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Solan News: 108 व 102 एंबुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल, मरीज बेहाल
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क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में एंबुलेंस न मिलने से मरीज को निजी वाहन से लाते तीमारदार। संवाद
सुविधा न मिलने के चलते लोगों को निजी वाहनों का लेना पड़ा सहारा
न्यूनतम वेतन और ओवरटाइम का भुगतान न होने पर अड़े कर्मी
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। 108 व 102 एंबुलेंस के कर्मचारी न्यूनतम वेतन और ओवरटाइम का भुगतान न होने पर हड़ताल पर उतर गए हैं। एंबुलेंस कर्मियों के हड़ताल पर जाने के बाद लोग भटकते रहे। हालात ये हो गए कि अस्पतालों से रेफर होने वाले मरीजों को निजी वाहनों में शिमला या चंडीगढ़ ले जाना पड़ा। इससे मरीजों की जान पर बन आई। क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में भी यही हाल देखने को मिला। आपातस्थिति में मरीजों को एंबुलेंस की बजाय निजी वाहनों और ऑटो से अस्पताल पहुंचाया। इससे मरीजों को रास्ते में जाम से भी दो-चार होना पड़ा। हालांकि, कई जगहों पर जिला स्वास्थ्य विभाग ने चालकों को तैनात कर आपातस्थिति में मरीजों को सेवाएं दी, लेकिन एक साथ दो-दो कॉल आने से दिक्कतें आई हैं। ऐसे में कई मरीजों को आपातस्थिति में एंबुलेंस का सहारा नहीं मिला सका। इस कारण मरीज निजी वाहनों और ऑटो में अस्पतालों के आपातकालीन कक्ष तक पहुंचे। एंबुलेंस का संचालन कर रही कंपनी ने दावा किया है कि बद्दी, धर्मपुर, अर्की समेत अन्य जगहों में एंबुलेंस सुविधा प्रदान की गई है। कंपनी और जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से तैनात कर्मियों के साथ मिलकर कार्य किया है। गौर रहे कि प्रदेश में 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारियों ने मांगों को लेकर और नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) की नीतियों के खिलाफ हड़ताल की। सीटू संबंधित कर्मचारियों की हड़ताल शुक्रवार रात 8:00 बजे तक लागू रही। इससे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कर्मचारियों का कहना है कि एनएचएम के अधीन काम कर रहे कर्मचारी शोषण का शिकार हो रहे हैं। हाईकोर्ट, लेबर कोर्ट, सीजीएम कोर्ट शिमला और श्रम कार्यालय के आदेशों के बावजूद कर्मचारियों का शोषण जारी है। सरकार की ओर से निर्धारित न्यूनतम वेतन भी नहीं मिलता और 12 घंटे की ड्यूटी के बावजूद ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया जा रहा। कर्मचारियों को मानसिक प्रताड़ना के कारण नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर होते हैं। ईपीएफ और ईएसआई के क्रियान्वयन में भी गंभीर त्रुटियां हैं। इससे कर्मचारियों के मूल वेतन में कमी और श्रम कानूनों का उल्लंघन हो रहा है। बार-बार मांग करने के बावजूद भी कर्मचारियों की मांगों को लेकर उदासीन रवैया अपनाया जा रहा है।
केस स्टडी-1
भोजनगर क्षेत्र के व्यक्ति लायक राम ने बताया कि उन्होंने अपने मरीज को आपातस्थिति क्षेत्रीय अस्पताल ले जाने के लिए 108 एंबुलेंस के लिए कॉल की गई थी। दोपहर 12:30 बजे कॉल करने के बाद उन्होंने जल्द ही एंबुलेंस भेजने के लिए कहा था, लेकिन 1:30 बजे तक एंबुलेंस सुविधा नहीं मिल सकी। इसके बाद वे मरीज की बिगड़ती हुई स्थिति को देखते हुए टैक्सी के माध्यम से क्षेत्रीय अस्पताल सोलन पहुंचे। उन्होंने बताया कि पहली बार ऐसा हुआ है कि एंबुलेंस की सुविधा एक घंटे तक नहीं मिली और परेशान होना पड़ा। इससे मरीज की जान से एंबुलेंस चालक खेल रहे हैं।
केस स्टडी-2
चायल के रहने वाले जय चंद ने बताया कि पत्नी के पेट में दर्द हुआ। इसके बाद वे चायल अस्पताल गए। जहां उनकी पत्नी क्षेत्रीय अस्पताल सोलन रेफर कर दिया। वह 108 को कॉल करने लगे तो पता चला कि शुक्रवार को हड़ताल है। ऐसे में उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दर्द में कोहराती हुई पत्नी को सोलन तक बस में लेकर आए। उन्होंने कहा कि चालकों के खिलाफ सरकार को कड़ा संज्ञान लेना चाहिए क्योंकि मरीज आपातस्थिति में ही एंबुलेंस का सहारा लेता है।
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प्रदेशभर में कंपनी के कर्मचारियों को तैनात कर एंबुलेंस का संचालन किया जा रहा है। कंपनी की ओर से कर्मचारियों की पहले ही बातें मान ली गई है। जो कर्मचारी हड़ताल पर जा रहे थे उन्हें कंपनी की ओर समझाया गया था, लेकिन कई जगहों में कर्मचारियों ने एंबुलेंस नहीं चलाई है। सरकार की ओर से भी कर्मचारी दिए गए थे। जिला सोलन के अर्की, धर्मपुर, नालागढ़, बद्दी में एंबुलेंस कर्मियों की ओर से ही चलाई गई। साथ ही जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से दिए कर्मचारियों की मदद ली गई।
अशोक दासन,108 एंबुलेंस संचालन कंपनी प्रबंधक,धर्मपुर
