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Sirmour News: बड़े भाई शिरगुल महाराज से मिलने पहुंचे बिजट देवता
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देवठन एकादशी पर चूड़धार पहुंचे श्रद्धालु। स्रोत: पाठक
देवठन एकादशी पर चूड़धार में उमड़ा आस्था का सैलाब
चूड़धार में भंडारा बंद, 30 नवबर तक खुली रहेगी धर्मशाला
संवाद न्यूज एजेंसी
नौहराधार (सिरमौर)। देवठन एकादशी पर सराहां से बिजट महाराज अपने बड़े भाई शिरगुल महाराज से मिलने चूड़धार पहुंचे। शिमला और सिरमौर जिले के हजारों श्रद्धालुओं ने इस मिलन समारोह में हाजिरी भरी। दोनों भाइयों के मिलन पर चूड़धार में देवठन मनाया गया।
दरअसल, शिरगुल और बिजट महाराज का एकादशी के दिन वर्ष में एक बार जरूर मिलन होता है। बड़े भाई से मिलने के लिए बिजट महाराज को खास वेशभूषा में सजाकर चूड़धार लाया गया। शाही स्नान करने के बाद व दोनों देवताओं का मिलन करने के बाद देर शाम को चूड़धार में विजट महाराज सराहां के लिए रवाना हुए।
बता दें कि देवठन पर्व में बिजट महाराज सराहां से चूड़धार स्नान के लिए अपनी जातर के साथ आते हैं। उनके साथ सैकड़ों श्रद्धालु स्नान के लिए चूड़धार पंहुचे। सभी श्रद्धालुओं को सेवा समिति की और से भंडारे का विशेष भी प्रबंध किया गया। इसके साथ ही सेवा समिति का भंडारा भी 15 अप्रैल तक बंद हो गया है। रविवार को चूड़ेश्वर समिति के सदस्य एवं अन्य स्टाफ भी अपने-अपने घरों को चल जाएंगे।
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चूड़ेश्वर सेवा समिति के प्रबंधक बाबूराम शर्मा ने बताया कि मंदिर की धर्मशाला 30 नवंबर तक श्रद्धालुओं की सेवा के लिए खुली रहेगी, लेकिन भंडारे का आयोजन नहीं होगा। एक दिसंबर के बाद चूड़धार की यात्रा पर प्रशासनिक तौर पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लग जाएगा।
-- -संवाद
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चूड़धार में भंडारा बंद, 30 नवबर तक खुली रहेगी धर्मशाला
संवाद न्यूज एजेंसी
नौहराधार (सिरमौर)। देवठन एकादशी पर सराहां से बिजट महाराज अपने बड़े भाई शिरगुल महाराज से मिलने चूड़धार पहुंचे। शिमला और सिरमौर जिले के हजारों श्रद्धालुओं ने इस मिलन समारोह में हाजिरी भरी। दोनों भाइयों के मिलन पर चूड़धार में देवठन मनाया गया।
दरअसल, शिरगुल और बिजट महाराज का एकादशी के दिन वर्ष में एक बार जरूर मिलन होता है। बड़े भाई से मिलने के लिए बिजट महाराज को खास वेशभूषा में सजाकर चूड़धार लाया गया। शाही स्नान करने के बाद व दोनों देवताओं का मिलन करने के बाद देर शाम को चूड़धार में विजट महाराज सराहां के लिए रवाना हुए।
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बता दें कि देवठन पर्व में बिजट महाराज सराहां से चूड़धार स्नान के लिए अपनी जातर के साथ आते हैं। उनके साथ सैकड़ों श्रद्धालु स्नान के लिए चूड़धार पंहुचे। सभी श्रद्धालुओं को सेवा समिति की और से भंडारे का विशेष भी प्रबंध किया गया। इसके साथ ही सेवा समिति का भंडारा भी 15 अप्रैल तक बंद हो गया है। रविवार को चूड़ेश्वर समिति के सदस्य एवं अन्य स्टाफ भी अपने-अपने घरों को चल जाएंगे।
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चूड़ेश्वर सेवा समिति के प्रबंधक बाबूराम शर्मा ने बताया कि मंदिर की धर्मशाला 30 नवंबर तक श्रद्धालुओं की सेवा के लिए खुली रहेगी, लेकिन भंडारे का आयोजन नहीं होगा। एक दिसंबर के बाद चूड़धार की यात्रा पर प्रशासनिक तौर पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लग जाएगा।