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Kullu News: मनाली में लावारिस कुत्तों के आतंक रोक रहा राहगीरों का रास्ता
Fri, 07 Nov 2025 10:40 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Fri, 07 Nov 2025 10:40 PM IST
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मनाली में राहगीरो के पीछे पड़े आवारा कुत्ते।-संवाद
पर्यटन नगरी के लोगों को रात और सुबह के समय घरों से निकलना भी हुआ मुश्किल
स्कूली विद्यार्थियों को लेकर अभिभावक चिंतित, बोले- हरदम रहता है हमले का डर
संवाद न्यूज एजेंसी
मनाली। पर्यटन नगरी में लावारिस कुत्तों के झुंडों से लोग खौफजदा हैं। रात और सुबह के समय लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। लोग अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
स्कूल आते-जाते और खेलते हुए बच्चों पर कुत्तों के हमले का डर रहता है। हालत यह हैं कि शहर से गांवों तक कुत्तों के झुंड घूम रहे हैं। प्रशासन और नगर परिषद कोई कदम नहीं उठा रहे हैं। नगर परिषद लावारिस कुत्तों की नसबंदी कर औपचारिकता पूरी की जा रही है।
मनाली शहर में बस स्टैंड, गोंपा रोड, भूतनाथ मंदिर के आसपास, रामबाग, मिशन अस्पताल मार्ग में कुत्तों के झुंड अकसर देखे जा सकते हैं। कई बार कुत्ते राह चलते लोगों पर हमला कर चुके हैं। इतना ही नहीं, साथ लगते ओल्ड मनाली, ढूंगरी, अलेउ, वशिष्ट और बहंग में भी कुत्तों ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। कुत्तों के आतंक से छुटकारा दिलाने के लिए न तो प्रशासन और न ही नगर परिषद ने कोई ठोस योजना बनाई। कुत्तों को शेल्टर होम बनाने की बातें तो खूब होती रहीं लेकिन धरातल पर कार्य नहीं हुआ। हालांकि, समय-समय पर स्वयं सेवी संस्थाओं के साथ मिलकर नगर परिषद ने नसबंदी के लिए अभियान जरूर चलाए हैं। हालत यह है कि बस स्टैंड से सुबह कोई मालरोड की तरफ आए तो कुत्तों के खौफ के कारण आना मुश्किल हो जाता है। मालरोड में भी कुत्ते डेरा जमाए रहते हैं।
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नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी करुण भरमौरिया ने बताया कि नगर परिषद ने कुत्तों कि नसबंदी के लिए अभियान चलाया है। अब तक लगभग 400 कुत्तों की नसबंदी करवाई गई है। शेष कुत्तों की नसबंदी करवाने के लिए भी जल्द शहर में अभियान चलाया जाएगा।
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कुत्तों के आतंक से लोगों का चलना-फिरना मुश्किल हो गया है। स्कूल के बच्चे जब तक घर नहीं लौटते, अभिभावक चिंतित रहते हैं। ग्रामीण इलाकों में भी हालत ऐसे ही बने हुए हैं। इसके स्थायी समाधान के लिए प्रशासन और नगर परिषद को योजना बनाकर कार्य करने की जरूरत है। - सुरेश कश्यप, मनाली
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हर रोज सुबह सैर को निकलते हैं। मालरोड हो या शहर की गलियां, हर जगह कुत्तों का आतंक है। हाथ में डंडा न हो तो कुत्ते हमले पर उतारू हो जाते हैं। ढूंगरी और रामबाग इलाके में भी अकसर कुत्तों के झुंड रहते हैं। इससे लोगों का चलना फिरना मुश्किल हो गया है। -गोवर्धन शर्मा
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स्कूली विद्यार्थियों को लेकर अभिभावक चिंतित, बोले- हरदम रहता है हमले का डर
संवाद न्यूज एजेंसी
मनाली। पर्यटन नगरी में लावारिस कुत्तों के झुंडों से लोग खौफजदा हैं। रात और सुबह के समय लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। लोग अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
स्कूल आते-जाते और खेलते हुए बच्चों पर कुत्तों के हमले का डर रहता है। हालत यह हैं कि शहर से गांवों तक कुत्तों के झुंड घूम रहे हैं। प्रशासन और नगर परिषद कोई कदम नहीं उठा रहे हैं। नगर परिषद लावारिस कुत्तों की नसबंदी कर औपचारिकता पूरी की जा रही है।
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मनाली शहर में बस स्टैंड, गोंपा रोड, भूतनाथ मंदिर के आसपास, रामबाग, मिशन अस्पताल मार्ग में कुत्तों के झुंड अकसर देखे जा सकते हैं। कई बार कुत्ते राह चलते लोगों पर हमला कर चुके हैं। इतना ही नहीं, साथ लगते ओल्ड मनाली, ढूंगरी, अलेउ, वशिष्ट और बहंग में भी कुत्तों ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। कुत्तों के आतंक से छुटकारा दिलाने के लिए न तो प्रशासन और न ही नगर परिषद ने कोई ठोस योजना बनाई। कुत्तों को शेल्टर होम बनाने की बातें तो खूब होती रहीं लेकिन धरातल पर कार्य नहीं हुआ। हालांकि, समय-समय पर स्वयं सेवी संस्थाओं के साथ मिलकर नगर परिषद ने नसबंदी के लिए अभियान जरूर चलाए हैं। हालत यह है कि बस स्टैंड से सुबह कोई मालरोड की तरफ आए तो कुत्तों के खौफ के कारण आना मुश्किल हो जाता है। मालरोड में भी कुत्ते डेरा जमाए रहते हैं।
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नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी करुण भरमौरिया ने बताया कि नगर परिषद ने कुत्तों कि नसबंदी के लिए अभियान चलाया है। अब तक लगभग 400 कुत्तों की नसबंदी करवाई गई है। शेष कुत्तों की नसबंदी करवाने के लिए भी जल्द शहर में अभियान चलाया जाएगा।
कुत्तों के आतंक से लोगों का चलना-फिरना मुश्किल हो गया है। स्कूल के बच्चे जब तक घर नहीं लौटते, अभिभावक चिंतित रहते हैं। ग्रामीण इलाकों में भी हालत ऐसे ही बने हुए हैं। इसके स्थायी समाधान के लिए प्रशासन और नगर परिषद को योजना बनाकर कार्य करने की जरूरत है। - सुरेश कश्यप, मनाली
हर रोज सुबह सैर को निकलते हैं। मालरोड हो या शहर की गलियां, हर जगह कुत्तों का आतंक है। हाथ में डंडा न हो तो कुत्ते हमले पर उतारू हो जाते हैं। ढूंगरी और रामबाग इलाके में भी अकसर कुत्तों के झुंड रहते हैं। इससे लोगों का चलना फिरना मुश्किल हो गया है। -गोवर्धन शर्मा