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Rampur Bushahar News: देवताओं की विदाई से शांद अनुष्ठान संपन्न
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शेखल गांव में विदाई से पहले मंदिर के बाद नाचते देवलु
- फोटो : RAMPUR-HP
रोहडू़। शेखल गांव में देवताओं की विदाई के साथ शांद अनुष्ठान संपन्न हो गया। 38 सालों के बाद आयोजित शांद अनुष्ठान के शांतिपूर्वक संपन्न होने पर ग्रामीणों और मंदिर कमेटी ने सभी मेहमानों का आभार जताया। इस दौरान शेखल गांव के हर घर में तीन दिन तक धाम चलती रही। शनिवार को अनुष्ठान की मुख्य रस्म शिखा और फेर का आयोजन किया गया।
फेर में लोगों ने हथियारों के साथ ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते हुए गांव की परिक्रमा की। इसके बाद आयोजक देवता के मंदिर की छत पर शिखा पूजन किया गया। इसके बाद पूरा दिन मंदिर के बाहर मैदान में लोग वाद्ययंत्रों की धुनों पर नृत्य करते रहे। शनिवार को रातभर भी नाटियों का दौर चलता रहा। रविवार दोपहर के बाद सभी देवताओं की शेखल गांव से विदाई हुई। इस अनुष्ठान में देवता गुडारू छुपाड़ी , गवास गांव से देवता गुडारू और बलसा गांव से देवता महासू के साथ हजारों लोग पहुंचे थे।
शांद अनुष्ठान में देवताओं के साथ लोग पारंपरिक वेशभूषा में वापस हुए। रविवार को सभी देवताओं की छुपाड़ी गांव में देवता गुडारू के मूल स्थान पर मेहमाननवाजी हुई। शेखल मंदिर कमेटी के मोतमीन सुरेश नागटा ने धार्मिक अनुष्ठान के शांतिपूर्वक संपन्न होने के लिए सभी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा दशकों के बाद इस प्रकार के आयोजन को क्षेत्र की सुख समृद्धि के लिए करवाया जाता है। उन्होंने कहा रविवार को सभी देवताओं ने यहां से विदाई ली है।
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फेर में लोगों ने हथियारों के साथ ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते हुए गांव की परिक्रमा की। इसके बाद आयोजक देवता के मंदिर की छत पर शिखा पूजन किया गया। इसके बाद पूरा दिन मंदिर के बाहर मैदान में लोग वाद्ययंत्रों की धुनों पर नृत्य करते रहे। शनिवार को रातभर भी नाटियों का दौर चलता रहा। रविवार दोपहर के बाद सभी देवताओं की शेखल गांव से विदाई हुई। इस अनुष्ठान में देवता गुडारू छुपाड़ी , गवास गांव से देवता गुडारू और बलसा गांव से देवता महासू के साथ हजारों लोग पहुंचे थे।
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शांद अनुष्ठान में देवताओं के साथ लोग पारंपरिक वेशभूषा में वापस हुए। रविवार को सभी देवताओं की छुपाड़ी गांव में देवता गुडारू के मूल स्थान पर मेहमाननवाजी हुई। शेखल मंदिर कमेटी के मोतमीन सुरेश नागटा ने धार्मिक अनुष्ठान के शांतिपूर्वक संपन्न होने के लिए सभी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा दशकों के बाद इस प्रकार के आयोजन को क्षेत्र की सुख समृद्धि के लिए करवाया जाता है। उन्होंने कहा रविवार को सभी देवताओं ने यहां से विदाई ली है।
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