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Sirmour News: त्रिवेणी संगम पर मां-बेटे के मिलन के साथ शुरू होगा ऐतिहासिक रेणुका मेला

Thu, 30 Oct 2025 11:55 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 30 Oct 2025 11:55 PM IST
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cultural news sirmour
मां रेणुका को दिया वचन निभाने आज पहुंचेंगे भगवान परशुराम
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अध्यात्मिक मिलन के हजारों लोग बनेंगे साक्षी


योगेंद्र अग्रवाल

ददाहू (सिरमौर)। कार्तिक शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को भगवान परशुराम अपनी मां रेणुकाजी से मिलने आने वाले हैं। मां-बेटे के इस अध्यात्मिक मिलन के हजारों लोग साक्षी बनेंगे। भगवान परशुराम अपनी मां रेणुका को दिए वचन को निभाने शुक्रवार को रेणुकाजी पहुंचेंगे।
इस ऐतिहासिक व पारंपरिक मिलन के साथ ही पांच दिनों तक चलने वाला अंतरराष्ट्रीय रेणुका मेला शुक्रवार से शुषष्हो जाएगा, जो कार्तिक पूर्णिमा तक जारी रहेगा। भगवान परशुराम की शोभा यात्रा दोपहर बाद शुरू होगी। स्थानीय खेल मैदान से शोभा यात्रा शाम ढलने से पूर्व रेणुकाजी तीर्थ में प्रवेश करेगी। जहां त्रिवेणी घाट पर मां-पुत्र का अध्यात्मिक मिलन होगा।
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जिला प्रशासन ने मेले की तैयारियां व प्रबंधन पूरे कर दिए हैं। मेले के आयोजन को लेकर रेणुकाजी तीर्थ सहित ददाहू शहर को दुल्हन की तरह सजाया गया है। शोभा यात्रा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु शिरकत करेंगे। शोभा यात्रा के दौरान चढ़ती पालकी में देवताओं के दर्शन करना अति शुभ व कल्याणकारी माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान मांगी गई मुराद अवश्य पूर्ण होती है। इसी मान्यता को लेकर शोभायात्रा में श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ता है। शोभायात्रा के दौरान कुछ लोग देवताओं की पालकी के नीचे से होकर गुजरना भी शुभ मानते हैं। ऐसा करने से जहां उनकी आयु लंबी होती है, वहीं देव कृपा भी उन पर हमेशा के लिए बनी रहती है।
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परंपरा निभाने आएगा राजघराना

अंतरराष्ट्रीय रेणुका मेले में दशकों पुरानी परंपरा को सिरमौर राजघराना आज भी पूरी श्रद्धा से निभाता है। सिरमौर राज परिवार के वंशज और राजघराने के वरिष्ठ सदस्य कंवर अजय बहादुर सिंह अपने परिवार के सदस्यों व वरिष्ठजनों के साथ इस परंपरा का निवेहन करेंगे। गिरि नदी के संगम पर राजपरिवार के वंशज अपने परिवार के साथ भगवान परशुराम की प्रतीक्षा करेंगे और भगवान परशुराम की चांदी जड़ित मुख्य पालकी को अपने कंधों पर उठाकर पंडाल तक लेकर जाएंगे। कंवर अजय बहादुर सिंह ने बताया कि भगवान परशुराम उनके कुल ईष्ट देवता हैं। भगवान परशुराम की उनके परिवार पर विशेष कृपा है। यह परंपरा उनके परिवार के लिए आज भी विशेष मायने रखती है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को परिवार के सदस्यों के साथ देवताओं का अभिवादन करने ददाहू आएंगे।
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