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Shimla Masjid Case: नक्शा पास नहीं हुआ तो कर दिया अवैध निर्माण, स्थानीय लोगों का पार्टी बनने के लिए आवेदन

Sun, 08 Sep 2024 10:44 AM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: अंकेश डोगरा Updated Sun, 08 Sep 2024 10:44 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के संजौली में मस्जिद में हुए अवैध निर्माण मामले में वक्फ बोर्ड और मस्जिद मैनेजर ने लिखित में जवाब कोर्ट में दिया। जानें पूरा विवाद और अभी तक क्या-क्या हुआ।
 

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Shimla Sanjauli Masjid Controversy illegal construction local people applied to become a party
डिजाइन फोटो। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

राजधानी के संजौली में मस्जिद में हुए अवैध निर्माण मामले में शनिवार को नगर निगम आयुक्त भूपेंद्र अत्री के चक्कर स्थित कोर्ट में सुनवाई हुई। वक्फ बोर्ड और मस्जिद मैनेजर ने लिखित में जवाब कोर्ट में दिया। आयुक्त ने पूछा कि मस्जिद किसके अधीन है। यहां जो निर्माण हुआ, वह किसकी जिम्मेदारी है। किसने निर्माण किया है, क्या कोई जानकारी है। इसको लेकर भी सवाल पूछे गए। इस पर वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता ने भी अपना जवाब दिया। मौके पर कुल कितना निर्माण हुआ है, आयुक्त ने संबंधित कनिष्ठ अभियंता से अगली सुनवाई यानी पांच अक्तूबर को स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा है। सुनवाई के बाद कोर्ट के बाहर वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने दस्तावेज कोर्ट को सौंपे हैं। कोर्ट ने निर्माण की रिपोर्ट देने को कहा है। हम रिपोर्ट देखेंगे और अगली सुनवाई पर जवाब देंगे। 
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नक्शा पास नहीं हुआ तो कर दिया अवैध निर्माण 
नगर निगम के अनुसार मस्जिद कमेटी ने साल 2012 में यहां निर्माण के लिए वक्फ बोर्ड से एनओसी ली थी। बाद में नक्शा पास करने के लिए नगर निगम में आवेदन किया। निगम के अनुसार इस नक्शे में काफी खामियां थी। इसीलिए इसे लौटा दिया गया। इसके बाद कोई आवेदन नहीं हुआ और मौके पर 2019 तक अवैध निर्माण कर दिया गया। अवैध निर्माण होने पर निगम ने 2019 में रिवाइज नोटिस दिया था। यह नोटिस उस शख्स को दिया गया जो मौके पर निर्माण कर रहा था। हालांकि, जब यह शख्स बाद में सुनवाई में नहीं आया तो इसे एक्स पार्टी घोषित किया गया। निगम के अनुसार मस्जिद कमेटी के पूर्व प्रधान का कहना है कि उनके कार्यकाल में सिर्फ ढाई मंजिला मस्जिद का निर्माण हुआ था। बाकी निर्माण किसने किया, इस बारे में अब वक्फ बोर्ड से पूछा गया है। बोर्ड पांच अक्तूबर तक इसका जवाब देगा।
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बोर्ड ने सशर्त निर्माण को दी थी एनओसी : कुतुबदीन
वक्फ बोर्ड के स्टेट ऑफिसर कुतुबदीन ने कहा, जमीन को लेकर कोई विवाद नहीं है। जमीन बोर्ड की है। हमारे पास 1907 की जमाबंदी है, जिसमें गैर मुमकिन मस्जिद का रिकॉर्ड है। हमें पहली बार साल 2023 में नोटिस आया था। नमाज पढ़ने वाले लोगों ने आवेदन दिया था कि यहां जगह कम है। अब ज्यादा लोग नमाज पढ़ने आते हैं। बोर्ड ने कमेटी को निर्माण करने की सशर्त एनओसी दी थी। शर्त थी कि निगम से नक्शा पास करने के बाद निर्माण हो। हमने गलत काम करने के लिए नहीं कहा। 

