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Kullu News: पहाड़ पर आंखों को बीमार कर रही तेज धूप
Sat, 22 Nov 2025 10:48 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sat, 22 Nov 2025 10:48 PM IST
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मैक्युलर डिजनरेशन जैसे नेत्र रोगों की चपेट में आ रहे हैं 50 साल से अधिक आयु के लोग
नेशनल सोसायटी फोर द प्रिवेंशन ऑफ ब्लाइंडनेस के डाक्टरों की स्टडी में हुआ रोग का खुलासा
रोशन ठाकुर
कुल्लू। हाई एल्टीट्यूड की तेज धूप अब पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों की आंखों के लिए गंभीर खतरे का कारण बन रही है। कुल्लू स्थित रायसन आई अस्पताल में की गई स्टडी में पाया गया है कि 50 साल से अधिक उम्र के लोग मैक्युलर डिजनरेशन जैसे नेत्र रोग की चपेट में तेजी से आ रहे हैं जो केंद्रीय दृष्टि को प्रभावित करता है।
जिला कुल्लू और लाहौल-सहित प्रदेश के ऊंचे इलाकों का वातावरण प्रदूषण रहित है लेकिन हाई एल्टीट्यूड के कारण सूरज की रोशनी आंखों की रोशनी को प्रभावित कर रही है। इसका खुलासा एम्स से जुड़ी नेशनल सोसायटी फोर द प्रिवेंशन ऑफ ब्लाइंडनेस के डाक्टरों ने कुल्लू के रायसन नेत्र अस्पताल में की एक स्टडी में हुआ है। रायसन में दिल्ली के डाक्टरों की टीम 25 सालों से आंखों के मरीजों की जांच कर रही है। आंखों के विशेषज्ञ डाॅ. राजीव मोहन ने टीम के साथ अध्ययन किया है। उन्होंने यह स्टडी 2010-11 में की है।
रायसन में नेत्र अस्पताल अमेरिकी चिकित्सक डॉ. विक्टर सी रैम्बो ने 1956 खोला था। अभी तक लाखों लोगों की आंखों का उपचार किया जा चुका है। डाॅ. राजीव मोहन ने बताया कि तेज धूप के कारण आंखों के मध्य भाग को नुकसान पहुंचाता है। इसे मैक्यूला कहते हैं। इससे आंखों की केंद्रीय दृष्टि प्रभावित होती है। मैक्युलर डिजनरेशन नामक नेत्र रोग पढ़ने-लिखने, वाहन चलाने और चेहरे पहचानने जैसी गतिविधियों को प्रभावित करता है। हालांकि इससे पूर्ण रूप से अंधापन नहीं होता है लेकिन यह रोग दोनों आंखों को प्रभावित कर सकता है। स्टडी में सामने आया कि यह रोग 50 साल से अधिक उम्र के लोगों में देखने को मिलता है।
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नियमित जांच के साथ व्यायाम करना चाहिए
इस बीमारी की रोकथाम के लिए लोगों को आंखों की नियमित जांच करवानी चाहिए। स्वस्थ जीवन शैली, वजन को स्थिर बनाए रखना, व्यायाम करना और फलों और सब्जियों से भरपूर आहार लेना चाहिए। धूम्रपान छोड़ने से मैक्युलर डिजनरेशन के जोखिम को कम किया जा सकता है। एंटीऑक्सीडेंट विटामिन से रोग को रोकने में मदद मिलती है। डॉ. राजीव मोहन ने कहा कि इस रोग का इसका इलाज महंगा है। इसमें लगने वाले इंजेक्शन काफी महंगा होता है।
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नेशनल सोसायटी फोर द प्रिवेंशन ऑफ ब्लाइंडनेस के डाक्टरों की स्टडी में हुआ रोग का खुलासा
रोशन ठाकुर
कुल्लू। हाई एल्टीट्यूड की तेज धूप अब पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों की आंखों के लिए गंभीर खतरे का कारण बन रही है। कुल्लू स्थित रायसन आई अस्पताल में की गई स्टडी में पाया गया है कि 50 साल से अधिक उम्र के लोग मैक्युलर डिजनरेशन जैसे नेत्र रोग की चपेट में तेजी से आ रहे हैं जो केंद्रीय दृष्टि को प्रभावित करता है।
जिला कुल्लू और लाहौल-सहित प्रदेश के ऊंचे इलाकों का वातावरण प्रदूषण रहित है लेकिन हाई एल्टीट्यूड के कारण सूरज की रोशनी आंखों की रोशनी को प्रभावित कर रही है। इसका खुलासा एम्स से जुड़ी नेशनल सोसायटी फोर द प्रिवेंशन ऑफ ब्लाइंडनेस के डाक्टरों ने कुल्लू के रायसन नेत्र अस्पताल में की एक स्टडी में हुआ है। रायसन में दिल्ली के डाक्टरों की टीम 25 सालों से आंखों के मरीजों की जांच कर रही है। आंखों के विशेषज्ञ डाॅ. राजीव मोहन ने टीम के साथ अध्ययन किया है। उन्होंने यह स्टडी 2010-11 में की है।
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रायसन में नेत्र अस्पताल अमेरिकी चिकित्सक डॉ. विक्टर सी रैम्बो ने 1956 खोला था। अभी तक लाखों लोगों की आंखों का उपचार किया जा चुका है। डाॅ. राजीव मोहन ने बताया कि तेज धूप के कारण आंखों के मध्य भाग को नुकसान पहुंचाता है। इसे मैक्यूला कहते हैं। इससे आंखों की केंद्रीय दृष्टि प्रभावित होती है। मैक्युलर डिजनरेशन नामक नेत्र रोग पढ़ने-लिखने, वाहन चलाने और चेहरे पहचानने जैसी गतिविधियों को प्रभावित करता है। हालांकि इससे पूर्ण रूप से अंधापन नहीं होता है लेकिन यह रोग दोनों आंखों को प्रभावित कर सकता है। स्टडी में सामने आया कि यह रोग 50 साल से अधिक उम्र के लोगों में देखने को मिलता है।
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नियमित जांच के साथ व्यायाम करना चाहिए
इस बीमारी की रोकथाम के लिए लोगों को आंखों की नियमित जांच करवानी चाहिए। स्वस्थ जीवन शैली, वजन को स्थिर बनाए रखना, व्यायाम करना और फलों और सब्जियों से भरपूर आहार लेना चाहिए। धूम्रपान छोड़ने से मैक्युलर डिजनरेशन के जोखिम को कम किया जा सकता है। एंटीऑक्सीडेंट विटामिन से रोग को रोकने में मदद मिलती है। डॉ. राजीव मोहन ने कहा कि इस रोग का इसका इलाज महंगा है। इसमें लगने वाले इंजेक्शन काफी महंगा होता है।