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Rampur Bushahar News: भवन के इंतजार में खंडहर हो गईं दीवारों, नहीं मिला न्याय
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रोहडू में तोड़ कर जमीदोज किया गया अंबेड़कर भवन। संवाद
खंडहर दीवारों में 16 साल खोया रहा न्याय भवन, अब नामोनिशान भी मिटा
वर्ष 2010 में शुरू हुई यह योजना सरकारी और प्रशासन की अनदेखी के चलते नहीं हो सकी पूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। सामाजिक न्याय को समर्पित आंबेडकर भवन को धरातल पर उतारने की योजना फाइलों में ही अब दफन होकर रह गई। वर्ष 2010 में शुरू हुई यह योजना सरकारी और प्रशासन की अनदेखी के चलते कभी पूरी नहीं हो सकी। 16 वर्षों से भवन के नाम की सिर्फ दीवारें ही धरातल पर उतरीं। यह दीवारें भी खंडहर हो गईं। 16 साल खंडहर दीवारों में खोये भवन का आखिरकार नामोनिशान भी मिटा दिया गया। आज भवन की खंडहर दीवारों को भी बुल्डोजर से ध्वस्त कर दिया गया। इस भवन के लिए लाखों रुपये स्वीकृत हुए लेकिन भवन कभी तैयार नहीं हुआ। अब न भवन बचा है और न बजट। इससे कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। वर्ष 2010 में तत्कालीन विधायक खुशी राम बालनाटाह ने 10 लाख रुपये स्वीकृत करवाए लेकिन केवल चारदीवारी ही बन पाई। वर्षों तक धन के अभाव में काम अधूरा पड़ा रहा। 2020-21 में 3 लाख रुपये और 2021-22 में 6 लाख रुपये और स्वीकृत किए गए। राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण यह राशि खर्च नहीं हो सकी और भवन अधूरा रहा। 2 जून 2023 को मुख्यमंत्री ने 30 लाख रुपये की घोषणा की, पर राशि नहीं मिली। अगस्त 2024 में खंड विकास कार्यालय ने उपायुक्त कार्यालय से मिली 9 लाख रुपये की राशि वापस लौटा दी। जुलाई 2026 में एक समिति ने भवन को असुरक्षित घोषित कर जल्दबाजी में उसे तोड़ दिया। इस पूरे प्रकरण पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर जिम्मेदार कौन है, जिसने भवन को पूरा नहीं होने दिया। जब सरकारें बार-बार धन स्वीकृत करती रहीं, तो निर्माण अधूरा क्यों रहा और धन खर्च क्यों नहीं हुआ। 16 वर्षों में मंजूर हुई राशि, सरकारी घोषणाओं और प्रशासनिक बैठकों का हिसाब कौन देगा। प्रश्न है कि क्या आंबेडकर भवन की कहानी सरकारी फाइलों में दफन एक और अधूरी योजना बनकर रह जाएगी।
पहले हुए खर्च का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। उपायुक्त कार्यालय से दो किस्तों में लगभग नौ लाख रुपये मिले थे, जिन्हें निर्धारित अवधि में खर्च नहीं किया जा सका और 2024 में वापस लौटा दिया गया। भवन क्यों तोड़ा गया, इसकी जानकारी नहीं है। उपमंडल मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में गठित समिति ने भवन को असुरक्षित पाए जाने पर उसे तोड़ने का निर्णय लिया। - देवी दयाल, खंड विकास अधिकारी
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वर्ष 2010 में शुरू हुई यह योजना सरकारी और प्रशासन की अनदेखी के चलते नहीं हो सकी पूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। सामाजिक न्याय को समर्पित आंबेडकर भवन को धरातल पर उतारने की योजना फाइलों में ही अब दफन होकर रह गई। वर्ष 2010 में शुरू हुई यह योजना सरकारी और प्रशासन की अनदेखी के चलते कभी पूरी नहीं हो सकी। 16 वर्षों से भवन के नाम की सिर्फ दीवारें ही धरातल पर उतरीं। यह दीवारें भी खंडहर हो गईं। 16 साल खंडहर दीवारों में खोये भवन का आखिरकार नामोनिशान भी मिटा दिया गया। आज भवन की खंडहर दीवारों को भी बुल्डोजर से ध्वस्त कर दिया गया। इस भवन के लिए लाखों रुपये स्वीकृत हुए लेकिन भवन कभी तैयार नहीं हुआ। अब न भवन बचा है और न बजट। इससे कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। वर्ष 2010 में तत्कालीन विधायक खुशी राम बालनाटाह ने 10 लाख रुपये स्वीकृत करवाए लेकिन केवल चारदीवारी ही बन पाई। वर्षों तक धन के अभाव में काम अधूरा पड़ा रहा। 2020-21 में 3 लाख रुपये और 2021-22 में 6 लाख रुपये और स्वीकृत किए गए। राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण यह राशि खर्च नहीं हो सकी और भवन अधूरा रहा। 2 जून 2023 को मुख्यमंत्री ने 30 लाख रुपये की घोषणा की, पर राशि नहीं मिली। अगस्त 2024 में खंड विकास कार्यालय ने उपायुक्त कार्यालय से मिली 9 लाख रुपये की राशि वापस लौटा दी। जुलाई 2026 में एक समिति ने भवन को असुरक्षित घोषित कर जल्दबाजी में उसे तोड़ दिया। इस पूरे प्रकरण पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर जिम्मेदार कौन है, जिसने भवन को पूरा नहीं होने दिया। जब सरकारें बार-बार धन स्वीकृत करती रहीं, तो निर्माण अधूरा क्यों रहा और धन खर्च क्यों नहीं हुआ। 16 वर्षों में मंजूर हुई राशि, सरकारी घोषणाओं और प्रशासनिक बैठकों का हिसाब कौन देगा। प्रश्न है कि क्या आंबेडकर भवन की कहानी सरकारी फाइलों में दफन एक और अधूरी योजना बनकर रह जाएगी।
पहले हुए खर्च का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। उपायुक्त कार्यालय से दो किस्तों में लगभग नौ लाख रुपये मिले थे, जिन्हें निर्धारित अवधि में खर्च नहीं किया जा सका और 2024 में वापस लौटा दिया गया। भवन क्यों तोड़ा गया, इसकी जानकारी नहीं है। उपमंडल मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में गठित समिति ने भवन को असुरक्षित पाए जाने पर उसे तोड़ने का निर्णय लिया। - देवी दयाल, खंड विकास अधिकारी
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