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सिविल अस्पताल जोगिंद्रनगर में स्ट्राइक से मरीज हुए परेशान
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जोगिंद्रनगर (मंडी)। सिविल अस्पताल जोगिंद्रनगर में सोमवार को पर्ची बनाने के लिए साढ़े नौ बजे मरीजों की लंबी कतारें लग गईं। एक घंटे में ही अस्पताल परिसर मरीजों से भर गया। पर्ची हाथ में लेकर मरीज ओपीडी के बाहर चिकित्सकों की राह देखते रहे।
ओपीडी के दरवाजे खुले थे लेकिन चिकित्सक नहीं बैठे थे। साढ़े दस बजे मरीजों को चिकित्सकों के पैन डाउन स्ट्राइक की जानकारी मिली तो उन्हें परेशानी हुई। महिलाएं नवजात शिशुओं को लेकर ओपीडी के बाहर खड़ी थीं। दिव्यांग और बुजुर्ग भी परेशान हुए। साढ़े 11 बजे चिकित्सक ओपीडी में बैठे तो भीड़ ने मरीजों की परेशानी बढ़ा दी। दो घंटे की स्ट्राइक ने मरीजों का दर्द बढ़ा दिया।
कुछ तो बिना उपचार के ही लौट गए। जिमजिमा पंचायत के 72 साल के जनक राज अपनी 31 वर्षीय दिव्यांग बेटी कांता देवी के प्रमाणपत्र की औपचारिकताओं को पूर्ण करने के लिए पहुंचे थे। भडयाड़ा के रोशन लाल भी बीमारी को लेकर अस्पताल पहुंचे थे। कमेहड़ से रीना देवी, जलपेहड़ निवासी ब्यासा देवी ने कहा कि इलाज के लिए भारी दिक्कत हुई।
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सात बजे निकले घर से, 12 बजे मिला उपचार
कुन्नकर गांव की नागिन देवी सुबह सात बजे घर से निकली थी। उसे 12 बजे उपचार सुविधा मिली। द्रब्बल की गीता देवी भी सात बजे ही घर से निकली थी। उसे भी दोपहर 12 बजे के बाद उपचार मिला। मझवाड़ के फागनू राम (84), चरण सिंह, टिकरू निवासी सुरेश कुमार, द्राहल से प्रेमी देवी, पहलून से अनुराधा को इलाज के लिए भटकना पड़ा।
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ओपीडी के दरवाजे खुले थे लेकिन चिकित्सक नहीं बैठे थे। साढ़े दस बजे मरीजों को चिकित्सकों के पैन डाउन स्ट्राइक की जानकारी मिली तो उन्हें परेशानी हुई। महिलाएं नवजात शिशुओं को लेकर ओपीडी के बाहर खड़ी थीं। दिव्यांग और बुजुर्ग भी परेशान हुए। साढ़े 11 बजे चिकित्सक ओपीडी में बैठे तो भीड़ ने मरीजों की परेशानी बढ़ा दी। दो घंटे की स्ट्राइक ने मरीजों का दर्द बढ़ा दिया।
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कुछ तो बिना उपचार के ही लौट गए। जिमजिमा पंचायत के 72 साल के जनक राज अपनी 31 वर्षीय दिव्यांग बेटी कांता देवी के प्रमाणपत्र की औपचारिकताओं को पूर्ण करने के लिए पहुंचे थे। भडयाड़ा के रोशन लाल भी बीमारी को लेकर अस्पताल पहुंचे थे। कमेहड़ से रीना देवी, जलपेहड़ निवासी ब्यासा देवी ने कहा कि इलाज के लिए भारी दिक्कत हुई।
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सात बजे निकले घर से, 12 बजे मिला उपचार
कुन्नकर गांव की नागिन देवी सुबह सात बजे घर से निकली थी। उसे 12 बजे उपचार सुविधा मिली। द्रब्बल की गीता देवी भी सात बजे ही घर से निकली थी। उसे भी दोपहर 12 बजे के बाद उपचार मिला। मझवाड़ के फागनू राम (84), चरण सिंह, टिकरू निवासी सुरेश कुमार, द्राहल से प्रेमी देवी, पहलून से अनुराधा को इलाज के लिए भटकना पड़ा।
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