{"_id":"5c7ab03bbdec2211ac1b025f","slug":"155154447713-rampur-hp-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"वैज्ञानिक विधि से तैयार करे सेब का बगीचा- कुशाल मेहता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वैज्ञानिक विधि से तैयार करे सेब का बगीचा- कुशाल मेहता
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सेब का बगीचा तैयार करने में स्थान
और जलवायु का स्थान है महत्वपूर्ण
रोहड़ू में बागवानी विशेषज्ञ ने बताई बगीचा तैयार करने की रुपरेखा
कहा-पौधे रोपने से पहले मिट्टी की जांच अवश्य करवाएं बागवान
अमर उजाला ब्यूरो
रोहड़ू। अनुकूल मौसम के चलते घाटी के बागवान सेब के पौधे रोपने के कार्य में व्यस्त हैं। बागवानी विशेषज्ञ बागवानों को सेब का बगीचा वैज्ञानिक तरीके से तैयार करने की सलाह दे रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार बगीचा तैयार करने के लिए बागवानों को कई बातों को ध्यान में रखना आवश्यक है। जिससे भविष्य में सेब के पौधे अच्छी आमदन वाले साबित हों।
उद्यान विकास अधिकारी एवं बागवानी विशेषज्ञ डॉ. कुशाल मेहता के अनुसार बगीचा स्थापित करने से पहले स्थान का चयन तथा वहां की जलवायु किन किस्मों के लिए उपयुक्त है। इसका सही चयन करना आवश्यक रहता है। बगीचे की रुप रेखा बनाने से पहले वहां की मिट्टी की जांच करना भी आवश्यक है। मिट्टी दोमट तथा उपजाऊ हो तथा उस मिट्टी की पीएच 6.0 -7.0 के बीच हो। भूमि के भीतर की सतह पथरीली न हो और न ही पानी एकत्रित होने वाली जगह हो। बगीचा किस विधि द्वारा लगाया जाए यह भूमि की ढलान पर निर्भर करता है। अगर भूमि समतल हो तो बगीचा वर्गकार, आयताकार आदि विधि द्वारा लगाया जाता है। परंतु ढलानदार भूमि या पहाड़ी क्षेत्रों में पौधे कंदूर विधि से लगाने चाहिए। जहां पर छोटे-छोटे खेत बने हो या बनाए जा सकें। ऐसे स्थान पर पौधे खेतों के मध्य में उपयुक्त दूरी पर टैरेस विधि द्वारा लगाने चाहिए। खेतों का ढलान अंदर की ओर होनी चाहिए। जिससे वर्षा का पानी वहां एकत्रित हो तथा सूखे के समय पर इस पानी का उपयोग किया जा सके। पौधे से पौधे या लाइन में दूरी पौधे की किस्म पर पर निर्भर करती है। जब पौधों की रुपरेखा तैयार हो जाए तो बागवानों को उसके बाद ही गड्ढे बनाने का कार्य आरंभ करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि गड्ढे का आकार भूमि की उपजाऊ शक्ति पर निर्भर करता है। आम तौर पर गड्ढे एक मीटर के आकार का बनाया जाता है। अगर हो सके तो गड्ढा कम से कम एक महीने पहले बनाया जाना चाहिए। गड्ढे को जमीन से नौ इंच ऊपर तक भरना चाहिए तथा गड्ढे के मध्य में खूंटी लगाएं। बाद में पौधा इस खुंटी के स्थान पर लगेगा। गड्ढे में गली सड़ी गोबर की खाद तथा आधा किलो सुपर फास्फेट खाद डालें। इससे पौधे की बढ़ोतरी अच्छी होगी। अधिक जानकारी के लिए बागवान विशेषज्ञों को सलाह ले सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
और जलवायु का स्थान है महत्वपूर्ण
रोहड़ू में बागवानी विशेषज्ञ ने बताई बगीचा तैयार करने की रुपरेखा
कहा-पौधे रोपने से पहले मिट्टी की जांच अवश्य करवाएं बागवान
अमर उजाला ब्यूरो
रोहड़ू। अनुकूल मौसम के चलते घाटी के बागवान सेब के पौधे रोपने के कार्य में व्यस्त हैं। बागवानी विशेषज्ञ बागवानों को सेब का बगीचा वैज्ञानिक तरीके से तैयार करने की सलाह दे रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार बगीचा तैयार करने के लिए बागवानों को कई बातों को ध्यान में रखना आवश्यक है। जिससे भविष्य में सेब के पौधे अच्छी आमदन वाले साबित हों।
उद्यान विकास अधिकारी एवं बागवानी विशेषज्ञ डॉ. कुशाल मेहता के अनुसार बगीचा स्थापित करने से पहले स्थान का चयन तथा वहां की जलवायु किन किस्मों के लिए उपयुक्त है। इसका सही चयन करना आवश्यक रहता है। बगीचे की रुप रेखा बनाने से पहले वहां की मिट्टी की जांच करना भी आवश्यक है। मिट्टी दोमट तथा उपजाऊ हो तथा उस मिट्टी की पीएच 6.0 -7.0 के बीच हो। भूमि के भीतर की सतह पथरीली न हो और न ही पानी एकत्रित होने वाली जगह हो। बगीचा किस विधि द्वारा लगाया जाए यह भूमि की ढलान पर निर्भर करता है। अगर भूमि समतल हो तो बगीचा वर्गकार, आयताकार आदि विधि द्वारा लगाया जाता है। परंतु ढलानदार भूमि या पहाड़ी क्षेत्रों में पौधे कंदूर विधि से लगाने चाहिए। जहां पर छोटे-छोटे खेत बने हो या बनाए जा सकें। ऐसे स्थान पर पौधे खेतों के मध्य में उपयुक्त दूरी पर टैरेस विधि द्वारा लगाने चाहिए। खेतों का ढलान अंदर की ओर होनी चाहिए। जिससे वर्षा का पानी वहां एकत्रित हो तथा सूखे के समय पर इस पानी का उपयोग किया जा सके। पौधे से पौधे या लाइन में दूरी पौधे की किस्म पर पर निर्भर करती है। जब पौधों की रुपरेखा तैयार हो जाए तो बागवानों को उसके बाद ही गड्ढे बनाने का कार्य आरंभ करना चाहिए।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि गड्ढे का आकार भूमि की उपजाऊ शक्ति पर निर्भर करता है। आम तौर पर गड्ढे एक मीटर के आकार का बनाया जाता है। अगर हो सके तो गड्ढा कम से कम एक महीने पहले बनाया जाना चाहिए। गड्ढे को जमीन से नौ इंच ऊपर तक भरना चाहिए तथा गड्ढे के मध्य में खूंटी लगाएं। बाद में पौधा इस खुंटी के स्थान पर लगेगा। गड्ढे में गली सड़ी गोबर की खाद तथा आधा किलो सुपर फास्फेट खाद डालें। इससे पौधे की बढ़ोतरी अच्छी होगी। अधिक जानकारी के लिए बागवान विशेषज्ञों को सलाह ले सकते हैं।
विज्ञापन