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Rampur Bushahar News: परंपरागत अनाजों की मनरेगा में होगी खेती
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विलुप्त हो रहे पहाड़ी अनाज को संरक्षण देने की चौपाल के बीडीओ ने तैयार की योजना
अनाजों की ब्रांडिंग करके विभिन्न क्षेत्रों में आपूर्ति की जाएगी सुनिश्चित
संवाद न्यूज एजेंसी
नेरवा (राेहड़ू)। विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुके पहाड़ों की पहचान माने जाने वाले कोदा, चौलाई, कांवणी, ओगला और जावरी जैसी परंपरागत फसलों के संरक्षण के लिए खंड विकास अधिकारी कुपवी अरविन्द गुलेरिया ने प्रयास शुरू कर दिए हैं । वह परंपरागत फसलों की ओर किसानों को आकर्षित करने के लिए एक विस्तृत योजना तैयार कर रहे हैं। इसके तहत पहाड़ी अनाज की खेती को मनरेगा के तहत लाकर किसानों को प्रेरित किया जाएगा। अनाजों की ब्रांडिंग करके इनकी विभिन्न क्षेत्रों में आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इसके दो फायदे होंगे, एक तो किसानों की आजीविका बढ़ेगी, दूसरा विलुप्त हो रहे पहाड़ी अनाज का संरक्षण भी होगा। बीते कुछ समय से शहरी क्षेत्रों में कोदा (मंडवा), चौलाई, कांवणी, चिणई, ओगला, जावरी और शावक आदि अनाज की मांग तेजी के साथ बढ़ रही है। एक समय था, जब उपमंडल चौपाल और कुपवी के अधिकांश क्षेत्रों के किसान इन अनाजों को भरपूर मात्रा में उगाते थे। इसको बेचकर ही आजीविका चलाते थे लेकिन आज के दौर में ये सभी अनाज विलुप्त होने के कगार पर हैं। इसका सबसे बड़ा कारण किसानों का टमाटर और अन्य नकदी फसलों की तरफ रुझान बढ़ना है।
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अनाजों की ब्रांडिंग करके विभिन्न क्षेत्रों में आपूर्ति की जाएगी सुनिश्चित
संवाद न्यूज एजेंसी
नेरवा (राेहड़ू)। विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुके पहाड़ों की पहचान माने जाने वाले कोदा, चौलाई, कांवणी, ओगला और जावरी जैसी परंपरागत फसलों के संरक्षण के लिए खंड विकास अधिकारी कुपवी अरविन्द गुलेरिया ने प्रयास शुरू कर दिए हैं । वह परंपरागत फसलों की ओर किसानों को आकर्षित करने के लिए एक विस्तृत योजना तैयार कर रहे हैं। इसके तहत पहाड़ी अनाज की खेती को मनरेगा के तहत लाकर किसानों को प्रेरित किया जाएगा। अनाजों की ब्रांडिंग करके इनकी विभिन्न क्षेत्रों में आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इसके दो फायदे होंगे, एक तो किसानों की आजीविका बढ़ेगी, दूसरा विलुप्त हो रहे पहाड़ी अनाज का संरक्षण भी होगा। बीते कुछ समय से शहरी क्षेत्रों में कोदा (मंडवा), चौलाई, कांवणी, चिणई, ओगला, जावरी और शावक आदि अनाज की मांग तेजी के साथ बढ़ रही है। एक समय था, जब उपमंडल चौपाल और कुपवी के अधिकांश क्षेत्रों के किसान इन अनाजों को भरपूर मात्रा में उगाते थे। इसको बेचकर ही आजीविका चलाते थे लेकिन आज के दौर में ये सभी अनाज विलुप्त होने के कगार पर हैं। इसका सबसे बड़ा कारण किसानों का टमाटर और अन्य नकदी फसलों की तरफ रुझान बढ़ना है।