{"_id":"5aef3ad44f1c1bb56a8b80e9","slug":"191525627604-mandi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चीन से केंद्र सरकार को चेता गए संघ के वरिष्ठ प्रचारक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चीन से केंद्र सरकार को चेता गए संघ के वरिष्ठ प्रचारक
Updated Sun, 06 May 2018 11:06 PM IST
विज्ञापन
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मंडी। महापुरुषों के सहारे आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार भारत चीन संबंध मुक्ति का मार्ग राष्ट्रीय सम्मेलन में जहां एक तरफ चीन को ललकार गए वहीं, केंद्र सरकार को चीन की समस्या से आगाह भी कर गए। फ्रांस की क्रांति के सेनापति नेपोलियन बोनापोर्ट, स्वामी विवेकानंद और प्रख्यात उपन्यासकार बकिंमचंद्र चट्टोपाध्याय के कथन का जिक्र करते हुए उन्होंने चीन को आइना दिखाया। भारत सरकार को चुनौती से तैयार रहने के लिए आगाह भी किया। उन्होंने कहा कि 1800 में नेपोलियन चीन को दुनिया के लिए बड़ा खतरा बता गए थे। उनकी चिंता वाजिब थी। हिमालय पर कब्जे के मंसूबे बनाए बैठा चीन भविष्य में दुनियाभर के लिए खतरा बन सकता है। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि चीन सोए हुआ अजगर के समान है। जब जागेगा तो दुनिया में कोहराम मचाएगा। वहीं, बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने कहा था कि अभी चीन की गिनती किसी में नहीं है। लेकिन, यह भविष्य का सबसे बड़ा खतरा होगा। तिब्बत चीन और ब्रिटिश भारत-शिमला समझौता जिसे मैकमोहन का नाम दिया गया, उसे भी चीन ने नकार दिया। 1954 में पंचशील समझौते की अवधि को आठ वर्ष तक अनुबंधित कर चीन ने मक्कारी दिखा कर 1962 में हमारे देश पर हमला किया। चीन शुरू से ही विश्वास योग्य देश नहीं रहा है। चीन की मानसिकता का पता इसी बात से चलता है कि दोकलम में लिटिल वार के नाम पर बिना हथियार के सैनिक भेज कर चीन ने दबाव तैयार करना चाहा। अब इससे देश चौकन्ना है। अब देश को डेवलप बार्डर चाहिए।
भारत तिब्बत सहयोग मंच के संरक्षक एवं केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति डा. कुलदीप अग्निहोत्री ने कहा कि तिब्बत को भगवान शिव और बुद्ध का आशीर्वाद प्राप्त है। हिंदुओं का पवित्र धार्मिक स्थल कैलाश मानसरोवर तिब्बत में स्थित है। भगवान श्रीराम का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह से भारत को संगठित कर श्रीराम ने लंकापति रावण पर विजयी प्राप्त कर माता सीता को कैद से छुड़ाया था, उसी प्रकार हमारी पीढ़ी के पास भी संगठित होकर चीन को जवाब देने का मौका है। निर्वासित तिब्बती सरकार के स्वास्थ्य मंत्री वांगचुक ने कहा कि भगवान पद्मसंभव ने अपनी शिक्षाओं के लिए 18वीं शताब्दी में मंडी को चुना था। उन्होंने यहां पर तप कर शक्तियां अर्जित कर तिब्बत में बौद्ध धर्म का प्रचार किया। सहयोग मंच का तप 20वें वर्ष में प्रवेश कर गया है। अब चीन की घटिया सोच और तानाशाही को खत्म करके तिब्बत की आजादी पर ही यह तप पूरा होगा।
विज्ञापन
भारत तिब्बत सहयोग मंच के संरक्षक एवं केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति डा. कुलदीप अग्निहोत्री ने कहा कि तिब्बत को भगवान शिव और बुद्ध का आशीर्वाद प्राप्त है। हिंदुओं का पवित्र धार्मिक स्थल कैलाश मानसरोवर तिब्बत में स्थित है। भगवान श्रीराम का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह से भारत को संगठित कर श्रीराम ने लंकापति रावण पर विजयी प्राप्त कर माता सीता को कैद से छुड़ाया था, उसी प्रकार हमारी पीढ़ी के पास भी संगठित होकर चीन को जवाब देने का मौका है। निर्वासित तिब्बती सरकार के स्वास्थ्य मंत्री वांगचुक ने कहा कि भगवान पद्मसंभव ने अपनी शिक्षाओं के लिए 18वीं शताब्दी में मंडी को चुना था। उन्होंने यहां पर तप कर शक्तियां अर्जित कर तिब्बत में बौद्ध धर्म का प्रचार किया। सहयोग मंच का तप 20वें वर्ष में प्रवेश कर गया है। अब चीन की घटिया सोच और तानाशाही को खत्म करके तिब्बत की आजादी पर ही यह तप पूरा होगा।
विज्ञापन