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उत्तर पुस्तिका के मूल्यांकन के निर्णय को बताया अधिनियम के खिलाफ
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नाहन (सिरमौर)। डॉ. वाईएस परमार राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय नाहन में शनिवार को राजकीय महाविद्यालय प्राध्यापक संघ की बैठक आयोजित हुई जिसकी अध्यक्षता इकाई अध्यक्ष डॉ. प्रेम भारद्वाज ने की। बैठक में प्रदेश विवि के परीक्षा नियंत्रक की ओर से निकाली गई अधिसूचना का कड़ा विरोध किया गया।
वक्ताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि अधिसूचना में द्वितीय और तृतीय वर्ष के छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं का महाविद्यालय स्तर पर मूल्यांकन करने का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय विवि के अधिनियम के विपरीत है। बैठक में मौजूद सभी सदस्यों ने महाविद्यालय स्तर पर मूल्यांकन नहीं करने का निर्णय लिया। उन्होंने इस अधिसूचना को तर्कहीन मानते हुए इसे विद्यार्थियों के हितों के विरुद्ध करार दिया।
इस अवसर पर इकाई ने यूजीसी की ओर से निर्धारित सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के प्रति प्रदेश सरकार के ढुलमुल रवैये की भी आलोचना की। प्राध्यापकों ने कहा कि सरकार के गैर जरूरी निर्णय की स्थिति की वजह से प्राध्यापकों को उनके हक से वंचित किया जा रहा है। अंत में प्राचार्य डॉ. दिनेश भारद्वाज ने भी प्राध्यापकों की मांगों का समर्थन किया।
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वक्ताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि अधिसूचना में द्वितीय और तृतीय वर्ष के छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं का महाविद्यालय स्तर पर मूल्यांकन करने का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय विवि के अधिनियम के विपरीत है। बैठक में मौजूद सभी सदस्यों ने महाविद्यालय स्तर पर मूल्यांकन नहीं करने का निर्णय लिया। उन्होंने इस अधिसूचना को तर्कहीन मानते हुए इसे विद्यार्थियों के हितों के विरुद्ध करार दिया।
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इस अवसर पर इकाई ने यूजीसी की ओर से निर्धारित सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के प्रति प्रदेश सरकार के ढुलमुल रवैये की भी आलोचना की। प्राध्यापकों ने कहा कि सरकार के गैर जरूरी निर्णय की स्थिति की वजह से प्राध्यापकों को उनके हक से वंचित किया जा रहा है। अंत में प्राचार्य डॉ. दिनेश भारद्वाज ने भी प्राध्यापकों की मांगों का समर्थन किया।
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