्तैद हैं और नुकसान का सटीक आकलन किया जा रहा है। अभी तक करीब 125 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ है और 8 लाख के नुकसान का अनुमान है। आग पर काबू पाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं और स्थानीय लोगों से भी अपील है कि वे जंगलों में आग न लगाएं।
-समीर राज, डीएफओ, सोलन
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सेना ने कसौली में पाया आग पर काबू
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिला मुख्यालय सोलन और उसके आसपास के पहाड़ी इलाकों में भड़की जंगलों की आग थमने का नाम नहीं ले रही। बीते एक सप्ताह से जारी इस भीषण आग की चपेट में आने से अब तक डेढ़ दर्जन से अधिक जंगल जलकर पूरी तरह राख हो चुके हैं। वन विभाग से प्राप्त शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, जिला मुख्यालय के करीब 125 हेक्टेयर वन भूमि पूरी तरह से आग की भेंट चढ़ चुकी है।
वन विभाग की ओर से नुकसान का आकलन अभी भी जारी है, लेकिन प्रारंभिक तौर पर विभाग को करीब 8 लाख रुपये से अधिक का वित्तीय नुकसान हो चुका है। वन अधिकारियों के मुताबिक, इस आग में सबसे ज्यादा नुकसान उन छोटे पौधों और नई पौध को पहुंचा है, जिन्हें बीते कुछ वर्षों में पौधारोपण अभियानों के तहत लगाया गया था। इसके साथ ही जंगलों में रहने वाले वन्यजीवों और बहुमूल्य जड़ी-बूटियों को भी अपूरणीय क्षति हुई है। आग की तेज लपटों और धुएं के कारण पूरे इलाके में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है और धुंध छाई हुई है। ताजा मामलों के अनुसार, कसौली के जंगलों में मचे कोहराम के बाद अब आग ने डगशाई के जंगलों को अपनी चपेट में ले लिया है। डगशाई की पहाड़ियों से उठती तेज लपटें और धुआं दूर-दूर से देखा जा रहा है। सोलन शहर के साथ लगते देवठी और शमलेच के जंगल भी इस भीषण आग में पूरी तरह जलकर राख हो रहे हैं। स्थानीय प्रशासन और वन विभाग की टीमें लगातार आग पर काबू पाने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन तेज हवाओं और सूखे मौसम के कारण आग तेजी से फैल रही है।
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सेना और छावनी परिषद के प्रयासों से कसौली में राहत
बीते कई दिनों से सेना के आवासीय क्षेत्रों और एयरफोर्स स्टेशन के नजदीक तक आग पहुंच गई थी। भारतीय सेना, वायुसेना (हेलिकाप्टर की मदद से) और छावनी परिषद के अथक प्रयासों और संयुक्त ऑपरेशन के बाद अब कसौली के जंगलों में लगी आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया है। हालांकि, डगशाई और अन्य इलाकों में अभी भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
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वन विभाग की टीमें लगातार फील्ड पर मुस्तैद हैं और नुकसान का सटीक आकलन किया जा रहा है। अभी तक करीब 125 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ है और 8 लाख के नुकसान का अनुमान है। आग पर काबू पाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं और स्थानीय लोगों से भी अपील है कि वे जंगलों में आग न लगाएं।
-समीर राज, डीएफओ, सोलन