बाहरी राज्यों के लोगों के समय हुआ अवैध निर्माण : लतीफ 
मस्जिद कमेटी के पूर्व प्रधान मोहम्मद लतीफ भी सुनवाई के लिए कोर्ट पहुंचे थे। इन्हें भी निगम की ने नोटिस जारी किया था। लतीफ ने कहा कि वह साल 2012 तक कमेटी के प्रधान रहे। उनके कार्यकाल के दौरान यहां कच्ची मस्जिद बनी थी। इसके बाद हमने निर्माण के लिए निगम में नक्शा दिया था। इस पर क्या हुआ, इसकी जानकारी नहीं है। बाद में मैं पद से हट चुका था। इसके बाद यहां बाहरी राज्यों के लोगों ने कमेटी बनाई। इनके समय में अवैध निर्माण हुआ है। जमीन वक्फ बोर्ड की है। 

स्थानीय लोगों का पार्टी बनने के लिए आवेदन 
संजौली में मस्जिद में हुए अवैध निर्माण के मामले में अब जमीन के कब्जे को लेकर वक्फ बोर्ड और स्थानीय लोग आमने सामने आ गए हैं। वक्फ बोर्ड का दावा है कि मस्जिद बोर्ड की जमीन पर बनी है। मामला अवैध निर्माण का है। जमीन के मालिकाना हक को लेकर कोई विवाद नहीं है। 

उधर, संजौली के स्थानीय लोगों ने अब मामले में रूल 10 सीपीसी के तहत पार्टी बनाने के लिए आवेदन कर दिया है। लोगों ने 20 पेज का एक पत्र भी शनिवार को आयुक्त कोर्ट में दिया है। इसमें मस्जिद से जुड़े कई मामलों का उल्लेख किया गया है। इनका दावा है कि जिस जगह पर मस्जिद बनी है, वह सरकार की है। स्थानीय लोगों के अधिवक्ता जगत पाल ने कहा कि हमारे पास राजस्व रिकॉर्ड है।

अब पांच अक्तूबर को होगी अगली सुनवाई
इसमें प्रदेश सरकार जमीन की मालिक है। जमाबंदी में खसरा नंबर 36 पर इसका ब्योरा है। इसमें जो मस्जिद है, वह गैर मुमकिन मस्जिद दिखाई है। इसका मतलब है कि यह सरकारी जमीन पर बनी है। अधिवक्ता ने सुनवाई के बाद कहा कि 14 साल से मामला लटका हुआ है। ऐसे में मजबूरी है कि स्थानीय लोगों को सामने आना पड़ा। नगर निगम के कनिष्ठ अभियंता ने 13 साल तक गलत लोगों को मामले में पार्टी बनाया। अब जाकर मामले में वक्फ बोर्ड की एंट्री हो रही है। आयुक्त से आग्रह किया कि हमें पार्टी बनाया जाए। हम कोर्ट को मामले के सही तथ्य बताएंगे ताकि मामला न लटके। इन्हें पार्टी बनाना है या नहीं, इस पर पांच अक्तूबर को स्थिति स्पष्ट होगी।
 

मस्जिद पर 14 साल से मेहरबानी क्यों
कोर्ट में दिए लिखित पत्र में लोगों का कहना है कि अवैध निर्माण पर आम जनता का बिजली पानी तुरंत काटा जाता है लेकिन 14 साल से मामले में ऐसी कोई कार्रवाई नहीं हुई। सुनवाई के दौरान भी अवैध निर्माण जारी रहा। उधर, संबंधित कनिष्ठ अभियंता को मौके की कोई तथ्यात्मक जानकारी नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मस्जिद में रहने वाला एक मास्टरमांइड यहां मदरसा चला रहा है। यहां जबरदस्ती कब्जा किया गया है। यहां पर गलत काम करने वालों को पनाह दी जाती है।

सबको अपना-अपना पक्ष रखने का अधिकार : चौहान
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने कहा कि यह मामला कोर्ट में चल रहा है। सबको अपना-अपना पक्ष रखने का अधिकार है। अगर वक्फ बोर्ड ने भी कहा है कि यह संपत्ति उसकी है तो इसकी जांच होगी। संपत्ति सरकार की है या बोर्ड की, इसकी भी जांच होगी। जो भी मामला होगा, उस पर कानून के तहत ही कार्रवाई की जाएगी।
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