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देव आदिब्रह्मा ने मंडी शहर की परिक्रमा कर बांधी सुरक्षा कार
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मंडी में अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव के अंतिम दिन शहर में कार बांधते देव आदि ब्रह्मा के ?
- फोटो : Mandi
मंडी। अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव के अंतिम दिन मंगलवार को उत्तरशाल घाटी के देव आदिब्रह्मा ने शहर की खुशहाली के लिए सुरक्षा कार बांधी। शहर की जनता को रक्षा का वादा किया। इस दौरान पूरे मंडी शहर की परिक्रमा की।
सुबह साढ़े आठ बजे देव आदिब्रह्मा के गूर और बजंतरी सेरी बाजार पहुंचे। उसके बाद बाबा भूतनाथ से होते हुए चौहटा बाजार, समखेतर बाजार, महाजन बाजार, इंदिरा मार्केट होकर पूरे शहर की परिक्रमा की। देवलुओं ने जौ के आटे से बनी सफेद रंग की विभूति हवा में उछाल कर बुरी आत्माओं को दूर रहने का आह्वान किया।
सुरक्षा कार को लेकर ऐसा माना जाता है कि इससे मंडी शहर पर बुरी आत्माओं का साया नहीं पड़ता है। महाशिवरात्रि के दौरान जनपद के कई देवी-देवता रियासतकाल से ही अपनी भागीदारी निभाते आए हैं। इनमें उत्तरशाल के देवता आदिब्रह्मा की भूमिका अहम मानी जाती है। देव आदि ब्रह्मा एकमात्र ऐसे देवता हैं जिनके रथ की बनावट कुल्लू के देवताओं की रथ शैली की तरह है।
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देव आदि ब्रह्मा का महाशिवरात्रि मेलों से अलग जुड़ाव है। पराशर के सामने टिहरी की पहाड़ियों पर स्थित देव आदिब्रह्मा मंडी महाशिवरात्रि के दौरान शहर की समृद्धि और खुशहाली के लिए बुरी शक्तियों को दूर रखते हैं। इस दौरान देवता के गूर ने देवता का नृत्य भी किया जबकि कारकूनों ने जौ के आटे को हवा में फेंकते हुए बुरी शक्तियों को रोकने का दावा किया। संवाद
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सुबह साढ़े आठ बजे देव आदिब्रह्मा के गूर और बजंतरी सेरी बाजार पहुंचे। उसके बाद बाबा भूतनाथ से होते हुए चौहटा बाजार, समखेतर बाजार, महाजन बाजार, इंदिरा मार्केट होकर पूरे शहर की परिक्रमा की। देवलुओं ने जौ के आटे से बनी सफेद रंग की विभूति हवा में उछाल कर बुरी आत्माओं को दूर रहने का आह्वान किया।
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सुरक्षा कार को लेकर ऐसा माना जाता है कि इससे मंडी शहर पर बुरी आत्माओं का साया नहीं पड़ता है। महाशिवरात्रि के दौरान जनपद के कई देवी-देवता रियासतकाल से ही अपनी भागीदारी निभाते आए हैं। इनमें उत्तरशाल के देवता आदिब्रह्मा की भूमिका अहम मानी जाती है। देव आदि ब्रह्मा एकमात्र ऐसे देवता हैं जिनके रथ की बनावट कुल्लू के देवताओं की रथ शैली की तरह है।
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देव आदि ब्रह्मा का महाशिवरात्रि मेलों से अलग जुड़ाव है। पराशर के सामने टिहरी की पहाड़ियों पर स्थित देव आदिब्रह्मा मंडी महाशिवरात्रि के दौरान शहर की समृद्धि और खुशहाली के लिए बुरी शक्तियों को दूर रखते हैं। इस दौरान देवता के गूर ने देवता का नृत्य भी किया जबकि कारकूनों ने जौ के आटे को हवा में फेंकते हुए बुरी शक्तियों को रोकने का दावा किया। संवाद
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