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न्यूनतम वेतन और ओवरटाइम का भुगतान न होने पर अड़े कर्मी
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। 108 व 102 एंबुलेंस के कर्मचारी न्यूनतम वेतन और ओवरटाइम का भुगतान न होने पर हड़ताल पर उतर गए हैं। एंबुलेंस कर्मियों के हड़ताल पर जाने के बाद लोग भटकते रहे। हालात ये हो गए कि अस्पतालों से रेफर होने वाले मरीजों को निजी वाहनों में शिमला या चंडीगढ़ ले जाना पड़ा। इससे मरीजों की जान पर बन आई। क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में भी यही हाल देखने को मिला। आपातस्थिति में मरीजों को एंबुलेंस की बजाय निजी वाहनों और ऑटो से अस्पताल पहुंचाया। इससे मरीजों को रास्ते में जाम से भी दो-चार होना पड़ा। हालांकि, कई जगहों पर जिला स्वास्थ्य विभाग ने चालकों को तैनात कर आपातस्थिति में मरीजों को सेवाएं दी, लेकिन एक साथ दो-दो कॉल आने से दिक्कतें आई हैं। ऐसे में कई मरीजों को आपातस्थिति में एंबुलेंस का सहारा नहीं मिला सका। इस कारण मरीज निजी वाहनों और ऑटो में अस्पतालों के आपातकालीन कक्ष तक पहुंचे। एंबुलेंस का संचालन कर रही कंपनी ने दावा किया है कि बद्दी, धर्मपुर, अर्की समेत अन्य जगहों में एंबुलेंस सुविधा प्रदान की गई है। कंपनी और जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से तैनात कर्मियों के साथ मिलकर कार्य किया है। गौर रहे कि प्रदेश में 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारियों ने मांगों को लेकर और नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) की नीतियों के खिलाफ हड़ताल की। सीटू संबंधित कर्मचारियों की हड़ताल शुक्रवार रात 8:00 बजे तक लागू रही। इससे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कर्मचारियों का कहना है कि एनएचएम के अधीन काम कर रहे कर्मचारी शोषण का शिकार हो रहे हैं। हाईकोर्ट, लेबर कोर्ट, सीजीएम कोर्ट शिमला और श्रम कार्यालय के आदेशों के बावजूद कर्मचारियों का शोषण जारी है। सरकार की ओर से निर्धारित न्यूनतम वेतन भी नहीं मिलता और 12 घंटे की ड्यूटी के बावजूद ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया जा रहा। कर्मचारियों को मानसिक प्रताड़ना के कारण नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर होते हैं। ईपीएफ और ईएसआई के क्रियान्वयन में भी गंभीर त्रुटियां हैं। इससे कर्मचारियों के मूल वेतन में कमी और श्रम कानूनों का उल्लंघन हो रहा है। बार-बार मांग करने के बावजूद भी कर्मचारियों की मांगों को लेकर उदासीन रवैया अपनाया जा रहा है।
केस स्टडी-1
भोजनगर क्षेत्र के व्यक्ति लायक राम ने बताया कि उन्होंने अपने मरीज को आपातस्थिति क्षेत्रीय अस्पताल ले जाने के लिए 108 एंबुलेंस के लिए कॉल की गई थी। दोपहर 12:30 बजे कॉल करने के बाद उन्होंने जल्द ही एंबुलेंस भेजने के लिए कहा था, लेकिन 1:30 बजे तक एंबुलेंस सुविधा नहीं मिल सकी। इसके बाद वे मरीज की बिगड़ती हुई स्थिति को देखते हुए टैक्सी के माध्यम से क्षेत्रीय अस्पताल सोलन पहुंचे। उन्होंने बताया कि पहली बार ऐसा हुआ है कि एंबुलेंस की सुविधा एक घंटे तक नहीं मिली और परेशान होना पड़ा। इससे मरीज की जान से एंबुलेंस चालक खेल रहे हैं।
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केस स्टडी-2
चायल के रहने वाले जय चंद ने बताया कि पत्नी के पेट में दर्द हुआ। इसके बाद वे चायल अस्पताल गए। जहां उनकी पत्नी क्षेत्रीय अस्पताल सोलन रेफर कर दिया। वह 108 को कॉल करने लगे तो पता चला कि शुक्रवार को हड़ताल है। ऐसे में उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दर्द में कोहराती हुई पत्नी को सोलन तक बस में लेकर आए। उन्होंने कहा कि चालकों के खिलाफ सरकार को कड़ा संज्ञान लेना चाहिए क्योंकि मरीज आपातस्थिति में ही एंबुलेंस का सहारा लेता है।
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प्रदेशभर में कंपनी के कर्मचारियों को तैनात कर एंबुलेंस का संचालन किया जा रहा है। कंपनी की ओर से कर्मचारियों की पहले ही बातें मान ली गई है। जो कर्मचारी हड़ताल पर जा रहे थे उन्हें कंपनी की ओर समझाया गया था, लेकिन कई जगहों में कर्मचारियों ने एंबुलेंस नहीं चलाई है। सरकार की ओर से भी कर्मचारी दिए गए थे। जिला सोलन के अर्की, धर्मपुर, नालागढ़, बद्दी में एंबुलेंस कर्मियों की ओर से ही चलाई गई। साथ ही जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से दिए कर्मचारियों की मदद ली गई।
अशोक दासन,108 एंबुलेंस संचालन कंपनी प्रबंधक,धर्मपुर

क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में एंबुलेंस न मिलने से मरीज को निजी वाहन से लाते तीमारदार। संवाद

क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में एंबुलेंस न मिलने से मरीज को निजी वाहन से लाते तीमारदार। संवाद