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Rampur Bushahar News: ढिंगरी मशरूम उगाकर आर्थिकी सशक्त कर रही किन्नौर की महिलाएं
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हृदय रोग, मोटापा और मधुमेह के रोगियों के लिए लाभदायक है ढिंगरी मशरूम
किन्नौर में सेब की भांति भविष्य में किसानों की आर्थिकी सुदृढ़ करेगा मशरूम उत्पादन
रतन लाल नेगी
रिकांगपिओ (किन्नौर)। किन्नौर में महिलाओं ने दिल की बीमारी से लड़ने वाले ढिंगरी मशरूम उगाकर मिसाल पेश की है। आने वाले समय में किन्नौर में सेब की भांति मशरूम से ग्रामीण अपनी आर्थिकी सशक्त कर सकते हैं। जिले की महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। जिले में 50 महिलाएं ढिंगरी मशरूम उगाकर स्वयं ही बाजार में बेचने के लिए पहुंचा रही हैं। पूह की रूपरश्मी साना को मशरूम लेडी के उपनाम से जाना जाता है और निचार ब्लॉक के पवन रेखा नेगी दोनों महिलाओं ने मशरूम उत्पादन में महारत हासिल कर ली है। दोनों महिलाओं ने जिले में पहली बार मशरूम तैयार करने की विधि लाई थी और दोनों अपने-अपने क्षेत्रों में ढिंगरी मशरूम की पैदावार कर रही हैं। दोनों महिलाओं का कहना है कि किन्नौर में ढिंगरी मशरूम का भविष्य सेब की भांति उज्ज्वल हो सकता है। रूपरश्मी साना ने कहा कि उन्होंने सोलन मशरूम केंद्र से तीन बार मशरूम उगाने की विधि सीखने के लिए प्रशिक्षण प्राप्त किया। 48 महिलाओं को सोलन मशरूम केंद्र में प्रशिक्षण के लिए प्रोत्साहित किया था। इनमें 34 महिलाओं का एक दल और 14 महिलाओं का दूसरा दल सोलन मशरूम केंद्र में दो दिन मशरूम उगाने की विधि सीखी। अभी तक पूह ब्लॉक में 35 महिलाएं ढिंगरी मशरूम का उत्पादन कर रही हैं। लियो, लिप्पा, ठंगी, मूरंग, नाको, चुलिंग, सुंगरा, हांगो, रारंग रिस्पा गांव की महिलाएं मशरूम तैयार कर महिला सशक्तिकरण का संदेश दे रही हैं। महिलाओं ने मशरूम, आचार और सूखा मशरूम तैयार कर तीन माह में 35,000 रुपये की कमाई की। उधर पवन रेखा नेगी ने कहा कि उन्होंने मां शेरावाली ग्राम संगठन तरांडा का गठन किया है। इसमें 50 महिलाएं सदस्य हैं। 20 महिलाओं का एक दल जंगलों से प्राकृतिक पैदावार को लेकर विभिन्न प्रकार के ऑर्गेनिक पकवान तैयार कर रहा है। दो दलों की महिलाएं ढिंगरी मशरूम पर काम कर रही हैं। निचार ब्लॉक के गांव नन्सपो और तांड्य गांव के महिलाओं द्वारा ढिंगरी मशरूम तैयार किया जा रहा है। महिलाएं हर शुक्रवार को एनएच पांच तरांडा मंदिर के पास स्टाॅल लगाकर बसों में आने जाने वाले राहगीरों और ग्रामीणों को इसे बेच रही है। इसमें मशरूम, मशरूम का आचार, लिंगड़ी, गुच्छी और लहसुन का आचार शामिल हैं। महिलाओं ने बीते एक वर्ष में 50,000 रुपये की कमाई की है। उन्होंने कहा कि अक्तूबर तक निचार ब्लॉक में ढिंगरी मशरूम का उत्पादन सामान्य तापमान पर किया जाता और नवंबर के बाद हीटर, ब्लोर के माध्यम से 12 माह तक मशरूम तैयार किया जा रहा है। जिले की जनता ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि ढिंगरी मशरूम का उत्पादन कर रही महिलाओं को प्रोत्साहन किया जाना चाहिए। बताते चलें कि नौणी विवि के विशेषज्ञों के अनुसार ढिंगरी मशरूम में प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स और फाइबर्स होते हैं। ये दिल के बीमारियों के अलावा मोटापा कम करने और मधुमेह के रोगियों के लिए लाभदायक होती हैं।
