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Rampur Bushahar News: प्रदेश में नहीं थम रहे अवैध सेब के पौधे लाने के मामले, रोहड़ू में 50 हजार पकड़े
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रोहडू में एक स्टोर में भरे गए सेब के अवैध तरीके से पहुंचे सेब के पौधे
प्रशासन और उद्यान विभाग की टीम ने तीन अलग-अलग ठिकानों पर की छापामारी
सेब बहुल इलाकों में हर वर्ष कश्मीर से पहुंचती है अवैध पौधों की खेप
बैरियरों की भूमिका भी संदिग्ध, नर्सरी एक्ट 2015 के बावजूद नहीं थम रहा अवैध कारोबार
अनाधिकृत पौधे खरीदकर हर वर्ष बागवानों से होती है धोखाधड़ी
पक्के बिल न होने से बागवान नहीं कर पाते कोई कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। सेब बहुल इलाकों में बर्फबारी होने के बाद अब नई पौध लगाने का काम जोर पकड़ रहा है। प्रदेश में अब अवैध सेब के पौधे पहुंचाने का गोरखधंधा भी अब जोर पकड़ने लगा है। हर वर्ष क्षेत्र में कश्मीर से अनाधिकृत रूप से सेब के पौधे पहुंचाए जाते हैं। बागवान औने-पौने दाम पर ये पौधे तो खरीद लेते हैं लेकिन जब ये फल देते हैं तो इसकी किस्म का सही पता चलता है और बागवानों को अहसास होता है कि वे ठगी का शिकार हो गए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। प्रदेश में सबसे अधिक अनाधिकृत सेब के पौधे कश्मीर से पहुंचते हैं, लेकिन हैरानी की बात है कि इनकी कोई जांच नहीं हो पाती। प्रदेश के बैरियरों की भूमिका भी इस मामले में संदिग्ध प्रतीत होती है। नर्सरी एक्ट 2015 के बावजूद अवैध रूप से सेब के पौधे लाने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही।
रोहड़ू बाजार में उद्यान विभाग ने कड़ी कार्रवाई करते हुए कश्मीर से अनाधिकृत रूप से लाए गए सेब के करीब 50 हजार पौधे बरामद किए हैं। प्रशासन और उद्यान विभाग की टीम ने सूचना के आधार पर तीन अलग-अलग ठिकानों पर छापामारी कर यह खेप पकड़ी है। बताया जा रहा है कि ये पौधे कश्मीर के कुछ लोगों की ओर से बिना अनुमति और बिना दस्तावेजों के रोहड़ू क्षेत्र में पहुंचाए गए थे और इन्हें स्थानीय बाजार में खपाने की तैयारी थी। कार्रवाई के दौरान जो तस्वीर सामने आई, वह और भी चिंताजनक है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार पौधे सूखी और खराब हालत में पाए गए। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के पौधे न केवल किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंचा सकते हैं, बल्कि इनके जरिए बगीचों में रोग फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है। यदि ये पौधे बागवानों तक पहुंच जाते तो पूरे क्षेत्र की सेब अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता था।
बैरियरों और बागवानी पर जांच की व्यवस्था पर उठे सवाल
बागवानों को सेब उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करने के लिए सरकार और उद्यान विभाग कई योजनाएं चला रहे हैं, लेकिन अवैध रूप से नर्सरी और पौध लाने वालों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती। ऊपरी शिमला, रोहड़ू, रामपुर और कुल्लू जिले के इलाकों में हर वर्ष अवैध रूप से पौधे बेचे जाते हैं, जबकि नियमानुसार बागवानी विभाग के अलावा पंजीकृत नर्सरियों से ही पौधों की ब्रिकी की जानी चाहिए। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल बैरियरों और जांच व्यवस्था पर उठ रहा है। कश्मीर से रोहड़ू तक इतनी बड़ी खेप बेरोकटोक कैसे पहुंच गई। बागवानों का आरोप है कि यदि बैरियरों पर नियमों के अनुसार जांच होती तो पौधों की यह खेप वहीं पर ही पकड़ में आ जाती। इससे स्पष्ट है कि कहीं न कहीं सरकारी निगरानी तंत्र में बड़ी चूक हुई है या फिर मिलीभगत की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता।
