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दो दिन पहले बड़े हादसे का संकेत दे गया था कोटरोपी का पहाड़
Updated Fri, 18 Aug 2017 11:20 PM IST
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पधर (मंडी)। कोटरोपी त्रासदी के पांच दिन बाद ग्रामीण ने खुलासा किया है कि हादसे के नौ घंटे पहले इसी पहाड़ से धुएं का गुबार उठ रहा था। धमाके भी हुए थे। पहाड़ पर बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई थीं। खतरे को भांपते हुए ग्रामीणों ने इसकी सूचना प्रशासन तक पहुंचा दी थी मगर, त्वरित कार्रवाई करने में रही चूक ने एक बड़े हादसे को टालनेे में देरी कर दी।
त्रासदी से पूर्व कैमरे में कैद की गई कोटरोपी की पहाड़ी की तस्वीरें भू-वैज्ञानिकों के सर्वेक्षण अनुमानों को भी झुठला सकती हैं। भू-वैज्ञानिकों ने भले ही पहाड़ी के दरकने का प्रारंभिक कारण अधिक वर्षा होना, पहाड़ी पर छोटे छोटे स्लाइडिंग का आना और आसपास के नालों में पानी का अधिक बहाव होना बताया है। मगर त्रासदी से नौ घंटे पहले ली तस्वीरों में स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि पहाड़ी दरकने से पहले यहां धुआं उठ रहा था। पहाड़ पर दरारें भी पड़ी थीं।
सराजबागला गांव के बिन्नू ने जो स्पॉट लाइव फोटो खींची है, उसमें भारी मात्रा में धुआं उठता दिख रहा है और नीचे कोटरोपी गांव दिख रहा है जो अब तबाही के मंजर में तबदील है। ग्रामीणों के मुताबिक पहाड़ी दरकने से नौ घंटे पहले इस पहाड़ी पर बड़े धमाके भी हुए हैं और 200 मीटर भूभाग के दायरे में दरारें आईं है। जो दरारें आज भी सराजबागला गांव तक मौजूद हैं। लिहाजा मंडी जिला के कोटरोपी में शनिवार 13 अगस्त की रात को पहाड़ी दरकने से हुई एक बड़ी त्रासदी से भले ही जनजीवन धीरे धीरे सामान्य होने लगा है, मगर तबाही का मंजर प्रत्यक्षदर्शियों की आंखों से कभी ओझल होने वाला नहीं।
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लाल और काले रंग की मिट्टी भी मिली
त्रासदी के बाद घटनास्थल पर भारी मात्रा में लाल, काले रंग की जली हुई मिट्टी भी बरामद हुई है। जिसके नमूने वैज्ञानिकों की टीम ने लैब जांच के लिए भेज दिए हैं। सराजबागला के बिन्नू और समीप के गांव बधाला निवासी हरीश कुमार ने बताया कि कोटरोपी त्रासदी से नौ घंटे पहले पहाड़ी पर धमाकों की आवाजें सुनाई दी थी। मगर उस दौरान किसी प्रकार का नुकसान न होने पर घटना को हलके से ग्रामीणों ने लिया। इसके बाद जमीन धंसने की सूचना रवा गांव के लोगों ने राजस्व विभाग के फील्ड में तैनात कर्मचारियों तक पहुंचा दी थी। बता देें कि कोटरोपी की पहाड़ी पर रवा गांव में जमीन धंसने पर गांव में गुजर बसर करने वाले चार परिवारों ने गांव को छोड़ रिश्तेदारों के यहां शरण ले ली थी, जबकि उनका पशुधन तबाही के मंजर में जिंदा समा गया और आशियाने भी।
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त्रासदी से पूर्व कैमरे में कैद की गई कोटरोपी की पहाड़ी की तस्वीरें भू-वैज्ञानिकों के सर्वेक्षण अनुमानों को भी झुठला सकती हैं। भू-वैज्ञानिकों ने भले ही पहाड़ी के दरकने का प्रारंभिक कारण अधिक वर्षा होना, पहाड़ी पर छोटे छोटे स्लाइडिंग का आना और आसपास के नालों में पानी का अधिक बहाव होना बताया है। मगर त्रासदी से नौ घंटे पहले ली तस्वीरों में स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि पहाड़ी दरकने से पहले यहां धुआं उठ रहा था। पहाड़ पर दरारें भी पड़ी थीं।
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सराजबागला गांव के बिन्नू ने जो स्पॉट लाइव फोटो खींची है, उसमें भारी मात्रा में धुआं उठता दिख रहा है और नीचे कोटरोपी गांव दिख रहा है जो अब तबाही के मंजर में तबदील है। ग्रामीणों के मुताबिक पहाड़ी दरकने से नौ घंटे पहले इस पहाड़ी पर बड़े धमाके भी हुए हैं और 200 मीटर भूभाग के दायरे में दरारें आईं है। जो दरारें आज भी सराजबागला गांव तक मौजूद हैं। लिहाजा मंडी जिला के कोटरोपी में शनिवार 13 अगस्त की रात को पहाड़ी दरकने से हुई एक बड़ी त्रासदी से भले ही जनजीवन धीरे धीरे सामान्य होने लगा है, मगर तबाही का मंजर प्रत्यक्षदर्शियों की आंखों से कभी ओझल होने वाला नहीं।
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लाल और काले रंग की मिट्टी भी मिली
त्रासदी के बाद घटनास्थल पर भारी मात्रा में लाल, काले रंग की जली हुई मिट्टी भी बरामद हुई है। जिसके नमूने वैज्ञानिकों की टीम ने लैब जांच के लिए भेज दिए हैं। सराजबागला के बिन्नू और समीप के गांव बधाला निवासी हरीश कुमार ने बताया कि कोटरोपी त्रासदी से नौ घंटे पहले पहाड़ी पर धमाकों की आवाजें सुनाई दी थी। मगर उस दौरान किसी प्रकार का नुकसान न होने पर घटना को हलके से ग्रामीणों ने लिया। इसके बाद जमीन धंसने की सूचना रवा गांव के लोगों ने राजस्व विभाग के फील्ड में तैनात कर्मचारियों तक पहुंचा दी थी। बता देें कि कोटरोपी की पहाड़ी पर रवा गांव में जमीन धंसने पर गांव में गुजर बसर करने वाले चार परिवारों ने गांव को छोड़ रिश्तेदारों के यहां शरण ले ली थी, जबकि उनका पशुधन तबाही के मंजर में जिंदा समा गया और आशियाने भी।