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Mandi News: नागचाला में बाबा शंभू भारती की याद में रोजाना लग रहा परांठों का भंडारा
Sun, 28 Jul 2024 06:52 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Sun, 28 Jul 2024 06:52 AM IST
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शिव मंदिर नागचला के पास लगाया गया परांठों का भंडारा। -संवाद
नेरचौक (मंडी)। सावन माह में नागचाला में बाबा शंभू भारती की याद में रोजाना देसी घी के परांठों का भंडारा लग रहा है। भंडारे में रोजाना 5000 से अधिक परांठे श्रद्धालु और फोरलेन से गुजरने वाले सैकड़ों वाहनों में सवार लोग ग्रहण कर रहे हैं। भंडारे के आयोजक शंभू सैनी ने बताया कि पहले बाबा शंभू भारती भंडारा लगाते थे, अब उनकी याद में उनके भक्तजन भंडारा लगा रहे हैं।
रोजाना 250 किलो से अधिक से अधिक आटा, 250 किलो आलू, 70 किलो से अधिक दूध और 25 किलो से अधिक देसी घी की खपत हो रही है। बता दें कि शृंगा ऋषि की तपोभूमि नागचला में पूरे विश्व के 12 शिवलिंग स्थापित हैं। मान्यता है कि ऋषि शृंगा ने यहां पर तप किया है। अपनी तपस्या के समय में शृंगा ऋषि रोजाना सुबह स्नान करने के लिए रिवालसर जाते थे।
एक दिन सुबह जब शृंगा ऋषि स्नान कर रहे थे, तो लोमस ऋषि ने स्नान का कारण पूछा। इस पर उन्होंने कहा कि इससे पवित्र जल और कहीं नहीं है। इस पर लोमस ऋषि ने उन्हें आशीर्वाद दिया था कि जहां तुम्हारी तपोभूमि है वहीं पर रिवालसर का जल भी निकलेगा। मान्यता है कि रिवालसर का पवित्र जल नागचला में निकलता है।
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रोजाना 250 किलो से अधिक से अधिक आटा, 250 किलो आलू, 70 किलो से अधिक दूध और 25 किलो से अधिक देसी घी की खपत हो रही है। बता दें कि शृंगा ऋषि की तपोभूमि नागचला में पूरे विश्व के 12 शिवलिंग स्थापित हैं। मान्यता है कि ऋषि शृंगा ने यहां पर तप किया है। अपनी तपस्या के समय में शृंगा ऋषि रोजाना सुबह स्नान करने के लिए रिवालसर जाते थे।
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एक दिन सुबह जब शृंगा ऋषि स्नान कर रहे थे, तो लोमस ऋषि ने स्नान का कारण पूछा। इस पर उन्होंने कहा कि इससे पवित्र जल और कहीं नहीं है। इस पर लोमस ऋषि ने उन्हें आशीर्वाद दिया था कि जहां तुम्हारी तपोभूमि है वहीं पर रिवालसर का जल भी निकलेगा। मान्यता है कि रिवालसर का पवित्र जल नागचला में निकलता है।
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