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नियंत्रण के लिए नर्सरी एक्ट 2015 बना, फिर भी पंगु बनी कार्रवाई
हिमाचल में नर्सरी एक्ट 2015 लागू है, जिसमें बिना पंजीकरण बाहरी राज्यों से पौधे लाने और बेचने पर सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। रोहड़ू में इतनी बड़ी खेप पकड़ने के बाद भी प्रशासन ने कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं की। तहसीलदार की मौजूदगी में पौधे लाने वालों से केवल लिखित में बयान लिया गया और उन्हें पौधे वापस ले जाने की चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। अब सवाल यह है कि जब कानून है, तब सख्ती क्यों नहीं दिखाई गई। क्या नर्सरी एक्ट केवल कागजों तक सीमित रह गया है। पहले भी इनको यहां से चेतावनी देकर छोड़ा जा चुका है। क्षेत्र के बागवानों ने मांग की है कि इस मामले में दोषियों पर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर भारी जुर्माना लगाया जाए और बैरियरों पर तैनात कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच हो। अवैध रूप से लाए गए पौधे पकड़ने पर उन्हें नष्ट करने का भी प्रावधान है।
कोट
उद्यान विभाग रोहड़ू के विषयवाद विशेषज्ञ अश्वनी चौहान ने बताया कि तहसीलदार रोहड़ू की सूचना के बाद तीन जगह पर छापामारी के दौरान करीब पचास हजार सेब के पौधों को पकड़ा गया है। पौधे कश्मीर से अनाधिकृत तौर पर लाए गए थे। पौधों की स्थिति भी ठीक नहीं थी। उनको चेतावनी देकर यहां से बाहर ले जाने के लिए कहा गया है। कुछ लोगों ने रात को ही पौधे उठा दिए हैं। शेष पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
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सेब बहुल इलाकों में हर वर्ष कश्मीर से पहुंचती है अवैध पौधों की खेप
बैरियरों की भूमिका भी संदिग्ध, नर्सरी एक्ट 2015 के बावजूद नहीं थम रहा अवैध कारोबार
अनाधिकृत पौधे खरीदकर हर वर्ष बागवानों से होती है धोखाधड़ी
पक्के बिल न होने से बागवान नहीं कर पाते कोई कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। सेब बहुल इलाकों में बर्फबारी होने के बाद अब नई पौध लगाने का काम जोर पकड़ रहा है। प्रदेश में अब अवैध सेब के पौधे पहुंचाने का गोरखधंधा भी अब जोर पकड़ने लगा है। हर वर्ष क्षेत्र में कश्मीर से अनाधिकृत रूप से सेब के पौधे पहुंचाए जाते हैं। बागवान औने-पौने दाम पर ये पौधे तो खरीद लेते हैं लेकिन जब ये फल देते हैं तो इसकी किस्म का सही पता चलता है और बागवानों को अहसास होता है कि वे ठगी का शिकार हो गए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। प्रदेश में सबसे अधिक अनाधिकृत सेब के पौधे कश्मीर से पहुंचते हैं, लेकिन हैरानी की बात है कि इनकी कोई जांच नहीं हो पाती। प्रदेश के बैरियरों की भूमिका भी इस मामले में संदिग्ध प्रतीत होती है। नर्सरी एक्ट 2015 के बावजूद अवैध रूप से सेब के पौधे लाने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही।
