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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rampur Bushahar News ›   Shortage of laborers in Chopal-Kupvi adds to farmers' woes

Rampur Bushahar News: चौपाल-कुपवी में मजदूरों की कमी ने बढ़ाई किसानों की परेशानी

Thu, 15 Oct 2026 11:30 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 15 Oct 2026 11:30 PM IST
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कोदे, कौणी और चौलाई की कटाई-गहाई के साथ मटर की बुआई और तुड़ान का काम जोरों पर
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नेरवा (रोहड़ू)। चौपाल और कुपवी के ग्रामीण इलाकों में अक्तूबर और नवंबर का महीना किसानों के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। कोदे (मंडुआ), कौणी और चौलाई की कटाई-गहाई के साथ मटर की बुआई और तुड़ान का काम जोरों पर है। वहीं, बर्फबारी से पहले पशुओं के लिए सर्दियों का चारा जुटाने की चुनौती भी ग्रामीणों के सामने है। काम के बढ़ते दबाव का सबसे अधिक बोझ महिलाओं पर पड़ रहा है। उनकी दिनचर्या सुबह चार बजे से शुरू होकर रात 11 बजे तक चल रही है। घर के काम, मवेशियों की देखभाल और परिवार के लिए भोजन तैयार करने के बाद महिलाएं खेतों और घासनियों में काम करती हैं। कई परिवारों को नाश्ता और दोपहर का भोजन भी घासनियों में ही करना पड़ रहा है। दिसंबर से ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी शुरू होने के चलते पशुपालक करीब चार महीने के सूखे चारे का इंतजाम करने में जुटे हैं। घास काटने में 15 से 20 दिन लग जाते हैं, जबकि दुर्गम पहाड़ियों से घास घर तक पहुंचाने और टोलियां लगाने में अतिरिक्त चार-पांच दिन लगते हैं।

कीमा-चंद्रावली निवासी सलमान ने बताया कि नेपाल मूल के लोगों के समय से पहले चले जाने के कारण इस बार मजदूर नहीं मिल रहे हैं। पहले घास कटाई के दौरान उन्हें पांच से सात दिन दुकान बंद रखनी पड़ती थी, लेकिन इस बार करीब दो सप्ताह तक दुकान बंद रखनी पड़ी। किसान अतीक अहमद ने कहा कि पर्याप्त घास जमा नहीं होने पर सर्दियों में पशुओं के चारे की समस्या पैदा हो सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि खेती और पशुपालन पर निर्भर परिवारों के लिए यह साल का सबसे व्यस्त समय है। फसल समेटने और पशुओं के लिए चारा जुटाने की इस जद्दोजहद में महिलाओं को घर और खेत, दोनों की जिम्मेदारियां एक साथ निभानी पड़ रही है।
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