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अब घर पर गमले में उगाइए सेब

Sat, 13 Jul 2013 11:52 AM IST
शिमला/ब्यूरो
शिमला/ब्यूरो Updated Sat, 13 Jul 2013 11:52 AM IST
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Now Apple can be plant at home in a pot

सेब का पौधा गमले में भी उगाया जा सकता है। जर्मनी से लाए कॉलमुनर एप्पल

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ट्री (कैट) पर शिमला में सफल प्रयोग हुआ है। शिमला के एक नेशनल अवार्ड विजेता बागवान ने अपने बगीचे में इसके चार पौधे उगाए हैं।

एक बीघा भूमि में इसके लगभग 700 पौधे उगाए जा सकते हैं। एक वर्ग मीटर में एक पौधा उगाया जा सकता है। सेब का यह पौधा एम-9 रूट स्टाक पर तैयार होता है।
 
शिमला जिले की तहसील कोटखाई का ढांगवी गांव। यहां है हरित क्रांति के जनक एमएस स्वामीनाथन द्वारा एलएम पटेल फार्मर आफ द ईयर 2010 और जमशेद जी टाटा फेलोशिप से नवाजे जा चुके मशहूर बागवान रामलाल चौहान के सेब का बगीचा।

सेब की दर्जनों किस्मों के बीच ही यहां कैट के चार पौधे लहलहा रहे हैं। ये सेब के हरे-छोटे फलों से भरे हैं। चौहान के अनुसार सेब का यह फल सितंबर महीने में पक कर तैयार होगा।
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यह खूब लाल हो जाता है। यह लेट वैराइटी है। इसके तने में ही फल लगते हैं। यह सेल्फ पॉलीनाइजर है।

एम-9 रूट स्टाक पर ये अनोखे चार पौधों को उन्होंने खुले बगीचे में दूसरे पौधों के बीच ही उगाया है। उन्होंने बताया कि जर्मनी में यह गमलों में भी उगाया जाता है।
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यह चार से लेकर साढे़ चार फुट तक लंबा पेड़ हो सकता है। इसमें ग्राफ्टिंग के तीन से चार साल बाद फल आ जाते हैं। चौहान का दावा सही मानें तो हिमाचल में इसे वही पहली बार लाए हैं।

इसे जर्मनी से मंगवाया गया। यह पौधा डा. वाईएस परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के पास भी नहीं है। रामलाल इसे मल्टीप्लाई करने को आगे विश्वविद्यालय को देने को तैयार हैं। एक पौधे में अधिकतम पांच किलो सेब के फल ही उगाए जा सकते हैं।


सेब की ऐसी कोई किस्म विश्वविद्यालय के पास अभी मौजूद नहीं है। नौणी विश्वविद्यालय अनुसंधान कार्यों में हमेशा आगे रहा है। इसे प्राप्त करने के लिए भी बागवान रामलाल चौहान से संपर्क किया जा सकता है।

डा. आरसी शर्मा, अनुसंधान निदेशक, नौणी विश्वविद्यालय

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