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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rampur Bushahar News ›   HRTC bus driver acquitted in culpable homicide case

Rampur Bushahar News: गैर इरादतन हत्या के मामले मे एचआरटीसी बस का चालक बरी

Sun, 22 Feb 2026 11:50 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 22 Feb 2026 11:50 PM IST
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. नशे में और लापरवाही से वाहन चलाने का लगा था आरोप
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. मामले में एक व्यक्ति की बस के नीचे आने से हुई थी मौत


संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। गैर इरादतन हत्या के मामले में अदालत ने एचआरटीसी बस के चालक काे बरी कर दिया है। एडिशनल सेशन जज-11, शिमला (थियोग में कैंप) की अदालत ने यह फैसला सुनाया है। चालक पर नशे में और लापरवाही से वाहन चलाने का आरोप लगा था। इस मामले में एक व्यक्ति की बस के नीचे आने से मौत हो गई थी। 27 अक्तूबर 2018 की शाम को कोटखाई पुलिस थाना को सूचना मिली कि चंद्रनगर के पास एचआरटीसी बस के नीचे आने से एक व्यक्ति की मौत हो गई है। मौके पर पहुंची पुलिस ने शिकायतकर्ता महिला के बयान दर्ज किए। बयान में कहा कि चंद्रनगर में रहने वाली उनकी मौसी का बेटा नरेंद्र डोगरा भी बस में सवार था। शाम करीब 4:45 बजे जब बस चंद्रनगर स्टेशन पहुंची, तो नरेंद्र डोगरा नीचे उतरा। इसके बाद बस चल पड़ी। इसी बीच नरेंद्र डोगरा पिछले टायर के नीचे आ गया, जिससे उसकी मौके पर मौत हो गई। आरोप लगाया कि बस चालक ध्यान सिंह निवासी कांगड़ा की कथित लापरवाही यह दुर्घटना हुई। जांच के दौरान आरोपी के खून और यूरिन के सैंपल लिए गए। एसएफएसएल ने आरोपी के ब्लड और यूरिन के सैंपल की जांच की, जिसमें बताया गया कि आरोपी के ब्लड और यूरिन में शराब की मात्रा पाई गई। इस आधार पर पुलिस ने चालान में आईपीसी की धारा 304ए शामिल की। जांच के दौरान मृतक नरेंद्र डोगरा का पोस्टमार्टम सीएचसी कोटखाई में किया गया। उसका ब्लड सैंपल लेकर केमिकल एनालिसिस के लिए एसएफएसएल जुन्गा भेजा गया। रिपोर्ट में पता चला कि मृतक के ब्लड सैंपल में भी एथिल अल्कोहल था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मौत का कारण सिर की चोटें थीं। जांच पूरी होने पर कोर्ट में चालान फाइल किया गया। अभियोजन पक्ष ने इस केस में नौ गवाहों से पूछताछ की। अदालत ने फैसला दिया है कि शिकायतकर्ता महिला, परिचालक और सैंपल लेने वाले डॉक्टर के मेडिकल सुबूतों को देखते हुए, यह साबित होता है कि फिजिकल जांच के समय आरोपी नशे में नहीं पाया गया था। प्रॉसिक्यूशन यह साबित करने के लिए कोई भी जरूरी सुबूत रिकॉर्ड पर लाने में नाकाम रहा है कि बताई गई तारीख, समय और जगह पर आरोपी शराब, ड्रग्स या किसी नशे के इस हद तक असर में था कि वह शारीरिक या मानसिक रूप से कमजोर था और खुद को को कंट्रोल नहीं कर पा रहा था। इसलिए, सेक्शन 304ए के जरूरी हिस्से अपने आप में नहीं बनते। सैंपल को इकट्ठा करने और संभालने से जुड़े सुबूतों की ध्यान से जांच करने पर गंभीर शक पैदा होता है। इन बातों और हालात को देखते हुए, ऐसा लगता है कि बस से उतरने के बाद मृतक नशे की हालत में नीचे गिर गया होगा और किसी तरह बस के नीचे कुचल गया होगा। इन बातों को देखते हुए अभियोजन पक्ष आरोपी ध्यान सिंह के खिलाफ बिना किसी शक के अपना केस साबित करने में नाकाम रहा है, इसलिए आरोपी को लगाए गए जुर्मों से बरी किया जाता है।
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