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Rampur Bushahar News: आनी में पांच साल बाद भी नहीं बना सब्जी मंडी भवन
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किसान-बागवान निराश, पिछली सरकार ने भूमि और बजट का किया था प्रावधान
10 बीघा भूमि एपीएमसी के नाम दर्ज, 6 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान
हरिकृष्ण शर्मा
आनी (कुल्लू)। उपमंडल मुख्यालय आनी में प्रस्तावित सब्जी मंडी भवन का निर्माण पिछले पांच वर्षों से अधर में लटका हुआ है। इससे क्षेत्र के किसान-बागवानों में निराशा और असंतोष बढ़ रहा है। करोड़ों रुपये की इस परियोजना के लिए बजट स्वीकृत होने के साथ-साथ भूमि चयन, समतलीकरण और चारदीवारी जैसे प्रारंभिक कार्य पूरे होने के बावजूद भवन निर्माण शुरू नहीं हो पाया है।
जानकारी के अनुसार, आनी के किरण बाजार में करीब 10 बीघा भूमि एपीएमसी के नाम दर्ज है। इस परियोजना पर लगभग 6 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। पूर्व एपीएमसी चेयरमैन अमर ठाकुर ने बताया कि उनके कार्यकाल में इस जमीन के लिए वन विभाग से मंजूरी दिलाने में विशेष प्रयास किए गए थे, ताकि किसानों और बागवानों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त मंडी उपलब्ध करवाई जा सके। उन्होंने कहा कि भूमि समतलीकरण, चारदीवारी और बुनियादी ढांचे के लिए करीब एक करोड़ रुपये का कार्य भी पूरा किया जा चुका है, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई।
उन्होंने बताया कि प्रस्तावित मंडी परिसर में किसान भवन, सामुदायिक हॉल, दुकानों और गेस्ट हाउस जैसी सुविधाएं विकसित की जानी थीं। यह मंडी केवल सब्जियों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सेब और अन्य फलों के व्यापार का भी केंद्र बन सकती थी। इससे आनी सहित मंडी और शिमला जिले के किसानों को बड़ा लाभ मिलता।
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गौरतलब है कि आनी क्षेत्र सेब उत्पादन में अग्रणी है और यहां से हर वर्ष लाखों पेटियां विभिन्न मंडियों में भेजी जाती हैं। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर मंडी सुविधा के अभाव में बागवानों को दूर-दराज की मंडियों पर निर्भर रहना पड़ता है।
एपीएमसी चेयरमैन राम सिंह मियां ने बताया कि आगामी सीजन से आनी में अस्थायी रूप से सब्जी मंडी शुरू करने की योजना बनाई जा रही है, ताकि किसानों को तत्काल राहत मिल सके। वहीं, स्थायी भवन निर्माण को लेकर संबंधित अधिकारियों से जल्द चर्चा की जाएगी।
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10 बीघा भूमि एपीएमसी के नाम दर्ज, 6 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान
हरिकृष्ण शर्मा
आनी (कुल्लू)। उपमंडल मुख्यालय आनी में प्रस्तावित सब्जी मंडी भवन का निर्माण पिछले पांच वर्षों से अधर में लटका हुआ है। इससे क्षेत्र के किसान-बागवानों में निराशा और असंतोष बढ़ रहा है। करोड़ों रुपये की इस परियोजना के लिए बजट स्वीकृत होने के साथ-साथ भूमि चयन, समतलीकरण और चारदीवारी जैसे प्रारंभिक कार्य पूरे होने के बावजूद भवन निर्माण शुरू नहीं हो पाया है।
जानकारी के अनुसार, आनी के किरण बाजार में करीब 10 बीघा भूमि एपीएमसी के नाम दर्ज है। इस परियोजना पर लगभग 6 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। पूर्व एपीएमसी चेयरमैन अमर ठाकुर ने बताया कि उनके कार्यकाल में इस जमीन के लिए वन विभाग से मंजूरी दिलाने में विशेष प्रयास किए गए थे, ताकि किसानों और बागवानों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त मंडी उपलब्ध करवाई जा सके। उन्होंने कहा कि भूमि समतलीकरण, चारदीवारी और बुनियादी ढांचे के लिए करीब एक करोड़ रुपये का कार्य भी पूरा किया जा चुका है, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई।
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उन्होंने बताया कि प्रस्तावित मंडी परिसर में किसान भवन, सामुदायिक हॉल, दुकानों और गेस्ट हाउस जैसी सुविधाएं विकसित की जानी थीं। यह मंडी केवल सब्जियों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सेब और अन्य फलों के व्यापार का भी केंद्र बन सकती थी। इससे आनी सहित मंडी और शिमला जिले के किसानों को बड़ा लाभ मिलता।
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गौरतलब है कि आनी क्षेत्र सेब उत्पादन में अग्रणी है और यहां से हर वर्ष लाखों पेटियां विभिन्न मंडियों में भेजी जाती हैं। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर मंडी सुविधा के अभाव में बागवानों को दूर-दराज की मंडियों पर निर्भर रहना पड़ता है।
एपीएमसी चेयरमैन राम सिंह मियां ने बताया कि आगामी सीजन से आनी में अस्थायी रूप से सब्जी मंडी शुरू करने की योजना बनाई जा रही है, ताकि किसानों को तत्काल राहत मिल सके। वहीं, स्थायी भवन निर्माण को लेकर संबंधित अधिकारियों से जल्द चर्चा की जाएगी।