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Sirmour News: चेक बाउंस मामले में आरोपी दोषी करार, एक साल की सजा
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साल 2022 का मामला, दोषी ने शिकायतकर्ता से उधार ली थी 7.50 लाख रुपये की रकम
अदालत ने पीड़ित को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का भी दिया आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। चेक बाउंस के मामले में अदालत ने आरोपी बुद्ध राम को दोषी ठहराते हुए एक साल के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही पीड़ित को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विकास गुप्ता ने यह फैसला सुनाया। मुआवजा न देने की स्थिति में दोषी को तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
शिकायतकर्ता रघुबीर सिंह ने अदालत को बताया कि आरोपी से पुराने संबंध थे। इसी विश्वास के आधार पर साल 2022 में आरोपी ने उनसे समय-समय पर 7.50 लाख रुपये उधार लिए। रकम लौटाने के लिए आरोपी ने तीन चेक दिए लेकिन राजबन एसबीआई बैंक शाखा में सभी चेक खाते में अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गए। कानूनी नोटिस देने के बावजूद आरोपी ने न तो रकम लौटाई और न ही कोई संतोषजनक जवाब दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने अदालत में शिकायत दर्ज करवाई। अदालत ने फैसले में कहा कि चेक पर हस्ताक्षर स्वीकार करने के बाद आरोपी की जिम्मेदारी बनती है कि वह भुगतान करे। बिना ठोस साक्ष्य के दी गई सफाई स्वीकार नहीं की जा सकती। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी अपना पक्ष साबित करने में असफल रहा। संवाद
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अदालत ने पीड़ित को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का भी दिया आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। चेक बाउंस के मामले में अदालत ने आरोपी बुद्ध राम को दोषी ठहराते हुए एक साल के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही पीड़ित को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विकास गुप्ता ने यह फैसला सुनाया। मुआवजा न देने की स्थिति में दोषी को तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
शिकायतकर्ता रघुबीर सिंह ने अदालत को बताया कि आरोपी से पुराने संबंध थे। इसी विश्वास के आधार पर साल 2022 में आरोपी ने उनसे समय-समय पर 7.50 लाख रुपये उधार लिए। रकम लौटाने के लिए आरोपी ने तीन चेक दिए लेकिन राजबन एसबीआई बैंक शाखा में सभी चेक खाते में अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गए। कानूनी नोटिस देने के बावजूद आरोपी ने न तो रकम लौटाई और न ही कोई संतोषजनक जवाब दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने अदालत में शिकायत दर्ज करवाई। अदालत ने फैसले में कहा कि चेक पर हस्ताक्षर स्वीकार करने के बाद आरोपी की जिम्मेदारी बनती है कि वह भुगतान करे। बिना ठोस साक्ष्य के दी गई सफाई स्वीकार नहीं की जा सकती। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी अपना पक्ष साबित करने में असफल रहा। संवाद
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