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भूमिहीन किसानों को जमीन दे सरकार : महेंद्र
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किसान संगठनों के आह्वान पर मंडी में किया गया धरना-प्रदर्शन
किसान सभा, नौजवान सभा ने पहलगाम आतंकी हमले की भी की निंदा
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। किसान संगठनों के राज्य स्तरीय आह्वान पर मंडी में भी धरना-प्रदर्शन किया गया। उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने जमीन से बेदखली रोकने, इससे संबंधित मुद्दों एवं अनुसूचित जाति एवं परिवर्तित वनवासी अधिनियम 2006 को लागू करने का आग्रह किया।
हिमाचल किसान सभा की राज्य कमेटी के सदस्य महेंद्र राणा, नौजवान सभा के राज्य अध्यक्ष सुरेश सरवाल ने कहा कि किसान संगठन मांग कर रहे हैं कि जिन लोगों के पास भूमि नहीं है, उन्हें भूमि प्रदान की जाए। आपदा में जिन परिवारों की जमीन और घर बह गए हैं, उन्हें जमीन दी जाए। भूमिहीन और गरीब किसानों को कम से कम पांच बीघा भूमि दी जाए। वन अधिकार अधिनियम के तहत उपयुक्त अधिकारियों को अधिनियम के तहत किसानों की ओर से किए गए सभी दावों को स्वीकार करने का निर्देश दिया जाए।
वन अधिकार कमेटी का पुनर्गठन किया जाए। वन अधिकार कानून को लागू करने के लिए ग्राम सभाओं की निरंतर बैठक सुनिश्चित की जाए। भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के अनुसार किसानों को उनकी अधिग्रहित भूमि का चार गुना मुआवजा दिया जाए। 2019 के बाद घटाए गए सर्किल रेट को खारिज करके अपडेट किया जाए। प्रदर्शन में पहलगाम हमले की भी कड़ी निंदा की गई और आतंकवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की आवाज उठाई। केंद्र सरकार अपनी नाकामी को छुपाने के लिए अपने विभिन्न संगठनों के माध्यम से जनता को धर्म के आधार पर बांटने की कोशिश कर रही है। इस घटना की न्यायिक जांच होनी चाहिए। संवाद
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किसान सभा, नौजवान सभा ने पहलगाम आतंकी हमले की भी की निंदा
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। किसान संगठनों के राज्य स्तरीय आह्वान पर मंडी में भी धरना-प्रदर्शन किया गया। उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने जमीन से बेदखली रोकने, इससे संबंधित मुद्दों एवं अनुसूचित जाति एवं परिवर्तित वनवासी अधिनियम 2006 को लागू करने का आग्रह किया।
हिमाचल किसान सभा की राज्य कमेटी के सदस्य महेंद्र राणा, नौजवान सभा के राज्य अध्यक्ष सुरेश सरवाल ने कहा कि किसान संगठन मांग कर रहे हैं कि जिन लोगों के पास भूमि नहीं है, उन्हें भूमि प्रदान की जाए। आपदा में जिन परिवारों की जमीन और घर बह गए हैं, उन्हें जमीन दी जाए। भूमिहीन और गरीब किसानों को कम से कम पांच बीघा भूमि दी जाए। वन अधिकार अधिनियम के तहत उपयुक्त अधिकारियों को अधिनियम के तहत किसानों की ओर से किए गए सभी दावों को स्वीकार करने का निर्देश दिया जाए।
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वन अधिकार कमेटी का पुनर्गठन किया जाए। वन अधिकार कानून को लागू करने के लिए ग्राम सभाओं की निरंतर बैठक सुनिश्चित की जाए। भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के अनुसार किसानों को उनकी अधिग्रहित भूमि का चार गुना मुआवजा दिया जाए। 2019 के बाद घटाए गए सर्किल रेट को खारिज करके अपडेट किया जाए। प्रदर्शन में पहलगाम हमले की भी कड़ी निंदा की गई और आतंकवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की आवाज उठाई। केंद्र सरकार अपनी नाकामी को छुपाने के लिए अपने विभिन्न संगठनों के माध्यम से जनता को धर्म के आधार पर बांटने की कोशिश कर रही है। इस घटना की न्यायिक जांच होनी चाहिए। संवाद
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