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किन्नौर में सेब की भांति भविष्य में किसानों की आर्थिकी सुदृढ़ करेगा मशरूम उत्पादन
रतन लाल नेगी
रिकांगपिओ (किन्नौर)। किन्नौर में महिलाओं ने दिल की बीमारी से लड़ने वाले ढिंगरी मशरूम उगाकर मिसाल पेश की है। आने वाले समय में किन्नौर में सेब की भांति मशरूम से ग्रामीण अपनी आर्थिकी सशक्त कर सकते हैं। जिले की महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। जिले में 50 महिलाएं ढिंगरी मशरूम उगाकर स्वयं ही बाजार में बेचने के लिए पहुंचा रही हैं। पूह की रूपरश्मी साना को मशरूम लेडी के उपनाम से जाना जाता है और निचार ब्लॉक के पवन रेखा नेगी दोनों महिलाओं ने मशरूम उत्पादन में महारत हासिल कर ली है। दोनों महिलाओं ने जिले में पहली बार मशरूम तैयार करने की विधि लाई थी और दोनों अपने-अपने क्षेत्रों में ढिंगरी मशरूम की पैदावार कर रही हैं। दोनों महिलाओं का कहना है कि किन्नौर में ढिंगरी मशरूम का भविष्य सेब की भांति उज्ज्वल हो सकता है। रूपरश्मी साना ने कहा कि उन्होंने सोलन मशरूम केंद्र से तीन बार मशरूम उगाने की विधि सीखने के लिए प्रशिक्षण प्राप्त किया। 48 महिलाओं को सोलन मशरूम केंद्र में प्रशिक्षण के लिए प्रोत्साहित किया था। इनमें 34 महिलाओं का एक दल और 14 महिलाओं का दूसरा दल सोलन मशरूम केंद्र में दो दिन मशरूम उगाने की विधि सीखी। अभी तक पूह ब्लॉक में 35 महिलाएं ढिंगरी मशरूम का उत्पादन कर रही हैं। लियो, लिप्पा, ठंगी, मूरंग, नाको, चुलिंग, सुंगरा, हांगो, रारंग रिस्पा गांव की महिलाएं मशरूम तैयार कर महिला सशक्तिकरण का संदेश दे रही हैं। महिलाओं ने मशरूम, आचार और सूखा मशरूम तैयार कर तीन माह में 35,000 रुपये की कमाई की। उधर पवन रेखा नेगी ने कहा कि उन्होंने मां शेरावाली ग्राम संगठन तरांडा का गठन किया है। इसमें 50 महिलाएं सदस्य हैं। 20 महिलाओं का एक दल जंगलों से प्राकृतिक पैदावार को लेकर विभिन्न प्रकार के ऑर्गेनिक पकवान तैयार कर रहा है। दो दलों की महिलाएं ढिंगरी मशरूम पर काम कर रही हैं। निचार ब्लॉक के गांव नन्सपो और तांड्य गांव के महिलाओं द्वारा ढिंगरी मशरूम तैयार किया जा रहा है। महिलाएं हर शुक्रवार को एनएच पांच तरांडा मंदिर के पास स्टाॅल लगाकर बसों में आने जाने वाले राहगीरों और ग्रामीणों को इसे बेच रही है। इसमें मशरूम, मशरूम का आचार, लिंगड़ी, गुच्छी और लहसुन का आचार शामिल हैं। महिलाओं ने बीते एक वर्ष में 50,000 रुपये की कमाई की है। उन्होंने कहा कि अक्तूबर तक निचार ब्लॉक में ढिंगरी मशरूम का उत्पादन सामान्य तापमान पर किया जाता और नवंबर के बाद हीटर, ब्लोर के माध्यम से 12 माह तक मशरूम तैयार किया जा रहा है। जिले की जनता ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि ढिंगरी मशरूम का उत्पादन कर रही महिलाओं को प्रोत्साहन किया जाना चाहिए। बताते चलें कि नौणी विवि के विशेषज्ञों के अनुसार ढिंगरी मशरूम में प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स और फाइबर्स होते हैं। ये दिल के बीमारियों के अलावा मोटापा कम करने और मधुमेह के रोगियों के लिए लाभदायक होती हैं।