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Mandi News: एक हुए भगवान राम और सीता, आक्रोशित हुए परशुराम
Mon, 07 Oct 2024 05:12 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Mon, 07 Oct 2024 05:12 AM IST
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कोटली में रामलीला उत्सव की तीसरी संध्या में दर्शाए सीता स्वयंवर के दृश्य
संवाद न्यूज एजेंसी
कोटली (मंडी)। रामलीला कमेटी कोटली की ओर से स्थानीय सामुदायिक किसान भवन में आयोजित रामलीला उत्सव की तीसरी संध्या पर सीता स्वयंवर के मनोरम दृश्य दर्शाए गए। इनमें दिखाया गया कि राजा जनक के आह्वान पर देश-विदेश के राजा स्वयंवर में पधारे हुए हैं, जहां ऋषि विश्वामित्र के साथ राम और लक्ष्मण भी विराजमान हैं। राजा जनक की ओर से शिव धनुष के भंजन की शर्त पर सीता से विवाह करने का एलान सभी को सुना दिया जाता है। जब कोई भी राजा शिव धनुष को उठा नहीं पाता तो विश्वामित्र का आदेश पाकर प्रभु श्री राम बड़ी ही सहजता से न केवल धनुष उठा लेते हैं, बल्कि उसका भंजन करने में भी सफल रहते हैं। इसके पश्चात सीता राम के गले में जयमाला पहना देती हैे और दोनों का विवाह हो जाता है। दृश्य में अचानक ऋषि परशुराम बड़े ही क्रोध में प्रवेश करते हैं। पहले तो वो शिव धनुष के भंजन पर आक्रोशित हो जाते हैं, लेकिन जब उन्हें पता चलता है कि राम अवतार हो चुका है तो वे प्रभु श्री राम के चरणों में गिरकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
इस मौके पर जिला परिषद सदस्य एवं अधिवक्ता वेद प्रकाश कटोच ने मुख्य अतिथि के तौर पर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। रामलीला कमेटी के प्रधान प्रशांत मोहन व अन्य ने मुख्य अतिथि को सम्मानित किया। मुख्य अतिथि ने रामलीला कमेटी को अपनी ओर से 10 हजार नकद राशि सहयोग के तौर पर भेंट की। तीसरी संध्या कमेटी के संस्थापक सदस्य यशवंत प्रसाद शास्त्री को समर्पित की गई।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कोटली (मंडी)। रामलीला कमेटी कोटली की ओर से स्थानीय सामुदायिक किसान भवन में आयोजित रामलीला उत्सव की तीसरी संध्या पर सीता स्वयंवर के मनोरम दृश्य दर्शाए गए। इनमें दिखाया गया कि राजा जनक के आह्वान पर देश-विदेश के राजा स्वयंवर में पधारे हुए हैं, जहां ऋषि विश्वामित्र के साथ राम और लक्ष्मण भी विराजमान हैं। राजा जनक की ओर से शिव धनुष के भंजन की शर्त पर सीता से विवाह करने का एलान सभी को सुना दिया जाता है। जब कोई भी राजा शिव धनुष को उठा नहीं पाता तो विश्वामित्र का आदेश पाकर प्रभु श्री राम बड़ी ही सहजता से न केवल धनुष उठा लेते हैं, बल्कि उसका भंजन करने में भी सफल रहते हैं। इसके पश्चात सीता राम के गले में जयमाला पहना देती हैे और दोनों का विवाह हो जाता है। दृश्य में अचानक ऋषि परशुराम बड़े ही क्रोध में प्रवेश करते हैं। पहले तो वो शिव धनुष के भंजन पर आक्रोशित हो जाते हैं, लेकिन जब उन्हें पता चलता है कि राम अवतार हो चुका है तो वे प्रभु श्री राम के चरणों में गिरकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
इस मौके पर जिला परिषद सदस्य एवं अधिवक्ता वेद प्रकाश कटोच ने मुख्य अतिथि के तौर पर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। रामलीला कमेटी के प्रधान प्रशांत मोहन व अन्य ने मुख्य अतिथि को सम्मानित किया। मुख्य अतिथि ने रामलीला कमेटी को अपनी ओर से 10 हजार नकद राशि सहयोग के तौर पर भेंट की। तीसरी संध्या कमेटी के संस्थापक सदस्य यशवंत प्रसाद शास्त्री को समर्पित की गई।
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