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सेब से लदे ट्राले सुबह 5:00 बजे से रात 8:30 बजे तक ठियोग-शिमला मार्ग पर नहीं चल सकेंगे
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अभियान . सेब से लदे ट्रक और भारी मालवाहक वाहन शिमला शहर में प्रवेश नहीं करेंगे
. 300 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी यातायात प्रबंधन संभालेंगे
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। सेब सीजन में बागवानों को राहत देने के लिए प्रशासन ने पुख्ता प्रबंध किए हैं। पुलिस ने व्यापक यातायात प्रबंधन योजना तैयार की है। बरसात के दौरान संभावित भूस्खलन, सड़क अवरोध और बढ़ते यातायात दबाव को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था लागू की गई है ताकि बागवानों, परिवहन संचालकों और आम लोगों को कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े। भट्ठाकुफर फल मंडी क्षेत्र में विशेष यातायात व्यवस्था लागू रहेगी। सेब से लदे ट्रक और भारी मालवाहक वाहन शिमला शहर में प्रवेश नहीं करेंगे। इन वाहनों को ढली-मेहली-शोगी बाईपास से भेजा जाएगा।
वहीं, सेब से लदे ट्राले सुबह 5:00 बजे से रात 8:30 बजे तक ठियोग-शिमला मार्ग पर नहीं चल सकेंगे। ढली चौक से भट्ठाकुफर तक सड़क के किनारे पार्किंग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। प्रतीक्षारत वाहनों के लिए ढली-फागू मार्ग पर निर्धारित स्थान तय किए गए हैं। यातायात के सुचारु संचालन के लिए शोघी, फागू और छराबड़ा से वाहनों को चरणबद्ध तरीके से छोड़ा जाएगा। सड़क पर खड़े या खराब वाहनों को तुरंत हटाया जाएगा। ठियोग, रामपुर, रोहड़ू और चौपाल उपमंडलों में नियंत्रण कक्ष बनाए गए हैं। इसके अलावा होल्डिंग प्वाइंट, वैकल्पिक मार्ग, पार्किंग स्थल और संवेदनशील स्थान चिह्नित कर विशेष पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। यातायात व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए पुलिस मुख्यालय ने सात अतिरिक्त रिजर्व उपलब्ध करवाएं हैं। पूरे सेब सीजन के दौरान जिले में करीब 300 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी यातायात प्रबंधन तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात रहेंगे। इसके अलावा कुड्डू, फागू, नैणा, गुम्मा (नेरवा), बलग और शोघी में 7 नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों पर सेब परिवहन में लगे चालकों और सहायकों के दस्तावेजों का सत्यापन, पहचान पत्र जारी करने, यातायात की निगरानी तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय किया जाएगा।
सड़कों पर गड्ढे बनेंगे चुनौती
गर्मियों के मौसम में सड़कों की मैटलिंग और पैचवर्क का काम भी नहीं हो पाया है। यही वजह है कि बरसात शुरू होने से पहले ही कई सड़कों पर गड्ढों की भरमार है, जबकि कच्ची सड़कें दलदल में तब्दील हो चुकी हैं। चौपाल, रामपुर, ननखड़ी, कोटखाई, रोहड़ू और जुब्बल के दुर्गम इलाकों में संपर्क मार्गों की हालत दयनीय है। हालांकि, इस साल पिछले साल के मुकाबले ढाई करोड़ सेब की पेटियां होने का अनुमान है। इसके बावजूद लाखों लोगों की आजीविका का आधार बनने वाली सेब की फसल पर खस्ताहाल सड़कों का संकट मंडरा रहा है। पंचायत क्षेत्रों में ज्यादातर मार्ग कच्चे हैं या भूस्खलन के कारण अवरुद्ध हो जाते हैं। इस वजह से बागवानों के लिए सेब की फसल को मुख्य सड़क तक पहुंचाना चुनौती बनेगी।
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. 300 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी यातायात प्रबंधन संभालेंगे
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। सेब सीजन में बागवानों को राहत देने के लिए प्रशासन ने पुख्ता प्रबंध किए हैं। पुलिस ने व्यापक यातायात प्रबंधन योजना तैयार की है। बरसात के दौरान संभावित भूस्खलन, सड़क अवरोध और बढ़ते यातायात दबाव को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था लागू की गई है ताकि बागवानों, परिवहन संचालकों और आम लोगों को कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े। भट्ठाकुफर फल मंडी क्षेत्र में विशेष यातायात व्यवस्था लागू रहेगी। सेब से लदे ट्रक और भारी मालवाहक वाहन शिमला शहर में प्रवेश नहीं करेंगे। इन वाहनों को ढली-मेहली-शोगी बाईपास से भेजा जाएगा।
वहीं, सेब से लदे ट्राले सुबह 5:00 बजे से रात 8:30 बजे तक ठियोग-शिमला मार्ग पर नहीं चल सकेंगे। ढली चौक से भट्ठाकुफर तक सड़क के किनारे पार्किंग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। प्रतीक्षारत वाहनों के लिए ढली-फागू मार्ग पर निर्धारित स्थान तय किए गए हैं। यातायात के सुचारु संचालन के लिए शोघी, फागू और छराबड़ा से वाहनों को चरणबद्ध तरीके से छोड़ा जाएगा। सड़क पर खड़े या खराब वाहनों को तुरंत हटाया जाएगा। ठियोग, रामपुर, रोहड़ू और चौपाल उपमंडलों में नियंत्रण कक्ष बनाए गए हैं। इसके अलावा होल्डिंग प्वाइंट, वैकल्पिक मार्ग, पार्किंग स्थल और संवेदनशील स्थान चिह्नित कर विशेष पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। यातायात व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए पुलिस मुख्यालय ने सात अतिरिक्त रिजर्व उपलब्ध करवाएं हैं। पूरे सेब सीजन के दौरान जिले में करीब 300 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी यातायात प्रबंधन तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात रहेंगे। इसके अलावा कुड्डू, फागू, नैणा, गुम्मा (नेरवा), बलग और शोघी में 7 नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों पर सेब परिवहन में लगे चालकों और सहायकों के दस्तावेजों का सत्यापन, पहचान पत्र जारी करने, यातायात की निगरानी तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय किया जाएगा।
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सड़कों पर गड्ढे बनेंगे चुनौती
गर्मियों के मौसम में सड़कों की मैटलिंग और पैचवर्क का काम भी नहीं हो पाया है। यही वजह है कि बरसात शुरू होने से पहले ही कई सड़कों पर गड्ढों की भरमार है, जबकि कच्ची सड़कें दलदल में तब्दील हो चुकी हैं। चौपाल, रामपुर, ननखड़ी, कोटखाई, रोहड़ू और जुब्बल के दुर्गम इलाकों में संपर्क मार्गों की हालत दयनीय है। हालांकि, इस साल पिछले साल के मुकाबले ढाई करोड़ सेब की पेटियां होने का अनुमान है। इसके बावजूद लाखों लोगों की आजीविका का आधार बनने वाली सेब की फसल पर खस्ताहाल सड़कों का संकट मंडरा रहा है। पंचायत क्षेत्रों में ज्यादातर मार्ग कच्चे हैं या भूस्खलन के कारण अवरुद्ध हो जाते हैं। इस वजह से बागवानों के लिए सेब की फसल को मुख्य सड़क तक पहुंचाना चुनौती बनेगी।
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