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Mandi News: बरोट-मुलथान उमड़े पर्यटक, होटल और रेस्तरां पैक
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चौहारघाटी के बरोट में स्थानीय भेष भूषा धारण किए पर्यटक। संवाद
चिलचिलाती गर्मी से राहत के लिए कर रहे ठंडी वादियों का रुख
दिल्ली, पंजाब, जम्मू सहित देश भर से पहुंच रहे पर्यटक
संवाद न्यूज एजेंसी
बरोट (मंडी)। चौहारघाटी के बरोट और मुल्थान में इन दिनों पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। एक सप्ताह से सभी होटल, गेस्ट हाउस और रेस्तरां बुक चल रहे हैं। गर्मी के मौसम और वीकेंड पर दिल्ली, पंजाब, जम्मू सहित अन्य राज्यों के पर्यटक कुल्लू-मनाली न जाकर चौहारघाटी के बरोट और मुल्थान की हसीन वादियों को निहारने पहुंच रहे हैं।
इस समय यहां मौजूद करीब 2500 होटल और रेस्तरां पैक हैं। रात्रि ठहराव न मिलने के चलते अधिकांश पर्यटक रात को जोगिंद्रनगर और पधर लौट रहे हैं। सुबह होते ही घाटी के विहंगम नजारों को निहारने दोबारा यहां पहुंच रहे हैं। दिल्ली से आए पर्यटक अमरीक चंद, कृष्ण चंद, सोनू, मोहन सिंह, मेहर चंद आदि ने बताया कि बरोट और मुल्थान का इलाका बड़े शहरों की अपेक्षा बहुत ही शांत है। यहां दिनभर ठंडी हवाएं चल रही हैं। शीतल पेयजल, प्राकृतिक झरने और कुदरत की प्राचीन संस्कृति को देखकर मन को बहुत सुकून मिल रहा है। इस कारण यहां से जाने का मन ही नहीं कर रहा। कहा कि यह पर्यटन स्थल मनाली और शिमला की अपेक्षा सुविधाओं से परिपूर्ण बहुत ही सस्ता है। बरोट के साथ दुर्गा मंदिर के पास खुले मैदान में पर्यटक झरनों का मजा ले रहे हैं। पर्यटक महिलाएं स्थानीय वेशभूषा और पहनावा धारन कर फोटो और सेल्फी ले रही हैं। स्थानीय महिला सुमना, दुर्गा, कृष्णा आदि का कहना है कि पर्यटकों के आने से उन्हें भी रोजगार मिल रहा है। पर्यटक महिलाओं को स्थानीय पहनावे की एवज में उनसे मात्र सौ रुपये की राशि ली जा रही है। होटलियर रमेश, दौलत राम, सीता राम, अमर नाथ, मोहन आदि का कहना है कि जून माह के शुरू में ही घाटी में सभी होटल, रेस्तरां बुक चल रहे हैं। कहीं पर भी कमरे नहीं मिल रहे। पर्यटकों को रात्रि ठहराव के लिए जोगिंद्रनगर और पधर जाना पड़ रहा है। होटल कारोबारियों ने बताया कि अगर प्रदेश सरकार ध्यान दे और घाटी को पर्यटन मानचित्र पर स्थान दे तो यहां वर्ष भर हजारों की तादात में पर्यटक पहुंचेंगे, जिससे स्थानीय लोगों को भी काम मिलेगा।
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दिल्ली, पंजाब, जम्मू सहित देश भर से पहुंच रहे पर्यटक
संवाद न्यूज एजेंसी
बरोट (मंडी)। चौहारघाटी के बरोट और मुल्थान में इन दिनों पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। एक सप्ताह से सभी होटल, गेस्ट हाउस और रेस्तरां बुक चल रहे हैं। गर्मी के मौसम और वीकेंड पर दिल्ली, पंजाब, जम्मू सहित अन्य राज्यों के पर्यटक कुल्लू-मनाली न जाकर चौहारघाटी के बरोट और मुल्थान की हसीन वादियों को निहारने पहुंच रहे हैं।
इस समय यहां मौजूद करीब 2500 होटल और रेस्तरां पैक हैं। रात्रि ठहराव न मिलने के चलते अधिकांश पर्यटक रात को जोगिंद्रनगर और पधर लौट रहे हैं। सुबह होते ही घाटी के विहंगम नजारों को निहारने दोबारा यहां पहुंच रहे हैं। दिल्ली से आए पर्यटक अमरीक चंद, कृष्ण चंद, सोनू, मोहन सिंह, मेहर चंद आदि ने बताया कि बरोट और मुल्थान का इलाका बड़े शहरों की अपेक्षा बहुत ही शांत है। यहां दिनभर ठंडी हवाएं चल रही हैं। शीतल पेयजल, प्राकृतिक झरने और कुदरत की प्राचीन संस्कृति को देखकर मन को बहुत सुकून मिल रहा है। इस कारण यहां से जाने का मन ही नहीं कर रहा। कहा कि यह पर्यटन स्थल मनाली और शिमला की अपेक्षा सुविधाओं से परिपूर्ण बहुत ही सस्ता है। बरोट के साथ दुर्गा मंदिर के पास खुले मैदान में पर्यटक झरनों का मजा ले रहे हैं। पर्यटक महिलाएं स्थानीय वेशभूषा और पहनावा धारन कर फोटो और सेल्फी ले रही हैं। स्थानीय महिला सुमना, दुर्गा, कृष्णा आदि का कहना है कि पर्यटकों के आने से उन्हें भी रोजगार मिल रहा है। पर्यटक महिलाओं को स्थानीय पहनावे की एवज में उनसे मात्र सौ रुपये की राशि ली जा रही है। होटलियर रमेश, दौलत राम, सीता राम, अमर नाथ, मोहन आदि का कहना है कि जून माह के शुरू में ही घाटी में सभी होटल, रेस्तरां बुक चल रहे हैं। कहीं पर भी कमरे नहीं मिल रहे। पर्यटकों को रात्रि ठहराव के लिए जोगिंद्रनगर और पधर जाना पड़ रहा है। होटल कारोबारियों ने बताया कि अगर प्रदेश सरकार ध्यान दे और घाटी को पर्यटन मानचित्र पर स्थान दे तो यहां वर्ष भर हजारों की तादात में पर्यटक पहुंचेंगे, जिससे स्थानीय लोगों को भी काम मिलेगा।

चौहारघाटी के बरोट में स्थानीय भेष भूषा धारण किए पर्यटक। संवाद
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