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जज्बे को सलाम: पहाड़ों को कर दिया अपने दम पर रोशन

Sun, 25 Aug 2013 12:30 AM IST
नूरपुर (कांगड़ा)/रितेश महाजन
नूरपुर (कांगड़ा)/रितेश महाजन Updated Sun, 25 Aug 2013 12:30 AM IST
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Mountains are lighted on generating electricity their own performence

दिल में कुछ करने की तमन्ना और जनसेवा का भाव हो तो इंसान पहाड़ों को भी रोशन कर सकता है। ऐसा ही वाक्या कुल्लू और जवाली की दो संस्थाओं ने मणिमहेश मार्ग पर कर दिया है।

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दोनों संस्थाओं ने निजी प्रयासों से गोई नाले में अपने खर्च पर टरबाइन लगाकर पांच किलोवाट बिजली पैदा कर दी है। इससे उन्होंने निशुल्क चार किलोमीटर मणिमहेश मार्ग रोशन कर दिया है।
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ये हालांकि ट्रायल तौर पर है, लेकिन अगर प्रशासन और सरकार की मदद मिले तो दो संस्थाएं 13 किमी के पूरे मार्ग और मंदिर स्थल को रोशन करने का इरादा रखती है।
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लाखों शिव भक्तों की आस्था से जुड़ी श्री मणिमहेश यात्रा का दुर्गम एवं अति कठिन रास्ता जल्द ही जगमगाएगा। देव पशाकोट घराटी सोसायटी (मणिकर्ण) और मणिमहेश लंगर सेवा दल जवाली जिला कांगड़ा के संयुक्त प्रयास सराहनीय हैं।

सोसायटी के सचिव संजय भारद्वाज और सेवा दल के संस्थापक मनजीत कौंडल ने अमर उजाला को बताया कि सोसायटी के चेयरमैन विनोद भारद्वाज के मार्गदर्शन से दुर्गम एवं धार्मिक स्थलों पर पर्यावरण संरक्षण को मद्देनजर श्री मणिहमेश में बिजली उत्पादन करने का प्रयास किया था, जोकि भोले बाबा के आशीर्वाद से पूरी तरह सफल रहा है।

प्रथम चरण में गोई नाला से करीब 4 किलोमीटर तक बिजली की लाइन बिछाकर यात्रा के रास्ते में बिजली की व्यवस्था की गई है।

आने वाले दिनों में संस्था का प्रयास रहेगा कि श्री मणिमहेश यात्रा के 13 किलोमीटर लंबे अति दुर्गम रास्ते में पड़ने वाले धनछो, सुंदरासी, गौरी कुंड व डल झील तक इस तरह के बिजली संयंत्र लगाकर वैकल्पिक तौर पर बिजली की सुविधा मुहैया करवाई जा सके।

अगर सरकारी स्तर पर सहायता मिलती है, तो इन संयंत्रों के माध्यम से यात्रियों समेत लंगर कमेटियों को निशुल्क बिजली प्रदान की जा सकती है।

इससे लंगर कमेटियां बिजली के बड़े-बड़े हीटरों के इस्तेमाल से खाने-पीने का सामान बनाकर शिव भक्तों की सेवा कर सकती है। इससे गैस सिलेंडरों, जनरेटरों का खर्चा भी बचेगा और पर्यावरण भी स्वच्छ रहेगा।

कैसे किया कारनामा
हड़सर से करीब दो किलोमीटर दूर गोई नाले में एक चेकडैम बनाकर करीब 18 मीटर की ऊंचाई से पानी टरबाइनों पर फेंक कर बिजली का उत्पादन किया गया है। पानी से 5 किलोवाट वैकल्पिक विद्युत ऊर्जा के उत्पादन का सफल ट्रायल किया गया है।


इसमें कुल्लू से ताल्लुक रखने वाले इंजीनियर मणि चंद वर्मा व रणजीत सिंह (जवाली) का विशेष योगदान रहा है। संस्थाओं ने अब तक बिजली पैदा करने के लिए पांच लाख का खर्चा किया है।

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