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Sirmour News: अदालत
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चेक बाउंस मामले में दो साल की कैद और जुर्माने की सजा बरकरार
ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को सुनाई थी सजा और 5.20 लाख का जुर्माना
अब अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने फैसले के खिलाफ अपील की खारिज
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने चेक बाउंस के मामले में दोषी के कैद की सजा को बरकरार रखते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया है। 4 मार्च 2024 को निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) ने तहसील नाहन निवासी नदीम को दो साल के कारावास और 5.20 लाख रुपये मुआवजा देने की सजा सुनाई थी। यह राशि अदा न करने पर दोषी को छह महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतने का आदेश दिया था। इसी फैसले के खिलाफ दोषी ने अतिरिक्त सत्र अदालत में अपील दायर की थी। अब सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए दोषी की अपील खारिज कर दी।
शिकायतकर्ता सुनीता शर्मा के अनुसार जनवरी 2017 में उसने आरोपी से शपथ पत्र के माध्यम से वाहन खरीदा था। आरोपी ने पांवटा साहिब से ऋण चुकाने और बैंक से एनओसी प्राप्त करने का आश्वासन दिया था। आरोप लगाया था कि समझौते की सभी शर्तों का पालन करने में विफल रहा।
इसी दौरान शिकायतकर्ता ने आरोपी को वाहन लौटाया दिया। समझौते के तहत उक्त राशि ब्याज सहित लौटाने के लिए आरोपी ने जुलाई 2018 को स्टेट बैंक का 3.50 लाख रुपये का एक चेक जारी किया, लेकिन बैंक में प्रस्तुत करने पर चेक बाउंस हो गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन भुगतान न होने पर न्यायालय में मामला दायर किया गया। इस दौरान निचली अदालत ने नदीम को सजा और जुर्माने की सजा सुनाई थी।
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ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को सुनाई थी सजा और 5.20 लाख का जुर्माना
अब अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने फैसले के खिलाफ अपील की खारिज
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने चेक बाउंस के मामले में दोषी के कैद की सजा को बरकरार रखते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया है। 4 मार्च 2024 को निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) ने तहसील नाहन निवासी नदीम को दो साल के कारावास और 5.20 लाख रुपये मुआवजा देने की सजा सुनाई थी। यह राशि अदा न करने पर दोषी को छह महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतने का आदेश दिया था। इसी फैसले के खिलाफ दोषी ने अतिरिक्त सत्र अदालत में अपील दायर की थी। अब सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए दोषी की अपील खारिज कर दी।
शिकायतकर्ता सुनीता शर्मा के अनुसार जनवरी 2017 में उसने आरोपी से शपथ पत्र के माध्यम से वाहन खरीदा था। आरोपी ने पांवटा साहिब से ऋण चुकाने और बैंक से एनओसी प्राप्त करने का आश्वासन दिया था। आरोप लगाया था कि समझौते की सभी शर्तों का पालन करने में विफल रहा।
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इसी दौरान शिकायतकर्ता ने आरोपी को वाहन लौटाया दिया। समझौते के तहत उक्त राशि ब्याज सहित लौटाने के लिए आरोपी ने जुलाई 2018 को स्टेट बैंक का 3.50 लाख रुपये का एक चेक जारी किया, लेकिन बैंक में प्रस्तुत करने पर चेक बाउंस हो गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन भुगतान न होने पर न्यायालय में मामला दायर किया गया। इस दौरान निचली अदालत ने नदीम को सजा और जुर्माने की सजा सुनाई थी।
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