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Mandi News: टाइडमैन समर क्वीन और रेड जून सेब अगले सप्ताह मंडियों में देगा दस्तक
Sun, 29 Jun 2025 12:07 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Sun, 29 Jun 2025 12:07 AM IST
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कमरूघाटी में सेब से लकदक बगीचे। संवाद
गोहर (मंडी)। मंडी जिला के बागवानों के लिए अच्छी खबर है। जिले में उगाई जा रही सेब की अर्ली किस्में टाइडमैन, समर क्वीन और रेडजून अगले सप्ताह पड़ोसी राज्यों की मंडियों में दस्तक देने को तैयार हैं।
इस बार अर्ली वैरायटियों की तुड़ाई समय पर शुरू हो गई है और इनमें अच्छा रंग और आकार आ गया है। मंडी जिले में करसोग से लेकर जंजैहली, थुनाग, बल्ह, गोहर और सराज तक फैले बगीचों में इस समय सेब की तुड़ाई का कार्य आरंभ हो चुका है। जिला में 35 लाख सेब पेटियों का उत्पादन होता है। इनमें से एक बड़ा हिस्सा चंडीगढ़, परवाणू, शिमला और दिल्ली की मंडियों में निर्यात किया जाता है।
बागवानों को उम्मीद है कि इस बार उन्हें सेब की शुरूआती किस्मों के अच्छे दाम मिलेंगे। बाजार में अर्ली वैरायटियों की मांग पहले से अधिक बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार उत्तर भारत में तापमान में हल्की गिरावट और समय पर हुई वर्षा ने फलों को बेहतर रंग और मिठास दी है।
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बागवानी विभाग और स्थानीय फल उत्पादक संघ बागवानों को तुड़ाई, ग्रेडिंग और पैकिंग के लिए तकनीकी सलाह दे रहे हैं ताकि सेब की गुणवत्ता बनाए रखी जा सके। नाचन फल एवं सब्जी उत्पादक संघ के प्रधान बीके ठाकुर और उपप्रधान प्रेम ठाकुर ने बताया कि सही समय पर तुड़ाई और ढुलाई से सेब की कीमत में वृद्धि होती है और बाजार में अच्छी छवि बनती है। नाचन, थुनाग और करसोग क्षेत्रों से ट्रकों के माध्यम से सेब को सीधे मंडियों में भेजा जाएगा। इससे न केवल सेब समय पर बाजार पहुंचेगा बल्कि बागवानों को भी लाभ मिलेगा।
बागवानों के चेहरे खिले हैं, लेकिन मौसम की मार और परिवहन लागत अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है। बागवान सरकार से ट्रांसपोर्ट सब्सिडी और पर्याप्त क्रेट्स की व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। उधर, बागवानी विशेषज्ञ डॉ. एसपी भारद्वाज ने बताया कि लोअर बेल्ट में सेब का बंपर उत्पादन हुआ है। दिल्ली स्थित आढ़ती नरेश ढल ने बताया कि मंडियों में सेब की भारी डिमांड है।
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इस बार अर्ली वैरायटियों की तुड़ाई समय पर शुरू हो गई है और इनमें अच्छा रंग और आकार आ गया है। मंडी जिले में करसोग से लेकर जंजैहली, थुनाग, बल्ह, गोहर और सराज तक फैले बगीचों में इस समय सेब की तुड़ाई का कार्य आरंभ हो चुका है। जिला में 35 लाख सेब पेटियों का उत्पादन होता है। इनमें से एक बड़ा हिस्सा चंडीगढ़, परवाणू, शिमला और दिल्ली की मंडियों में निर्यात किया जाता है।
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बागवानों को उम्मीद है कि इस बार उन्हें सेब की शुरूआती किस्मों के अच्छे दाम मिलेंगे। बाजार में अर्ली वैरायटियों की मांग पहले से अधिक बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार उत्तर भारत में तापमान में हल्की गिरावट और समय पर हुई वर्षा ने फलों को बेहतर रंग और मिठास दी है।
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बागवानी विभाग और स्थानीय फल उत्पादक संघ बागवानों को तुड़ाई, ग्रेडिंग और पैकिंग के लिए तकनीकी सलाह दे रहे हैं ताकि सेब की गुणवत्ता बनाए रखी जा सके। नाचन फल एवं सब्जी उत्पादक संघ के प्रधान बीके ठाकुर और उपप्रधान प्रेम ठाकुर ने बताया कि सही समय पर तुड़ाई और ढुलाई से सेब की कीमत में वृद्धि होती है और बाजार में अच्छी छवि बनती है। नाचन, थुनाग और करसोग क्षेत्रों से ट्रकों के माध्यम से सेब को सीधे मंडियों में भेजा जाएगा। इससे न केवल सेब समय पर बाजार पहुंचेगा बल्कि बागवानों को भी लाभ मिलेगा।
बागवानों के चेहरे खिले हैं, लेकिन मौसम की मार और परिवहन लागत अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है। बागवान सरकार से ट्रांसपोर्ट सब्सिडी और पर्याप्त क्रेट्स की व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। उधर, बागवानी विशेषज्ञ डॉ. एसपी भारद्वाज ने बताया कि लोअर बेल्ट में सेब का बंपर उत्पादन हुआ है। दिल्ली स्थित आढ़ती नरेश ढल ने बताया कि मंडियों में सेब की भारी डिमांड है।