रोहड़ू बाजार में उद्यान विभाग ने कड़ी कार्रवाई करते हुए कश्मीर से अनाधिकृत रूप से लाए गए सेब के करीब 50 हजार पौधे बरामद किए हैं। प्रशासन और उद्यान विभाग की टीम ने सूचना के आधार पर तीन अलग-अलग ठिकानों पर छापामारी कर यह खेप पकड़ी है। बताया जा रहा है कि ये पौधे कश्मीर के कुछ लोगों की ओर से बिना अनुमति और बिना दस्तावेजों के रोहड़ू क्षेत्र में पहुंचाए गए थे और इन्हें स्थानीय बाजार में खपाने की तैयारी थी। कार्रवाई के दौरान जो तस्वीर सामने आई, वह और भी चिंताजनक है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार पौधे सूखी और खराब हालत में पाए गए। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के पौधे न केवल किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंचा सकते हैं, बल्कि इनके जरिए बगीचों में रोग फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है। यदि ये पौधे बागवानों तक पहुंच जाते तो पूरे क्षेत्र की सेब अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता था।
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बैरियरों और बागवानी पर जांच की व्यवस्था पर उठे सवाल
बागवानों को सेब उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करने के लिए सरकार और उद्यान विभाग कई योजनाएं चला रहे हैं, लेकिन अवैध रूप से नर्सरी और पौध लाने वालों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती। ऊपरी शिमला, रोहड़ू, रामपुर और कुल्लू जिले के इलाकों में हर वर्ष अवैध रूप से पौधे बेचे जाते हैं, जबकि नियमानुसार बागवानी विभाग के अलावा पंजीकृत नर्सरियों से ही पौधों की ब्रिकी की जानी चाहिए। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल बैरियरों और जांच व्यवस्था पर उठ रहा है। कश्मीर से रोहड़ू तक इतनी बड़ी खेप बेरोकटोक कैसे पहुंच गई। बागवानों का आरोप है कि यदि बैरियरों पर नियमों के अनुसार जांच होती तो पौधों की यह खेप वहीं पर ही पकड़ में आ जाती। इससे स्पष्ट है कि कहीं न कहीं सरकारी निगरानी तंत्र में बड़ी चूक हुई है या फिर मिलीभगत की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता।
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नियंत्रण के लिए नर्सरी एक्ट 2015 बना, फिर भी पंगु बनी कार्रवाई
हिमाचल में नर्सरी एक्ट 2015 लागू है, जिसमें बिना पंजीकरण बाहरी राज्यों से पौधे लाने और बेचने पर सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। रोहड़ू में इतनी बड़ी खेप पकड़ने के बाद भी प्रशासन ने कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं की। तहसीलदार की मौजूदगी में पौधे लाने वालों से केवल लिखित में बयान लिया गया और उन्हें पौधे वापस ले जाने की चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। अब सवाल यह है कि जब कानून है, तब सख्ती क्यों नहीं दिखाई गई। क्या नर्सरी एक्ट केवल कागजों तक सीमित रह गया है। पहले भी इनको यहां से चेतावनी देकर छोड़ा जा चुका है। क्षेत्र के बागवानों ने मांग की है कि इस मामले में दोषियों पर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर भारी जुर्माना लगाया जाए और बैरियरों पर तैनात कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच हो। अवैध रूप से लाए गए पौधे पकड़ने पर उन्हें नष्ट करने का भी प्रावधान है।
कोट
उद्यान विभाग रोहड़ू के विषयवाद विशेषज्ञ अश्वनी चौहान ने बताया कि तहसीलदार रोहड़ू की सूचना के बाद तीन जगह पर छापामारी के दौरान करीब पचास हजार सेब के पौधों को पकड़ा गया है। पौधे कश्मीर से अनाधिकृत तौर पर लाए गए थे। पौधों की स्थिति भी ठीक नहीं थी। उनको चेतावनी देकर यहां से बाहर ले जाने के लिए कहा गया है। कुछ लोगों ने रात को ही पौधे उठा दिए हैं। शेष पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।