फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News Even after four years research on monkeys has not yielded any results

Shimla News: चार साल बाद भी बंदरों पर शोध का नहीं निकला नतीजा, करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद डाटा अधूरा

Sun, 29 Sep 2024 06:25 PM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला Published by: अंकेश डोगरा Updated Sun, 29 Sep 2024 06:25 PM IST
सार

शिमला में हिमाचल प्रदेश वन विभाग और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया की ओर से संयुक्त रूप से शोध को शुरू किया था। इसका उद्देश्य बंदरों के व्यावहारिक पैटर्न का अध्ययन करना था। इस शोध के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन चार साल बीतने के बावजूद अब तक कोई भी डाटा पूरी तरह से संकलित नहीं हो पाया है। 

विज्ञापन
Shimla News Even after four years research on monkeys has not yielded any results
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

राजधानी की जाखू हिल्स में 2020 में बंदरों के व्यवहार पर शुरू किए शोध का अभी तक ठोस परिणाम सामने नहीं आया है। हिमाचल प्रदेश वन विभाग और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया की ओर से संयुक्त रूप से शोध को शुरू किया था। इसका उद्देश्य बंदरों के व्यावहारिक पैटर्न का अध्ययन करना था। इस अध्ययन के आधार पर बंदरों की नसबंदी को और अधिक प्रभावी बनाने की योजना थी ताकि शिमला और अन्य क्षेत्रों में मानव-बंदर संघर्ष को कम किया जा सके।

विज्ञापन


इस शोध के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन चार साल बीतने के बावजूद अब तक कोई भी डाटा पूरी तरह से संकलित नहीं हो पाया है। परिणामस्वरूप नसबंदी के कार्यक्रमों में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका है। बंदरों द्वारा किए जाने वाले हमले लगातार बढ़ रहे हैं। स्थानीय लोगों और पर्यटकों के बीच बंदरों का खौफ बना हुआ है। खासकर जाखू हिल्स जैसे इलाकों में, जहां बंदरों की आबादी काफी ज्यादा है।
विज्ञापन


परियोजना की धीमी प्रगति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद कोई ठोस परिणाम न आना चिंताजनक है। लोग ये भी आरोप लगा रहे हैं कि सरकार और शोध संस्थान इस दिशा में सक्रिय कदम नहीं उठा रहे हैं। अभी तक इस परियोजना से जुड़े अधिकारियों की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं आया है कि डेटा के संकलन में देरी क्यों हो रही है और कब तक इसका परिणाम सामने आ सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


वन्यजीव विभाग के अधिकारी राकेश शर्मा ने बताया कि अभी डाटा इकट्ठा किया जा रहा है। जल्दी ही शोध के नतीजे प्रकाशित किए जाएंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed