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Mandi News: चार महीने के बाद खुले देव कमरुनाग मंदिर के कपाट
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बड़ा देव कमरुनाग मंदिर के कपाट खोलते गूर और मन्दिर कमेटी सदस्य
गोहर (मंडी)। ऐतिहासिक और मंडी जनपद के बड़ादेव कमरुनाग मंदिर के कपाट चार महीने के बाद शनिवार सुबह सात बजे विधिवत पूजा-अर्चना के बाद खोल दिए गए। जैसे ही मंदिर के द्वार खुले, श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। हर ओर बड़ादेव कमरुनाग के जयकारे गूंजे। श्रद्धालुओं ने देवता के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।
देव कमरुनाग मंदिर समुद्रतल से लगभग 3,334 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। नवंबर 2024 में कपाट बंद कर दिए गए थे और मार्च के अंत में श्रद्धालुओं के लिए फिर से खोल दिए गए। इस अवधि में मंदिर बर्फ की सफेद चादर में लिपटा रहता है। इससे यहां तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
मंदिर समिति और स्थानीय देव परंपराओं के अनुसार हर साल चैत्र माह में विशेष पूजा और हवन के बाद ही मंदिर के द्वार खोले जाते हैं। इस बार भी स्थानीय पुजारियों ने विधिवत अनुष्ठान कर कपाट खोलने की रस्म निभाई। देव कमरुनाग को जल का देवता माना जाता है। बड़ादेव कमरुनाग को महाभारत काल से जोड़कर देखा जाता है। लोग यहां पहुंचकर झील में सिक्के और आभूषण चढ़ाते हैं।
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बड़ादेव कमरुनाग मंदिर न केवल धार्मिक बल्कि पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। हर साल हजारों पर्यटक यहां आते हैं। इससे स्थानीय व्यवसायियों को भी रोजगार मिलता है।
.......
मंदिर के कपाट खुलने के बाद अब आने वाले महीनों में यहां बड़ी संख्या में भक्तों के पहुंचने की संभावना है। प्रशासन ने भी भक्तों की सुविधा और सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। मंदिर कमेटी सभी श्रद्धालुओं से मंदिर से लेकर सड़क तक सफाई का विशेष ध्यान रखने की अपील करती है।
-देवी सिंह, गूर देव कमरुनाग
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देव कमरुनाग मंदिर समुद्रतल से लगभग 3,334 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। नवंबर 2024 में कपाट बंद कर दिए गए थे और मार्च के अंत में श्रद्धालुओं के लिए फिर से खोल दिए गए। इस अवधि में मंदिर बर्फ की सफेद चादर में लिपटा रहता है। इससे यहां तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
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मंदिर समिति और स्थानीय देव परंपराओं के अनुसार हर साल चैत्र माह में विशेष पूजा और हवन के बाद ही मंदिर के द्वार खोले जाते हैं। इस बार भी स्थानीय पुजारियों ने विधिवत अनुष्ठान कर कपाट खोलने की रस्म निभाई। देव कमरुनाग को जल का देवता माना जाता है। बड़ादेव कमरुनाग को महाभारत काल से जोड़कर देखा जाता है। लोग यहां पहुंचकर झील में सिक्के और आभूषण चढ़ाते हैं।
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बड़ादेव कमरुनाग मंदिर न केवल धार्मिक बल्कि पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। हर साल हजारों पर्यटक यहां आते हैं। इससे स्थानीय व्यवसायियों को भी रोजगार मिलता है।
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मंदिर के कपाट खुलने के बाद अब आने वाले महीनों में यहां बड़ी संख्या में भक्तों के पहुंचने की संभावना है। प्रशासन ने भी भक्तों की सुविधा और सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। मंदिर कमेटी सभी श्रद्धालुओं से मंदिर से लेकर सड़क तक सफाई का विशेष ध्यान रखने की अपील करती है।
-देवी सिंह, गूर देव कमरुनाग
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