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आरोप साबित न होने पर चरस का आरोपी बरी
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मंडी। चरस सहित पकड़े जाने का अभियोग साबित न होने पर अदालत ने एक आरोपी को बरी कर दिया है। विशेष न्यायाधीश-1 ने एनडीपीएस की धारा 20 के तहत अभियोग साबित न होने पर चक्कर (शिमला) निवासी आकाश राणा को बरी कर दिया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 22 अक्तूबर 2017 को पुलिस का दल सावला के पास तैनात था। कुल्लू की ओर से आ रहे वाहनों की चेकिंग की जा रही थी। इसी दौरान एक व्यक्ति बैग उठाए वाहन से उतरा और पंडोह की ओर जाने लगा। संदेह होने पर उसे पकड़ लिया और तलाशी ली। उसके बैग से 625 ग्राम चरस बरामद हुई।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अभियोग चलाया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले में शामिल एकमात्र स्वतंत्र गवाह ने अभियोजन के केस को साबित करने के बजाय इसे ध्वस्त कर दिया है।
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उक्त गवाह ने अदालत में दिए बयान में कहा कि पुलिस ने उसे बताया था कि यह बैग आरोपी से संबंधित है। जिरह के दौरान उसने माना कि वह नहीं जानता कि यह बैग किसका है। साथ ही अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष के विवरण में भारी विसंगतियां हैं। इसके चलते अदालत ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए उसे बरी करने का फैसला सुनाया है।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार 22 अक्तूबर 2017 को पुलिस का दल सावला के पास तैनात था। कुल्लू की ओर से आ रहे वाहनों की चेकिंग की जा रही थी। इसी दौरान एक व्यक्ति बैग उठाए वाहन से उतरा और पंडोह की ओर जाने लगा। संदेह होने पर उसे पकड़ लिया और तलाशी ली। उसके बैग से 625 ग्राम चरस बरामद हुई।
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पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अभियोग चलाया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले में शामिल एकमात्र स्वतंत्र गवाह ने अभियोजन के केस को साबित करने के बजाय इसे ध्वस्त कर दिया है।
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उक्त गवाह ने अदालत में दिए बयान में कहा कि पुलिस ने उसे बताया था कि यह बैग आरोपी से संबंधित है। जिरह के दौरान उसने माना कि वह नहीं जानता कि यह बैग किसका है। साथ ही अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष के विवरण में भारी विसंगतियां हैं। इसके चलते अदालत ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए उसे बरी करने का फैसला सुनाया है।
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