{"_id":"6ac8d1a6a42b9d25b3063182","slug":"himachali-nati-in-asam-nahan-news-c-177-1-nhn1011-191102-2026-10-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sirmour News: असम में हिमाचल की नाटी पर झूमे दर्शक, शिक्षकों ने बिखेरे लोकसंस्कृति के रंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sirmour News: असम में हिमाचल की नाटी पर झूमे दर्शक, शिक्षकों ने बिखेरे लोकसंस्कृति के रंग
विज्ञापन
सीसीआरटी गुवाहाटी में ‘हमारी सांस्कृतिक विविधता’ प्रशिक्षण के दौरान हिमाचल के 14 शिक्षकों ने दी शानदार प्रस्तुति
संवाद न्यूज एजेंसी
सतौन (सिरमौर)। असम के गुवाहाटी स्थित सीसीआरटी में हिमाचल के शिक्षकों ने लोकगीतों और पारंपरिक नृत्यों से ऐसा समां बांधा कि पूरा सदन नाटी की धुनों पर झूम उठा। ‘हमारी सांस्कृतिक विविधता’ विषय पर पांच से 14 अक्तूबर तक आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के 14 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। दल में 12 अध्यापक और दो अध्यापिकाएं शामिल रहीं।
शिक्षक विजय कंवर ने बताया कि कार्यक्रम में सबसे पहले कमल शर्मा ने पीपीटी के माध्यम से हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की जानकारी दी। इसके बाद शिक्षकों ने लोकगीतों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ प्रदेश की लोकसंस्कृति के रंग बिखेरे। मनोज, सुनील, ओम प्रकाश और विवेक भारद्वाज ने स्वयं गीत गाकर हिमाचल की सांस्कृतिक पहचान को प्रस्तुत किया।
‘गुरु गोविंदो रे पांवटा साहिबो’, ‘रेणुका माईए’, ‘भरतरी गाथा’, ‘देश शोभला हिमाचल प्यारा’, ‘लागा ढूलो रा ढमाका मेरा हिमाचल बड़ा बांका’, झूरी, गांगी, होलो रा फेरा और वीरगाथा हारुलों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रासा, नाटी और युगल नाटी की प्रस्तुतियों ने भी खूब तालियां बटोरीं।
विज्ञापन
लोकनृत्य प्रस्तुत करने वाले शिक्षकों में विजय कंवर, भीम सिंह, संगीता, श्यामा, कमल शर्मा, रति राम, धर्मेंद्र, सूरज, सुभाष और दिनेश सहित अन्य शिक्षक शामिल रहे। विशेष रूप से ‘नाटी सिरमौरो वालिए’ और शिरगुल देवता के लिंबर की प्रस्तुति पर पूरा सदन थिरकने लगा। सीसीआरटी के फील्ड ऑफिसर शशांक पांडे भी खुद को नृत्य करने से नहीं रोक पाए।
हिमाचल के शिक्षकों की इस प्रस्तुति की देशभर से आए शिक्षक-शिक्षिकाओं ने मुक्त कंठ से सराहना की। प्रतिनिधिमंडल ने लोकनृत्य और लोकगीतों के माध्यम से प्रदेश की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया।-- -- -
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
सतौन (सिरमौर)। असम के गुवाहाटी स्थित सीसीआरटी में हिमाचल के शिक्षकों ने लोकगीतों और पारंपरिक नृत्यों से ऐसा समां बांधा कि पूरा सदन नाटी की धुनों पर झूम उठा। ‘हमारी सांस्कृतिक विविधता’ विषय पर पांच से 14 अक्तूबर तक आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के 14 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। दल में 12 अध्यापक और दो अध्यापिकाएं शामिल रहीं।
शिक्षक विजय कंवर ने बताया कि कार्यक्रम में सबसे पहले कमल शर्मा ने पीपीटी के माध्यम से हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की जानकारी दी। इसके बाद शिक्षकों ने लोकगीतों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ प्रदेश की लोकसंस्कृति के रंग बिखेरे। मनोज, सुनील, ओम प्रकाश और विवेक भारद्वाज ने स्वयं गीत गाकर हिमाचल की सांस्कृतिक पहचान को प्रस्तुत किया।
विज्ञापन
‘गुरु गोविंदो रे पांवटा साहिबो’, ‘रेणुका माईए’, ‘भरतरी गाथा’, ‘देश शोभला हिमाचल प्यारा’, ‘लागा ढूलो रा ढमाका मेरा हिमाचल बड़ा बांका’, झूरी, गांगी, होलो रा फेरा और वीरगाथा हारुलों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रासा, नाटी और युगल नाटी की प्रस्तुतियों ने भी खूब तालियां बटोरीं।
विज्ञापन
लोकनृत्य प्रस्तुत करने वाले शिक्षकों में विजय कंवर, भीम सिंह, संगीता, श्यामा, कमल शर्मा, रति राम, धर्मेंद्र, सूरज, सुभाष और दिनेश सहित अन्य शिक्षक शामिल रहे। विशेष रूप से ‘नाटी सिरमौरो वालिए’ और शिरगुल देवता के लिंबर की प्रस्तुति पर पूरा सदन थिरकने लगा। सीसीआरटी के फील्ड ऑफिसर शशांक पांडे भी खुद को नृत्य करने से नहीं रोक पाए।
हिमाचल के शिक्षकों की इस प्रस्तुति की देशभर से आए शिक्षक-शिक्षिकाओं ने मुक्त कंठ से सराहना की। प्रतिनिधिमंडल ने लोकनृत्य और लोकगीतों के माध्यम से प्रदेश की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया।