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Mandi News: पहाड़ों की विशिष्ट चुनौतियों को महापौर सुमन ने राष्ट्रीय मंच पर उठाया
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चंडीगढ़ में गूंजी मंडी की आवाज, 118वीं अखिल भारतीय महापौर परिषद में साझा किए विचार
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। चंडीगढ़ में 118वें अखिल भारतीय महापौर परिषद के राष्ट्रीय सम्मेलन में मंडी नगर निगम की महापौर सुमन ठाकुर ने मंडी शहर के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश के शहरी क्षेत्रों की समस्याओं और आवश्यकताओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि ऐसे राष्ट्रीय मंच न केवल विचारों के आदान-प्रदान का माध्यम हैं, बल्कि स्थानीय समस्याओं और आवश्यकताओं को व्यापक स्तर पर रखने का सशक्त मंच भी प्रदान करते हैं।
सम्मेलन के दौरान महापौर ने पहाड़ी राज्यों की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि मैदानी क्षेत्रों की तुलना में पहाड़ी राज्यों के नगर निकायों की चुनौतियां अलग और अधिक जटिल हैं। सीमित संसाधन, यातायात एवं पार्किंग की समस्या, कूड़ा-कचरा प्रबंधन, जल निकासी, बरसात के दौरान उत्पन्न होने वाली चुनौतियां, आपदा प्रबंधन तथा अनियंत्रित शहरीकरण जैसे मुद्दों को ध्यान में रखते हुए ही शहरी विकास की नीतियां तैयार की जानी चाहिए।
उन्होंने मंडी जैसे तेजी से विकसित हो रहे ऐतिहासिक शहर को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने के साथ-साथ उसकी विशिष्ट सांस्कृतिक एवं भौगोलिक पहचान को संरक्षित रखने पर भी विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि विकास और विरासत संरक्षण के बीच संतुलन कायम करना पहाड़ी शहरों के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस दौरान महापौर सुमन ठाकुर ने पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया से भी भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने शहरी विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। चंडीगढ़ में 118वें अखिल भारतीय महापौर परिषद के राष्ट्रीय सम्मेलन में मंडी नगर निगम की महापौर सुमन ठाकुर ने मंडी शहर के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश के शहरी क्षेत्रों की समस्याओं और आवश्यकताओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि ऐसे राष्ट्रीय मंच न केवल विचारों के आदान-प्रदान का माध्यम हैं, बल्कि स्थानीय समस्याओं और आवश्यकताओं को व्यापक स्तर पर रखने का सशक्त मंच भी प्रदान करते हैं।
सम्मेलन के दौरान महापौर ने पहाड़ी राज्यों की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि मैदानी क्षेत्रों की तुलना में पहाड़ी राज्यों के नगर निकायों की चुनौतियां अलग और अधिक जटिल हैं। सीमित संसाधन, यातायात एवं पार्किंग की समस्या, कूड़ा-कचरा प्रबंधन, जल निकासी, बरसात के दौरान उत्पन्न होने वाली चुनौतियां, आपदा प्रबंधन तथा अनियंत्रित शहरीकरण जैसे मुद्दों को ध्यान में रखते हुए ही शहरी विकास की नीतियां तैयार की जानी चाहिए।
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उन्होंने मंडी जैसे तेजी से विकसित हो रहे ऐतिहासिक शहर को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने के साथ-साथ उसकी विशिष्ट सांस्कृतिक एवं भौगोलिक पहचान को संरक्षित रखने पर भी विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि विकास और विरासत संरक्षण के बीच संतुलन कायम करना पहाड़ी शहरों के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस दौरान महापौर सुमन ठाकुर ने पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया से भी भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने शहरी विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की।
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