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बागवानों के प्रति संवेदनहीन हुई सरकार : चेतन बरागटा
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जुब्बल में प्रेस वार्ता करते भाजपा नेता चेतन बरागटा
जुब्बल-नावर-कोटखाई में अभी भी अधिकांश ग्रामीण सड़कें बंद
रोहड़ू। प्रदेश सरकार बागवानों के प्रति संवेदनहीन हो गई है। आपदा के समय में जहां बागवान कठिनाइयों के सामना कर रहा था, वहीं सरकार के मंत्री सचिवालय में आराम फरमा रहे थे। जुब्बल-नावर-कोटखाई में अभी भी अधिकांश ग्रामीण सड़कें बंद हैं। कई स्थानों पर सरकार की अनदेखी से परेशान बागवानों ने अपने खर्चे पर मशीनें सड़कें बहाल करने के लिए लगाई हैं। स्वयं ग्रामीण सड़कों को खोलने का प्रयास कर रहे हैं। भाजपा नेता चेतन बरागटा ने जुब्बल में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि आपदा में जिन परिवारों ने अपनों को खोया, वहां सरकार के प्रतिनिधि आज तक नहीं पहुंच पाए हैं। न ही प्रभावितों को कोई मदद सरकार की ओर से दी गई है, जो सरकार की संवेदनहीनता और गैर जिम्मेदारी को दर्शाता है। आपदा में ग्रामीणों के बाग बगीचे, मकान और सड़कें बुरी तरह तबाह हो चुकी हैं। सरकार प्रभावित को अब तक कोई ठोस राहत देने में नाकाम रही है। हालात ये हैं कि लोग अपने पैसे खर्चकर अपनी मशीनों से खुद सड़कें खोलने को मजबूर हैं। बरागटा ने बताया कि आठ दिनों से कई इलाकों में न बिजली है और न पानी। ग्रामीण टैंकरों और नालों से पानी ढोने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी मशीनें रात के समय काम नहीं कर रही है, जबकि आपदा राहत कार्य 24 घंटे जारी रहना चाहिए था।
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रोहड़ू। प्रदेश सरकार बागवानों के प्रति संवेदनहीन हो गई है। आपदा के समय में जहां बागवान कठिनाइयों के सामना कर रहा था, वहीं सरकार के मंत्री सचिवालय में आराम फरमा रहे थे। जुब्बल-नावर-कोटखाई में अभी भी अधिकांश ग्रामीण सड़कें बंद हैं। कई स्थानों पर सरकार की अनदेखी से परेशान बागवानों ने अपने खर्चे पर मशीनें सड़कें बहाल करने के लिए लगाई हैं। स्वयं ग्रामीण सड़कों को खोलने का प्रयास कर रहे हैं। भाजपा नेता चेतन बरागटा ने जुब्बल में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि आपदा में जिन परिवारों ने अपनों को खोया, वहां सरकार के प्रतिनिधि आज तक नहीं पहुंच पाए हैं। न ही प्रभावितों को कोई मदद सरकार की ओर से दी गई है, जो सरकार की संवेदनहीनता और गैर जिम्मेदारी को दर्शाता है। आपदा में ग्रामीणों के बाग बगीचे, मकान और सड़कें बुरी तरह तबाह हो चुकी हैं। सरकार प्रभावित को अब तक कोई ठोस राहत देने में नाकाम रही है। हालात ये हैं कि लोग अपने पैसे खर्चकर अपनी मशीनों से खुद सड़कें खोलने को मजबूर हैं। बरागटा ने बताया कि आठ दिनों से कई इलाकों में न बिजली है और न पानी। ग्रामीण टैंकरों और नालों से पानी ढोने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी मशीनें रात के समय काम नहीं कर रही है, जबकि आपदा राहत कार्य 24 घंटे जारी रहना चाहिए था।