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Rampur Bushahar News: शिखा पूजन के साथ देवता शालू का धार्मिक अनुष्ठान संपन्न
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कुलगांव में में देवता शालू मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा संपन्न होने के बाद दो दो देवताओं का मिलन
हादसे की छाया में फीका रहा धार्मिक अनुष्ठान
वाद्य यंत्रों की धुन पर लोगों ने डाली नाटी
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। कुलगांव में देवता शालू मंदिर में पारंपरिक शिखा पूजन के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हो गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में एकत्रित हुए। देवता से सुख-समृद्धि की कामना की। अनुष्ठान के दौरान पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच पूजा-अर्चना कराई, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा।
इस बार का आयोजन दर्दनाक हादसे की छाया में संपन्न हुआ। इसके चलते पूरे क्षेत्र में मायूसी का माहौल देखने को मिला। हाल ही में हुई घटना का लोगों के मन पर गहरा असर पड़ा है, जिसका प्रभाव धार्मिक आयोजन पर भी साफ नजर आया। जहां आमतौर पर इस मौके पर उत्साह और उल्लास रहता है, वहीं इस बार श्रद्धालुओं के चेहरों पर उदासी झलकती रही।
अनुष्ठान के बाद परंपरा के अनुसार नाटियों का दौर भी चला। लोग पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर नाटी में शामिल हुए, लेकिन उत्साह पहले जैसा नहीं दिखा। लोग रस्मों को निभाते जरूर नजर आए, परंतु दिलों में छाए दुख ने माहौल को प्रभावित किया। बुजुर्गों का कहना है कि इस तरह के आयोजन क्षेत्र की संस्कृति और आस्था का प्रतीक हैं, लेकिन इस बार का वातावरण अलग रहा।
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ग्रामीणों ने बताया कि देवता शालू का यह अनुष्ठान वर्षों पुरानी परंपरा का हिस्सा है, लेकिन हादसे के कारण इस बार आयोजन सादगी के साथ संपन्न करना पड़ा। प्रशासन और आयोजन समिति ने इस अवसर पर संयम बनाए रखने की अपील की।
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वाद्य यंत्रों की धुन पर लोगों ने डाली नाटी
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। कुलगांव में देवता शालू मंदिर में पारंपरिक शिखा पूजन के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हो गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में एकत्रित हुए। देवता से सुख-समृद्धि की कामना की। अनुष्ठान के दौरान पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच पूजा-अर्चना कराई, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा।
इस बार का आयोजन दर्दनाक हादसे की छाया में संपन्न हुआ। इसके चलते पूरे क्षेत्र में मायूसी का माहौल देखने को मिला। हाल ही में हुई घटना का लोगों के मन पर गहरा असर पड़ा है, जिसका प्रभाव धार्मिक आयोजन पर भी साफ नजर आया। जहां आमतौर पर इस मौके पर उत्साह और उल्लास रहता है, वहीं इस बार श्रद्धालुओं के चेहरों पर उदासी झलकती रही।
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अनुष्ठान के बाद परंपरा के अनुसार नाटियों का दौर भी चला। लोग पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर नाटी में शामिल हुए, लेकिन उत्साह पहले जैसा नहीं दिखा। लोग रस्मों को निभाते जरूर नजर आए, परंतु दिलों में छाए दुख ने माहौल को प्रभावित किया। बुजुर्गों का कहना है कि इस तरह के आयोजन क्षेत्र की संस्कृति और आस्था का प्रतीक हैं, लेकिन इस बार का वातावरण अलग रहा।
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ग्रामीणों ने बताया कि देवता शालू का यह अनुष्ठान वर्षों पुरानी परंपरा का हिस्सा है, लेकिन हादसे के कारण इस बार आयोजन सादगी के साथ संपन्न करना पड़ा। प्रशासन और आयोजन समिति ने इस अवसर पर संयम बनाए रखने की अपील की।