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Rampur Bushahar News: आशा, आंगनबाड़ी, मिड-डे मील वर्करों के लिए की 30 हजार रुपये न्यूनतम वेतन की मांग
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नेरवा में आयोजित भारतीय मजदूर संघ की बैठक में उपस्थित महिलाएं। स्रोत: संगठन
नेरवा मंडल की बैठक में विभिन्न मांगों और मुद्दों पर हुई चर्चा
संवाद न्यूज एजेंसी
नेरवा(रोहड़ू)। भारतीय मजदूर संघ ने आशा, आंगनबाड़ी और मिड-डे मील वर्करों के लिए 30 हजार रुपये न्यूनतम वेतन की मांग की है। संगठन ने आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने और निगमों और बोर्डों में पुरानी पेंशन योजना लागू करने पर भी जोर दिया। यह मांगें नेरवा मंडल की बैठक में उठाई गईं। बैठक में वर्ष 2027 के प्रदेश स्तरीय आंदोलन के लिए दो हजार कार्यकर्ताओं की भागीदारी का भी लक्ष्य रखा गया है। बैठक में कर्मचारियों और श्रमिकों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। संघ ने स्कीम वर्करों को वेतन संहिता 2019 और सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के दायरे में लाने की मांग की। इसका उद्देश्य उन्हें न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा देना है। आंगनबाड़ी और मिड-डे मील कर्मचारियों को समय पर वेतन देने की मांग भी उठाई गई। कर्मचारियों और पेंशनरों का चार फीसदी लंबित महंगाई भत्ता और एरियर शीघ्र जारी करने को कहा गया। मल्टी टास्क वर्करों को नियमित करने, 30 हजार रुपये न्यूनतम वेतन और बारह माह का कार्य सुनिश्चित करने की मांग की गई। जल शक्ति विभाग के पैरा फिटर और पैरा पंप ऑपरेटरों को विभाग में समायोजित करने, उनके वेतन में वृद्धि और स्थायी नीति बनाने की मांग भी की गई। भारतीय मजदूर संघ के जिला अध्यक्ष ने कहा कि संगठन इन मांगों के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है। उन्होंने बताया कि जिला शिमला के सभी मंडलों में कर्मचारियों को एकजुट किया जाएगा।
भारतीय मजदूर संघ ने आउटसोर्स प्रथा को समाप्त करने की स्पष्ट मांग की है। संगठन चाहता है कि आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्थायी नीति बनाई जाए। उन्हें समान काम के लिए समान वेतन मिले। सेवा से हटाए गए कर्मचारियों को बहाल करने की भी मांग की गई।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नेरवा(रोहड़ू)। भारतीय मजदूर संघ ने आशा, आंगनबाड़ी और मिड-डे मील वर्करों के लिए 30 हजार रुपये न्यूनतम वेतन की मांग की है। संगठन ने आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने और निगमों और बोर्डों में पुरानी पेंशन योजना लागू करने पर भी जोर दिया। यह मांगें नेरवा मंडल की बैठक में उठाई गईं। बैठक में वर्ष 2027 के प्रदेश स्तरीय आंदोलन के लिए दो हजार कार्यकर्ताओं की भागीदारी का भी लक्ष्य रखा गया है। बैठक में कर्मचारियों और श्रमिकों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। संघ ने स्कीम वर्करों को वेतन संहिता 2019 और सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के दायरे में लाने की मांग की। इसका उद्देश्य उन्हें न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा देना है। आंगनबाड़ी और मिड-डे मील कर्मचारियों को समय पर वेतन देने की मांग भी उठाई गई। कर्मचारियों और पेंशनरों का चार फीसदी लंबित महंगाई भत्ता और एरियर शीघ्र जारी करने को कहा गया। मल्टी टास्क वर्करों को नियमित करने, 30 हजार रुपये न्यूनतम वेतन और बारह माह का कार्य सुनिश्चित करने की मांग की गई। जल शक्ति विभाग के पैरा फिटर और पैरा पंप ऑपरेटरों को विभाग में समायोजित करने, उनके वेतन में वृद्धि और स्थायी नीति बनाने की मांग भी की गई। भारतीय मजदूर संघ के जिला अध्यक्ष ने कहा कि संगठन इन मांगों के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है। उन्होंने बताया कि जिला शिमला के सभी मंडलों में कर्मचारियों को एकजुट किया जाएगा।
भारतीय मजदूर संघ ने आउटसोर्स प्रथा को समाप्त करने की स्पष्ट मांग की है। संगठन चाहता है कि आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्थायी नीति बनाई जाए। उन्हें समान काम के लिए समान वेतन मिले। सेवा से हटाए गए कर्मचारियों को बहाल करने की भी मांग की गई।

नेरवा में आयोजित भारतीय मजदूर संघ की बैठक में उपस्थित महिलाएं। स्रोत: संगठन
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