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Sirmour News: अदालत 3
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अपील में नए दस्तावेज पेश करने की अर्जी खारिज
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। अदालत ने एक दीवानी अपील में अतिरिक्त दस्तावेज रिकॉर्ड पर लेने की मांग वाली अर्जी को खारिज कर दिया। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा कि अपील के स्तर पर ऐसे दस्तावेज पेश करने की अनुमति केवल विशेष परिस्थितियों में ही दी जा सकती है और इसका उद्देश्य मामले की कमजोरियों को दूर करना नहीं है।
मामला जिले के त्रिलोकपुर क्षेत्र का है। अपीलकर्ता निर्मल ने वर्ष 1980-81 की जमाबंदी तथा दो इंतकाल को अतिरिक्त साक्ष्य के रूप में रिकॉर्ड पर लेने की मांग की थी। उनका कहना था कि ये दस्तावेज न्यायोचित निर्णय के लिए आवश्यक हैं। प्रतिवादियों ने अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि अपीलकर्ता पहले भी कई आवेदन दाखिल कर कार्यवाही में विलंब करने का प्रयास कर चुका है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पाया कि प्रस्तावित दस्तावेज न तो मूल वाद की दलीलों का हिस्सा थे और न ही ट्रायल कोर्ट में इनके संबंध में कोई साक्ष्य प्रस्तुत किया गया था। अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि अपील में अतिरिक्त साक्ष्य तभी स्वीकार किए जा सकते हैं, जब उचित सावधानी बरतने के बावजूद उन्हें पहले प्रस्तुत करना संभव न रहा हो या न्यायिक निर्णय के लिए उनकी आवश्यकता हो। इन परिस्थितियों का अभाव पाए जाने पर अदालत ने आवेदन को खारिज कर दिया। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। अदालत ने एक दीवानी अपील में अतिरिक्त दस्तावेज रिकॉर्ड पर लेने की मांग वाली अर्जी को खारिज कर दिया। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा कि अपील के स्तर पर ऐसे दस्तावेज पेश करने की अनुमति केवल विशेष परिस्थितियों में ही दी जा सकती है और इसका उद्देश्य मामले की कमजोरियों को दूर करना नहीं है।
मामला जिले के त्रिलोकपुर क्षेत्र का है। अपीलकर्ता निर्मल ने वर्ष 1980-81 की जमाबंदी तथा दो इंतकाल को अतिरिक्त साक्ष्य के रूप में रिकॉर्ड पर लेने की मांग की थी। उनका कहना था कि ये दस्तावेज न्यायोचित निर्णय के लिए आवश्यक हैं। प्रतिवादियों ने अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि अपीलकर्ता पहले भी कई आवेदन दाखिल कर कार्यवाही में विलंब करने का प्रयास कर चुका है।
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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पाया कि प्रस्तावित दस्तावेज न तो मूल वाद की दलीलों का हिस्सा थे और न ही ट्रायल कोर्ट में इनके संबंध में कोई साक्ष्य प्रस्तुत किया गया था। अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि अपील में अतिरिक्त साक्ष्य तभी स्वीकार किए जा सकते हैं, जब उचित सावधानी बरतने के बावजूद उन्हें पहले प्रस्तुत करना संभव न रहा हो या न्यायिक निर्णय के लिए उनकी आवश्यकता हो। इन परिस्थितियों का अभाव पाए जाने पर अदालत ने आवेदन को खारिज कर दिया। संवाद
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