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काश्तकारों को दिया जाए शामलात भूमि का मालिकाना हक

Mon, 07 Mar 2022 11:32 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 07 Mar 2022 11:32 PM IST
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van adhikaar manch demanded to govt.  ownersship  of samlaat bhumi to kastkaar of  sirmaur district
जिला ग्रामीण अभिकरण कार्यालय में वन अधिनियम को लेकर हुई बैठक में मौजूद जिला के किसान व अन्य लोग। - फोटो : NAHAN
नाहन (सिरमौर)। वन अधिकार मंच ने वन भूमि अधिकारों को लेकर नाहन में जिला स्तरीय बैठक की। इसमेें 25 पंचायतों के लोगों ने हिस्सा लिया। बैठक में वन अधिकार कानून और शामलात भूमि कानून से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा की गई।
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जिला किसान सभा के अध्यक्ष रमेश वर्मा ने कहा कि वर्ष 2001 में सरकार ने जिला में जो शामलात भूमि वापस की थी, उसे एलोटेविल पूल में रखा गया था। उसे भूमिहीन लोगों व सामूहिक जरूरतों के अनुसार रखा जाना चाहिए था लेकिन कई जगहों पर इसे व्यक्तिगत भूमि बना दिया गया है।
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उन्होंने कहा कि 1950 से पहले जिनके भूमि पर मालिकाना हक थे और जो उसका मामला देते थे, उन्हीं को यह भूमि दे दी गई है जिससे समाज में अंसतोष फैल गया है। सरकार के इस कदम से शामलात भूमि और जो बरसों से काश्तकार थे, वह इससे वंचित हो गए हैं।
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उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि शामलात भूमि पर जो बरसों से लोग काश्त कर रहे हैं, उन्हें वहां से न हटाया जाए और उन्हें इसके मालिकाना हक दिया जाए। हिमधरा पर्यावरण समूह के सदस्य प्रकाश भंडारी ने कहा कि वन अधिकार कानून 2006 में पूरे देश में लागू हो गया था, लेकिन सिरमौर की स्थिति देखें तो आज भी यहां वन विभाग की ओर से लोगों को बेदखली के नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत समितियों के सदस्यों और सरकारी अधिकारियों दोनों के लिए तुरंत प्रशिक्षण आयोजित करने की आवश्यकता है क्योंकि वन अधिकार कानून के तहत वन भूमि से कोई भी बेदखली तब तक अवैध है जब तक कानून के अंतर्गत पूरी प्रक्रिया नहीं की जाती।
भंडारी ने कहा कि सबसे बड़ी बात यह है कि वर्तमान में सिरमौर में 40 व्यक्तिगत अधिकार भरे गए हैं, जबकि केवल 2 ही सामूहिक अधिकार है। ऐसा इसलिए हो रहा है कि जिला में लोगों को सरकार व प्रशासन द्वारा संबंधित कानून की पूरी जानकारी नहीं दी जा रही है।

बैठक के उपरांत सिरमौर वन अधिकार मंच पर शामलात संघर्ष समिति ने वन अधिकार कानून और शामलात भूमि कानून से जुड़ी चिंताओं पर उपायुक्त सिरमौर को भी एक ज्ञापन सौंपा। इसके माध्यम से प्रशासन से इस दिशा में उचित कदम उठाने की मांग की गई है।
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