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Mandi News: दरवाजे से कटकर अलग हुई मासूम की उंगली
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चंबा। दुर्गम जनजातीय क्षेत्र पांगी के सिविल अस्पताल किलाड़ में चिकित्सकीय दक्षता और मानवीय संवेदना की मिसाल सामने आई है। अस्पताल में तैनात सर्जन डॉ. विशाल शर्मा ने दो वर्षीय मासूम की कटकर अलग हुई उंगली का सफल ऑपरेशन कर उसे जोड़ दिया। सीमित संसाधनों के बीच किए गए इस जटिल ऑपरेशन के बाद उंगली में रक्त संचार सामान्य है और बच्चे की हालत स्थिर बताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार मिंधल गांव निवासी दो वर्षीय समक्ष की उंगली घर के दरवाजे के बीच आकर पूरी तरह कटकर अलग हो गई थी। गंभीर हालत में परिजन उसे सिविल अस्पताल किलाड़ लेकर पहुंचे। ऐसी स्थिति में आमतौर पर मरीज को प्लास्टिक सर्जरी के लिए टांडा मेडिकल कॉलेज या एम्स बिलासपुर रेफर किया जाता है। पांगी से इन संस्थानों तक पहुंचने में लंबा समय लगने के कारण कटे हुए अंग को बचाने की चुनौती और बढ़ जाती है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉ. विशाल शर्मा ने मरीज को रेफर करने के बजाय तत्काल ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। ओटीए में सागर पुरी और मेडिकल टीम के सहयोग से उन्होंने सीमित सुविधाओं में करीब आधे घंटे में जटिल सर्जरी पूरी की। ऑपरेशन के बाद उंगली में रक्त प्रवाह सामान्य पाया गया। परिजनों ने चिकित्सक और अस्पताल की टीम का आभार जताया। उन्होंने बताया कि उन्हें आशंका थी कि बच्चे की उंगली दोबारा नहीं जुड़ पाएगी। समय पर उपचार मिलने से बच्चे को बड़े अस्पताल ले जाने की परेशानी और अतिरिक्त आर्थिक बोझ से भी राहत मिली।
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दो दिन निगरानी में रखा
कटकर अलग हुई उंगली को जोड़ने के लिए करीब आधे घंटे तक ऑपरेशन चला। पांगी समेत मेडिकल कॉलेज चंबा में प्लास्टिक सर्जन का पद रिक्त होने के कारण डॉ. विशाल शर्मा ने बच्चे को रेफर करने के बजाय जोखिम उठाकर ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। ऑपरेशन सफल रहने के बाद बच्चे को दो दिन तक निगरानी में रखा गया। रक्त संचार सामान्य पाए जाने पर उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
पहले भी कर चुके हैं जटिल मामलों का उपचार
डॉ. विशाल शर्मा पिछले कई वर्षों से पांगी में सेवाएं दे रहे हैं। इससे पहले भी वह भालू के हमले, जलने और अन्य जटिल मामलों में सफल उपचार कर चुके हैं। उनकी सेवाओं के लिए उन्हें राज्यस्तरीय पुरस्कार भी मिल चुका है। पांगी जैसे दुर्गम क्षेत्र में विशेषज्ञ चिकित्सक की निरंतर सेवाएं स्थानीय लोगों के लिए बड़ी राहत हैं।
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जानकारी के अनुसार मिंधल गांव निवासी दो वर्षीय समक्ष की उंगली घर के दरवाजे के बीच आकर पूरी तरह कटकर अलग हो गई थी। गंभीर हालत में परिजन उसे सिविल अस्पताल किलाड़ लेकर पहुंचे। ऐसी स्थिति में आमतौर पर मरीज को प्लास्टिक सर्जरी के लिए टांडा मेडिकल कॉलेज या एम्स बिलासपुर रेफर किया जाता है। पांगी से इन संस्थानों तक पहुंचने में लंबा समय लगने के कारण कटे हुए अंग को बचाने की चुनौती और बढ़ जाती है।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉ. विशाल शर्मा ने मरीज को रेफर करने के बजाय तत्काल ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। ओटीए में सागर पुरी और मेडिकल टीम के सहयोग से उन्होंने सीमित सुविधाओं में करीब आधे घंटे में जटिल सर्जरी पूरी की। ऑपरेशन के बाद उंगली में रक्त प्रवाह सामान्य पाया गया। परिजनों ने चिकित्सक और अस्पताल की टीम का आभार जताया। उन्होंने बताया कि उन्हें आशंका थी कि बच्चे की उंगली दोबारा नहीं जुड़ पाएगी। समय पर उपचार मिलने से बच्चे को बड़े अस्पताल ले जाने की परेशानी और अतिरिक्त आर्थिक बोझ से भी राहत मिली।
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दो दिन निगरानी में रखा
कटकर अलग हुई उंगली को जोड़ने के लिए करीब आधे घंटे तक ऑपरेशन चला। पांगी समेत मेडिकल कॉलेज चंबा में प्लास्टिक सर्जन का पद रिक्त होने के कारण डॉ. विशाल शर्मा ने बच्चे को रेफर करने के बजाय जोखिम उठाकर ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। ऑपरेशन सफल रहने के बाद बच्चे को दो दिन तक निगरानी में रखा गया। रक्त संचार सामान्य पाए जाने पर उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
पहले भी कर चुके हैं जटिल मामलों का उपचार
डॉ. विशाल शर्मा पिछले कई वर्षों से पांगी में सेवाएं दे रहे हैं। इससे पहले भी वह भालू के हमले, जलने और अन्य जटिल मामलों में सफल उपचार कर चुके हैं। उनकी सेवाओं के लिए उन्हें राज्यस्तरीय पुरस्कार भी मिल चुका है। पांगी जैसे दुर्गम क्षेत्र में विशेषज्ञ चिकित्सक की निरंतर सेवाएं स्थानीय लोगों के लिए बड़ी राहत हैं।