{"_id":"5d07b7b38ebc3e4d4e331ed3","slug":"15607868546-rampur-hp-news131","type":"story","status":"publish","title_hn":"टापरी में मरीज युवक को नहीं मिला प्राथमिक उपचार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टापरी में मरीज युवक को नहीं मिला प्राथमिक उपचार
विज्ञापन
मरीज नहीं मिला उपचार, डॉक्टर
ने अवकाश होने का दिया हवाला
चोलिंग के पास कुत्ते के काटने से लहूलुहान हो गया था अश्वनी
युवक को मजबूरी में निजी अस्पताल में करवाना पड़ा उपचार
अमर उजाला ब्यूरो
भावानगर (किन्नौर)। किन्नौर जिले के टापरी के नजदीक चोलिंग के पास अचानक सोमवार सुबह करीब आठ बजे आवारा कुत्ते ने मीरू निवासी अश्वनी पर हमला कर दिया, जिससे अश्वनी लहूलुहान हो गया। सूचना मिलने के बाद अश्वनी के रिश्तेदार उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र टापरी ले गए, जहां पर पर उन्होंने चिकित्सक से उपचार करने की मांग की, लेकिन चिकित्सक ने उन्हें अवकाश का हवाला देकर इलाज करने से मना कर दिया। चिकित्सक ने उस जख्म पर पट्टी बांधना तो दूर मरीज को अगले दिन आने की बात कही। इसके बाद मजबूरी में उन्हें निजी अस्पताल छोल्टू में उपचार करना पड़ा।
मीरू गांव के कर्मचारी संघ उपाध्यक्ष दिवान नेगी ने बताया कि चिकित्सक ने इमरजेंसी केस होते हुए भी कोई उपचार नहीं किया। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि लोगों के साथ इस तरह से व्यवहार करने वाले चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, जिससे लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। वहीं टापरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात चिकित्सक डॉ. हितेंद्र ने बताया कि सोमवार को अवकाश थी। इसी कारण इलाज नहीं हुआ। घायल अश्वनी को अन्य अस्पताल में जाने की सलाह दी थी।
विज्ञापन
ने अवकाश होने का दिया हवाला
चोलिंग के पास कुत्ते के काटने से लहूलुहान हो गया था अश्वनी
युवक को मजबूरी में निजी अस्पताल में करवाना पड़ा उपचार
अमर उजाला ब्यूरो
भावानगर (किन्नौर)। किन्नौर जिले के टापरी के नजदीक चोलिंग के पास अचानक सोमवार सुबह करीब आठ बजे आवारा कुत्ते ने मीरू निवासी अश्वनी पर हमला कर दिया, जिससे अश्वनी लहूलुहान हो गया। सूचना मिलने के बाद अश्वनी के रिश्तेदार उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र टापरी ले गए, जहां पर पर उन्होंने चिकित्सक से उपचार करने की मांग की, लेकिन चिकित्सक ने उन्हें अवकाश का हवाला देकर इलाज करने से मना कर दिया। चिकित्सक ने उस जख्म पर पट्टी बांधना तो दूर मरीज को अगले दिन आने की बात कही। इसके बाद मजबूरी में उन्हें निजी अस्पताल छोल्टू में उपचार करना पड़ा।
मीरू गांव के कर्मचारी संघ उपाध्यक्ष दिवान नेगी ने बताया कि चिकित्सक ने इमरजेंसी केस होते हुए भी कोई उपचार नहीं किया। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि लोगों के साथ इस तरह से व्यवहार करने वाले चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, जिससे लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। वहीं टापरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात चिकित्सक डॉ. हितेंद्र ने बताया कि सोमवार को अवकाश थी। इसी कारण इलाज नहीं हुआ। घायल अश्वनी को अन्य अस्पताल में जाने की सलाह दी थी।
विज्ञापन