{"_id":"68fd0d807ebc031d3207e8f9","slug":"complaint-dismissed-in-cheque-bounce-case-mandi-news-c-90-1-ssml1045-174053-2025-10-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mandi News: चेक बाउंस मामले में शिकायत निरस्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mandi News: चेक बाउंस मामले में शिकायत निरस्त
विज्ञापन
मंडी। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने चेक बाउंस मामले में शिकायत को पूर्वकालिक मानते हुए निरस्त कर दिया है। अदालत ने कहा कि शिकायत निर्धारित वैधानिक अवधि पूरी होने से पहले दाखिल की गई थी, इसलिए यह कानून की नजर में अमान्य है।
मामले के तथ्यों के अनुसार राधा देवी निवासी जवाड़ (ऊना) ने 16 अगस्त 2012 को 4.20 लाख रुपये का वाहन ऋण हिंदुजा लेलैंड फाइनेंस लिमिटेड से लिया था। ऋण अदायगी के लिए उन्होंने 16.5 लाख रुपये का चेक 31 अक्तूबर 2017 जारी किया। यह चेक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया अंब शाखा का जारी किया गया था।
कंपनी ने चेक बैंक में प्रस्तुत किया, लेकिन 13 नवंबर 2017 को यह खाता बंद लिखे मेमो के साथ वापस हो गया। इसके बाद कंपनी ने 1 दिसंबर 2017 को विधिक नोटिस भेजा, परंतु भुगतान न होने पर 3 जनवरी 2018 को अदालत में शिकायत दायर कर दी।
विज्ञापन
अदालत ने कहा कि नोटिस भेजे जाने के 15 दिन पूरे होने से पहले शिकायत दाखिल की गई थी। सर्वोच्च न्यायालय के मामलों के हवाले से अदालत ने कहा कि जब तक नोटिस की सेवा के 15 दिन पूरे नहीं हो जाते, तब तक एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत शिकायत दायर नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि 3 जनवरी 2018 को दाखिल की गई शिकायत वैधानिक रूप से समयपूर्व थी और इस आधार पर उसे अमान्य कर खारिज किया जाता है। संवाद
विज्ञापन
मामले के तथ्यों के अनुसार राधा देवी निवासी जवाड़ (ऊना) ने 16 अगस्त 2012 को 4.20 लाख रुपये का वाहन ऋण हिंदुजा लेलैंड फाइनेंस लिमिटेड से लिया था। ऋण अदायगी के लिए उन्होंने 16.5 लाख रुपये का चेक 31 अक्तूबर 2017 जारी किया। यह चेक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया अंब शाखा का जारी किया गया था।
विज्ञापन
कंपनी ने चेक बैंक में प्रस्तुत किया, लेकिन 13 नवंबर 2017 को यह खाता बंद लिखे मेमो के साथ वापस हो गया। इसके बाद कंपनी ने 1 दिसंबर 2017 को विधिक नोटिस भेजा, परंतु भुगतान न होने पर 3 जनवरी 2018 को अदालत में शिकायत दायर कर दी।
विज्ञापन
अदालत ने कहा कि नोटिस भेजे जाने के 15 दिन पूरे होने से पहले शिकायत दाखिल की गई थी। सर्वोच्च न्यायालय के मामलों के हवाले से अदालत ने कहा कि जब तक नोटिस की सेवा के 15 दिन पूरे नहीं हो जाते, तब तक एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत शिकायत दायर नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि 3 जनवरी 2018 को दाखिल की गई शिकायत वैधानिक रूप से समयपूर्व थी और इस आधार पर उसे अमान्य कर खारिज किया जाता है। संवाद