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Himachal News: मंत्री राजेश धर्माणी बोले- हिमाचल ने किया निजी संस्थानों के रिसर्च फंड पर जीएसटी लगाने का विरोध

Tue, 30 Dec 2025 10:46 AM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Tue, 30 Dec 2025 10:46 AM IST
सार

सोमवार को शिमला में अमर उजाला एजुकेशन एक्सीलेंस अवार्ड्स 2025 कार्यक्रम में तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने निजी संस्थानों के रिसर्च फंड पर जीएसटी लगाने का विरोध किया है। पढ़ें पूरी खबर...

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Minister Rajesh Dharmani said Himachal has opposed imposition of GST on research funds of private institutions
शिमला मे अमर उजाला के कार्यक्रम में प्रधानाचार्य को सम्मानित करते तकनीकी शिक्षा मंत्री और वीसी। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश ने निजी संस्थानों के रिसर्च फंड पर जीएसटी लगाने का विरोध किया है। यह विरोध हाल ही में जीएसटी काउंसिल की नई दिल्ली में हुई बैठक में किया गया है। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि इसका एजेंडा जीएसटी काउंसिल की बैठक में लाया गया था। सभी राज्यों में प्रतिनिधि मंत्रियों में इसका विरोध करने वाले वह अकेले थे। धर्माणी ने यह बात सोमवार को शिमला में अमर उजाला एजुकेशन एक्सीलेंस अवार्ड्स 2025 में कही। इसमें धर्माणी ने शिक्षा क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने वाले विभिन्न संस्थानों को सम्मानित भी किया।

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धर्माणी ने कहा कि बैठक में एक एजेंडा यह था कि निजी संस्थानों को दिए जाने वाले रिसर्च फंड पर जीएसटी लगाया जाए और सरकारी संस्थानों पर नहीं। धर्माणी ने कहा कि अगर परिणाम देखे जाएं तो जितने इनोवेशन हुए हैं या हो रहे हैं, वे ज्यादातर निजी संस्थान ही कर रहे हैं। सरकारी क्षेत्र में देश और प्रदेश के कई हाईटेक संस्थानों की गहराई में जाए तो उसी समय यह सब देखने को मिलता है। अगर इन निजी संस्थानों को ज्यादा टैक्स के दायरे में लाया जाता है तो अनुसंधान कार्य स्थगित होंगे। धर्माणी ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा प्रणाली के दायरे में अगर निजी क्षेत्र को लाया जाता है तो उसके भी बहुत अच्छे परिणाम मिलेंगे।

धर्माणी ने कहा कि आज तकनीक की बड़ी जरूरत है। डीप थिंकिंग करके शिक्षक, वैज्ञानिक और टेक्नोक्रेट ही समाधान निकाल सकते हैं। एआई के पास वही समाधान है, जिसे किसी न किसी ने अपलोड किया है। देश और दुनिया आने वाले समय में किस तरफ जाएगी। इसे शिक्षाविदों, शिक्षकों आदि ने तय करना है। नई पीढ़ी, बच्चों की दिशा-दशा, मैनपॉवर आदि को भी शिक्षाविदों ने ही तैयार करना है। धर्माणी ने कहा कि वर्तमान में हिमाचल प्रदेश के समक्ष कई चुनौतियां हैं। इनमें प्राकृतिक आपदा से जुड़ी चुनौतियां भी हैं। हाल ही में हिमाचल प्रदेश भूकंप की दृष्टि से सिस्मिक जोन छह में आंका गया है, जो पहले चार या पांच में था। इस बारे में भी गंभीरता से सोचे जाने की जरूरत है।

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इलेक्ट्रिक मोटर व्हीकल की सामग्री बना रहा हिमाचल विवि : प्रो. महावीर
समारोह में विशेष अतिथि हिमाचल प्रदेश विवि शिमला के कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने कहा कि बच्चों को एआई के जमाने में अधिक अपडेट करने की जरूरत है और खुद शिक्षकों को भी। वर्तमान में विभिन्न संस्थानों को भी अनुसंधान को आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पर्यावरण को बचाने के लिए भी सोचे जाने की जरूरत है। आने वाला समय इलेक्ट्रिक और सोलर एनर्जी का है। इलेक्ट्रिक मोटर व्हीकल की सामग्री चीन से आती है तो इसके लिए हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने एक सेंटर खोला है। इसमें अल्टरनेटिव सामग्री बनाना शुरू कर दी गई है। उनका शिक्षाविदों से आग्रह रहेगा कि बच्चों को भी इस तरह के बदलाव के बारे में भी जागरूक करवाएं। इंजीनियर, डॉक्टर या बीएड करवाने तक का ही न सोचें। क्वांटम के जमाने में हाई स्कूल का बच्चा भी करोड़ों रुपये कमा रहा है। क्वांटम बहुत तेजी से आ रहा है। तकनीक हर घंटे बदल रही है। जब एक विषय से सभी विषयों को जोड़ेंगे तो ही यह प्रासंगिक होगा। उन्होंने कहा कि अमर उजाला का उनके जीवन में विशेष योगदान है। उन्होंने ग्रेेजुएशन में टॉप किया था तो अमर उजाला में एक खबर छपी थी, जिसे आज भी संभालकर रखा है।
 
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