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Kullu News: कुल्लू में फिर चलेंगे पारंपरिक घराट
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कुल्लू। जिले में पारंपरिक घराटों को दोबारा शुरू कर ग्रामीणों के लिए स्वरोजगार के अवसर तलाशे जाएंगे। जायका परियोजना के निदेशक डॉ. सुनील चौहान ने शुक्रवार को फलटनालह और शिरार में सिंचाई योजनाओं का निरीक्षण कर अधिकारियों को घराटों के दोबारा संचालन की संभावनाओं पर प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।
हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना (चरण-दो) के तहत फलटनालह पहुंचे डॉ. चौहान ने बहाव सिंचाई योजना का जायजा लिया और किसानों से खेतों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग कर पारंपरिक जलचालित आटा चक्कियों को दोबारा चलाने से ग्रामीणों की आजीविका के नए साधन विकसित होंगे। इससे पारंपरिक विरासत के संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
उन्होंने फलटनालह में ट्राउट पालन के प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण कर इसकी संभावनाएं भी जानीं। इसके बाद शिरार गांव में निर्माणाधीन शिरार-सौनी पुल से रौंडा सेरी बहाव सिंचाई योजना के कार्य की समीक्षा की। उन्होंने नक्शों और निर्माण संबंधी दस्तावेजों का अवलोकन कर काम निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूरा करने के निर्देश दिए।
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डॉ. चौहान ने कहा कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से किसानों को खेतों तक पानी पहुंचाने में मदद मिलेगी और कृषि उत्पादन व आय बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत होंगी। निरीक्षण के दौरान राज्य, जिला और खंड परियोजना प्रबंधन इकाइयों के अधिकारी और तकनीकी कर्मचारी मौजूद रहे।
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हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना (चरण-दो) के तहत फलटनालह पहुंचे डॉ. चौहान ने बहाव सिंचाई योजना का जायजा लिया और किसानों से खेतों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग कर पारंपरिक जलचालित आटा चक्कियों को दोबारा चलाने से ग्रामीणों की आजीविका के नए साधन विकसित होंगे। इससे पारंपरिक विरासत के संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
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उन्होंने फलटनालह में ट्राउट पालन के प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण कर इसकी संभावनाएं भी जानीं। इसके बाद शिरार गांव में निर्माणाधीन शिरार-सौनी पुल से रौंडा सेरी बहाव सिंचाई योजना के कार्य की समीक्षा की। उन्होंने नक्शों और निर्माण संबंधी दस्तावेजों का अवलोकन कर काम निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूरा करने के निर्देश दिए।
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डॉ. चौहान ने कहा कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से किसानों को खेतों तक पानी पहुंचाने में मदद मिलेगी और कृषि उत्पादन व आय बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत होंगी। निरीक्षण के दौरान राज्य, जिला और खंड परियोजना प्रबंधन इकाइयों के अधिकारी और तकनीकी कर्मचारी मौजूद रहे।