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सराज त्रासदी: उजड़े खेत-खलिहान, टूटी उम्मीदें और प्रशासन की सुस्ती
Thu, 02 Oct 2025 06:58 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Thu, 02 Oct 2025 06:58 AM IST
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थुनाग (मंडी)। बीते 30 जून को सराज क्षेत्र में आई भीषण प्राकृतिक आपदा ने जिंदगियों को उजाड़ दिया। बाढ़ और भूस्खलन ने घर, सड़कें और खेत-खलिहान सब कुछ तबाह कर दिया। तीन महीने बीत गए लेकिन जंजैहली, बागाचनोगी, चिऊणी और छतरी के लोग अब भी दर्द और अनिश्चितता की सर्द हवाओं में कांप रहे हैं। उजड़े खेतों को संवारने की जद्दोजहद, टूटे घरों में बिखरी उम्मीदें और सर्दियों के डरावने साये में सैकड़ों परिवार जी रहे हैं।
आपदा ने सैकड़ों एकड़ खेतों को मलबे और गाद के ढेर में बदल दिया। फसलें जो ग्रामीणों की आजीविका का आधार थीं, पलभर में बर्बाद हो गईं। पुनर्वास कार्य सड़कों की बदहाली के कारण अधर में लटके हैं। सैकड़ों परिवार किराये के मकानों या रिश्तेदारों के घरों में शरण लिए हुए हैं। कुदालें चलाते, मलबा हटाते लेकिन थकान और निराशा उनकी हड्डियों को चबा रही है। सराज के लोग अब भी उम्मीद की किरण तलाश रहे हैं लेकिन टूटी सड़कों, उजड़े खेतों और प्रशासन की उदासीनता के बीच उनकी हिम्मत जवाब दे रही है।
यह केवल आपदा नहीं, बल्कि लापरवाही का दर्द है जो घावों को और गहरा कर रहा है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था ठप है, क्योंकि सड़कें अब तक बहाल नहीं हुईं। जंजैहली से छतरी तक बड़े वाहनों का आना असंभव है। सैकड़ों संपर्क मार्ग मलबे तले दबे हैं। थुनाग बाजार में सड़कों के किनारे मलबे के ढेर बदबू और बीमारी का खतरा बढ़ा रहे हैं। मलबा हटाने की प्रक्रिया इतनी धीमी है कि लोग हताश हो चुके हैं।
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सालभर की मेहनत लेकिन सब बह गया
बहलीधार के किसान कुलदीप सिंह की आंखें नम हैं। उन्होंने कहा कि हमने सालभर मेहनत की लेकिन सब बह गया। अब खेत साफ करने को न ताकत बची है, न संसाधन। सर्दी का डर सता रहा है।
बैयोड़ की कमला देवी का गला रुंध जाता है। उन्होंने कहा कि घर ढह गया, खेत उजड़ गए। सर्दी सिर पर है लेकिन न छत है, न राहत। रातें कांपते हुए कट रही हैं। राहत सामग्री और निर्माण सामग्री गांवों तक नहीं पहुंच पा रही। स्थानीय लोग अपने दम पर खेत-खलिहान संवारने में जुटे हैं।
थुनाग के पूर्ण चंद आक्रोशित हैं। उन्होंने कहा कि सर्दी हमें मार डालेगी। सरकार कब हमारी पुकार सुनेगी। आंसू भी सूख चुके हैं।
मरम्मत कार्य चल रहा है लेकिन सीमित बजट और लगातार बारिश ने सब कुछ धीमा कर दिया। हम पूरी कोशिश कर रहे हैं लेकिन चुनौतियां बहुत हैं। सड़कें जल्द बहाल होंगी।
-ललित जरयाल, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग
उपलब्ध संसाधनों से आपदाग्रस्त उपमंडल को उभारने का काम युद्धस्तर पर जारी है। अब तक पांच करोड़ रुपये से अधिक राशि आपदा पीड़ितों को वितरित की जा चुकी है।
-रमेश कुमार, एसडीएम थुनाग
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आपदा ने सैकड़ों एकड़ खेतों को मलबे और गाद के ढेर में बदल दिया। फसलें जो ग्रामीणों की आजीविका का आधार थीं, पलभर में बर्बाद हो गईं। पुनर्वास कार्य सड़कों की बदहाली के कारण अधर में लटके हैं। सैकड़ों परिवार किराये के मकानों या रिश्तेदारों के घरों में शरण लिए हुए हैं। कुदालें चलाते, मलबा हटाते लेकिन थकान और निराशा उनकी हड्डियों को चबा रही है। सराज के लोग अब भी उम्मीद की किरण तलाश रहे हैं लेकिन टूटी सड़कों, उजड़े खेतों और प्रशासन की उदासीनता के बीच उनकी हिम्मत जवाब दे रही है।
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यह केवल आपदा नहीं, बल्कि लापरवाही का दर्द है जो घावों को और गहरा कर रहा है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था ठप है, क्योंकि सड़कें अब तक बहाल नहीं हुईं। जंजैहली से छतरी तक बड़े वाहनों का आना असंभव है। सैकड़ों संपर्क मार्ग मलबे तले दबे हैं। थुनाग बाजार में सड़कों के किनारे मलबे के ढेर बदबू और बीमारी का खतरा बढ़ा रहे हैं। मलबा हटाने की प्रक्रिया इतनी धीमी है कि लोग हताश हो चुके हैं।
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सालभर की मेहनत लेकिन सब बह गया
बहलीधार के किसान कुलदीप सिंह की आंखें नम हैं। उन्होंने कहा कि हमने सालभर मेहनत की लेकिन सब बह गया। अब खेत साफ करने को न ताकत बची है, न संसाधन। सर्दी का डर सता रहा है।
बैयोड़ की कमला देवी का गला रुंध जाता है। उन्होंने कहा कि घर ढह गया, खेत उजड़ गए। सर्दी सिर पर है लेकिन न छत है, न राहत। रातें कांपते हुए कट रही हैं। राहत सामग्री और निर्माण सामग्री गांवों तक नहीं पहुंच पा रही। स्थानीय लोग अपने दम पर खेत-खलिहान संवारने में जुटे हैं।
थुनाग के पूर्ण चंद आक्रोशित हैं। उन्होंने कहा कि सर्दी हमें मार डालेगी। सरकार कब हमारी पुकार सुनेगी। आंसू भी सूख चुके हैं।
मरम्मत कार्य चल रहा है लेकिन सीमित बजट और लगातार बारिश ने सब कुछ धीमा कर दिया। हम पूरी कोशिश कर रहे हैं लेकिन चुनौतियां बहुत हैं। सड़कें जल्द बहाल होंगी।
-ललित जरयाल, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग
उपलब्ध संसाधनों से आपदाग्रस्त उपमंडल को उभारने का काम युद्धस्तर पर जारी है। अब तक पांच करोड़ रुपये से अधिक राशि आपदा पीड़ितों को वितरित की जा चुकी है।
-रमेश कुमार, एसडीएम थुनाग