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पर्यटन सीजन शुरू, शौचालयों की व्यवस्था नहीं
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कोकसर में बने सार्वजनिक शौचालय में लटका ताला। -संवाद
- फोटो : Kullu
दिनेश जस्पा
उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। जिला लाहौल-स्पीति में भी पर्यटन सीजन शुरू हो गया है। रोहतांग दर्रे के साथ सटे कोकसर में दो सप्ताह से प्रतिदिन हजारों की संख्या में पर्यटक बर्फ का दीदार व मस्ती करने पहुंच रहे हैं, लेकिन यहां शौचालय के अभाव में हर तरफ अब गंदगी का आलम है। कोकसर में एक सुलभ शौचालय भी है, जो नवंबर 2021 से बंद पड़ा है।
प्रशासन व पंचायत की ओर से स्थापित किए गए सभी छह मिनी टायलेट भी बर्फबारी से ध्वस्त हो गए। मिनी टायलेट फाइबर से बने हुए थे। पर्यटन सीजन शुरू होने पर प्रशासन ने न तो सुलभ शौचालय खुलवाया और न ही मिनी टायलेट की व्यवस्था की है। अटल टनल रोहतांग से पर्यटन स्थल कोकसर की दूरी करीब 14 किमी है। ऐसे में कोकसर आने वाले हजारों पर्यटक खुले में ही गंदगी फैलाने के लिए मजबूर हैं। यही नहीं यहां कचरा प्रबंधन की भी कोई खास व्यवस्था नहीं है। स्थानीय महिलाओं का कहना है कि पर्यटकों के अधिक संख्या में आने से वे खुश हैं, लेकिन पर्यटकों के लिए शौचालय की उचित व्यवस्था नहीं है। कहा कि कोकसर गांव में न तो सैलानियों के लिए शौचालय है और न ही स्वच्छता के लिए कोई ठोस प्रबंध। जगह-जगह पसरी गंदगी से पर्यटक व स्थानीय लोग परेशान हैं। अहमदाबाद से घूमने आए दंपती मनोज तिवारी और अर्चना तिवारी ने बताया कि प्रकृति ने यहां इतनी खूबसूरत वादियां दी हैं तो इसका रखरखाव करना भी सबका कर्तव्य है। कहा कि यहां शौचालय तक की सुविधाएं नहीं है, जो सुलभ शौचालय है, वहां ताला लगा है। ऐसे में पर्यटक मजबूर होकर खुले में शौच कर रहे हैं। स्वच्छता के भी कोई खास इंतजाम नहीं है। संवाद
ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी पंचायतों की है। पंचायत में धन की कमी नहीं है। पंचायत अपने स्तर पर व्यवस्था सुदृढ़ कर सकती है।
-नीरज कुमार, उपायुक्त, लाहौल-स्पीति
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उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। जिला लाहौल-स्पीति में भी पर्यटन सीजन शुरू हो गया है। रोहतांग दर्रे के साथ सटे कोकसर में दो सप्ताह से प्रतिदिन हजारों की संख्या में पर्यटक बर्फ का दीदार व मस्ती करने पहुंच रहे हैं, लेकिन यहां शौचालय के अभाव में हर तरफ अब गंदगी का आलम है। कोकसर में एक सुलभ शौचालय भी है, जो नवंबर 2021 से बंद पड़ा है।
प्रशासन व पंचायत की ओर से स्थापित किए गए सभी छह मिनी टायलेट भी बर्फबारी से ध्वस्त हो गए। मिनी टायलेट फाइबर से बने हुए थे। पर्यटन सीजन शुरू होने पर प्रशासन ने न तो सुलभ शौचालय खुलवाया और न ही मिनी टायलेट की व्यवस्था की है। अटल टनल रोहतांग से पर्यटन स्थल कोकसर की दूरी करीब 14 किमी है। ऐसे में कोकसर आने वाले हजारों पर्यटक खुले में ही गंदगी फैलाने के लिए मजबूर हैं। यही नहीं यहां कचरा प्रबंधन की भी कोई खास व्यवस्था नहीं है। स्थानीय महिलाओं का कहना है कि पर्यटकों के अधिक संख्या में आने से वे खुश हैं, लेकिन पर्यटकों के लिए शौचालय की उचित व्यवस्था नहीं है। कहा कि कोकसर गांव में न तो सैलानियों के लिए शौचालय है और न ही स्वच्छता के लिए कोई ठोस प्रबंध। जगह-जगह पसरी गंदगी से पर्यटक व स्थानीय लोग परेशान हैं। अहमदाबाद से घूमने आए दंपती मनोज तिवारी और अर्चना तिवारी ने बताया कि प्रकृति ने यहां इतनी खूबसूरत वादियां दी हैं तो इसका रखरखाव करना भी सबका कर्तव्य है। कहा कि यहां शौचालय तक की सुविधाएं नहीं है, जो सुलभ शौचालय है, वहां ताला लगा है। ऐसे में पर्यटक मजबूर होकर खुले में शौच कर रहे हैं। स्वच्छता के भी कोई खास इंतजाम नहीं है। संवाद
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ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी पंचायतों की है। पंचायत में धन की कमी नहीं है। पंचायत अपने स्तर पर व्यवस्था सुदृढ़ कर सकती है।
-नीरज कुमार, उपायुक्त, लाहौल-स्पीति